Gumla : सर्पदंश के सात मामले आए सामने, वृद्ध की मौत, छह लोगों का अस्पताल में इलाज जारी
गुमला : झारखंड के गुमला जिले में लगातार हो रही बारिश के बीच सर्पदंश की घटनाओं में तेजी देखने को मिल रही है। रविवार को जिले के विभिन्न क्षेत्रों से सांप के काटने के सात मामले सामने आए, जिनमें एक 57 वर्षीय वृद्ध की मौत हो गई, जबकि छह अन्य लोगों का गुमला सदर अस्पताल में इलाज चल रहा है। एक ही दिन में सामने आए इतने मामलों ने स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। चिकित्सकों ने लोगों से विशेष सतर्कता बरतने और सांप के काटने की स्थिति में झाड़-फूंक के बजाय तुरंत अस्पताल पहुंचने की अपील की है।
जानकारी के अनुसार, सबसे दुखद घटना घाघरा थाना क्षेत्र के गिरजा टोली गांव में हुई। यहां 57 वर्षीय पतरस बरला शनिवार देर रात अपने घर में जमीन पर बिस्तर बिछाकर सो रहे थे। इसी दौरान एक विषैले सांप ने उनके हाथ में डस लिया। शुरुआत में उन्हें सामान्य दर्द महसूस हुआ, लेकिन कुछ ही देर में उनकी तबीयत तेजी से बिगड़ने लगी। परिजनों ने उन्हें बचाने का प्रयास किया, लेकिन स्थिति गंभीर होने के कारण उनकी मौत हो गई। घटना के बाद परिवार में मातम का माहौल है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, बारिश के मौसम में गांवों में सांपों का निकलना आम बात हो गई है। खेतों, झाड़ियों और घरों के आसपास पानी भर जाने से सांप सुरक्षित स्थानों की तलाश में घरों में घुस जाते हैं। ऐसे में जमीन पर सोने वाले लोगों के लिए खतरा और बढ़ जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि बारिश शुरू होने के बाद क्षेत्र में सर्पदंश की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं।
रविवार को जिले के अलग-अलग इलाकों से सांप के काटने के छह और मामले भी सामने आए। सभी पीड़ितों को तत्काल गुमला सदर अस्पताल लाया गया, जहां चिकित्सकों की निगरानी में उनका उपचार किया जा रहा है। अस्पताल प्रशासन के अनुसार, सभी मरीजों को एंटी स्नेक वेनम (ASV) सहित आवश्यक उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है। डॉक्टर लगातार उनकी स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।
अस्पताल के चिकित्सकों का कहना है कि सर्पदंश के मामलों में समय पर इलाज मिलना सबसे महत्वपूर्ण होता है। यदि मरीज को जल्द अस्पताल पहुंचा दिया जाए तो अधिकांश मामलों में उसकी जान बचाई जा सकती है। वहीं, इलाज में देरी होने या झाड़-फूंक जैसी परंपरागत विधियों पर भरोसा करने से मरीज की हालत गंभीर हो सकती है।
स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से अपील की है कि बारिश के मौसम में अतिरिक्त सावधानी बरतें। रात के समय जमीन पर सोने से बचें, घर के आसपास साफ-सफाई रखें और झाड़ियों या लकड़ियों के ढेर के पास जाते समय सतर्क रहें। खेतों में काम करने वाले किसानों और मजदूरों को जूते पहनकर काम करने तथा अंधेरे में टॉर्च का उपयोग करने की भी सलाह दी गई है।
विशेषज्ञों के अनुसार, सांप के काटने के बाद घबराने के बजाय मरीज को शांत रखना चाहिए और प्रभावित अंग को ज्यादा हिलाने-डुलाने से बचाना चाहिए। किसी भी प्रकार की घरेलू उपचार पद्धति, चीरा लगाने, जहर चूसने या झाड़-फूंक जैसे उपायों से बचना चाहिए। मरीज को जितनी जल्दी हो सके निकटतम स्वास्थ्य केंद्र या अस्पताल पहुंचाना ही सबसे सुरक्षित उपाय है।
जिला प्रशासन ने भी लोगों से अफवाहों और अंधविश्वास से दूर रहने की अपील की है। अधिकारियों का कहना है कि स्वास्थ्य केंद्रों में सर्पदंश के उपचार के लिए आवश्यक दवाएं उपलब्ध हैं और आपात स्थिति में तत्काल चिकित्सा सुविधा दी जा रही है। साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को जागरूक करने के लिए स्वास्थ्य कर्मियों के माध्यम से अभियान भी चलाया जा रहा है।
मानसून के दौरान झारखंड के कई जिलों में हर वर्ष सर्पदंश की घटनाएं बढ़ जाती हैं। लगातार बारिश और जलभराव के कारण सांप अपने बिलों से निकलकर रिहायशी इलाकों में पहुंच जाते हैं। ऐसे में ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता होती है।
फिलहाल गुमला सदर अस्पताल में भर्ती सभी छह मरीजों का इलाज जारी है और चिकित्सकों की टीम उनकी लगातार निगरानी कर रही है। वहीं, घाघरा थाना क्षेत्र में मृतक पतरस बरला के निधन से गांव में शोक का माहौल है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि सर्पदंश की किसी भी घटना को हल्के में न लें और तत्काल चिकित्सा सहायता प्राप्त करें, क्योंकि समय पर इलाज ही जीवन बचाने का सबसे प्रभावी उपाय है।