झारखंड : प्रखंड क्षेत्र के परबा पंचायत अंतर्गत पोमिया गांव में शनिवार रात अचानक 22 जंगली हाथियों का झुंड पहुंचने से ग्रामीणों में दहशत फैल गई। देर रात गांव के आसपास हाथियों की मौजूदगी की सूचना मिलते ही लोगों में अफरातफरी का माहौल बन गया। झुंड में करीब 20 वयस्क हाथी और दो शावक शामिल थे। ग्रामीणों ने इसकी सूचना तत्काल वन विभाग को दी, जिसके बाद विभाग की टीम मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास शुरू किया।
सूचना मिलते ही वन विभाग के प्रभारी फॉरेस्टर हेमंत कुमार अपनी टीम के साथ पोमिया गांव पहुंचे। वन कर्मियों ने मौके पर पहुंचकर हाथियों की गतिविधियों पर नजर रखी और ग्रामीणों को सावधानी बरतने की सलाह दी। अधिकारियों ने लोगों से अपील की कि वे हाथियों के झुंड के करीब न जाएं और किसी भी तरह की छेड़छाड़ करने से बचें।
ग्रामीणों के अनुसार, शनिवार रात अचानक गांव के आसपास हाथियों की आवाजाही शुरू हो गई। खेतों और जंगल से सटे इलाकों में हाथियों को देखकर लोग अपने घरों से बाहर निकल आए। बड़ी संख्या में हाथियों के पहुंचने से ग्रामीणों में भय का माहौल बन गया। लोग अपने घरों और सामान की सुरक्षा को लेकर चिंतित नजर आए।
स्थानीय लोगों ने बताया कि हाथियों का झुंड अक्सर जंगल से निकलकर आसपास के गांवों की ओर आ जाता है। भोजन और पानी की तलाश में हाथी आबादी वाले क्षेत्रों के नजदीक पहुंच जाते हैं। ऐसे में ग्रामीणों को फसलों और संपत्ति के नुकसान का खतरा बना रहता है।
वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि हाथियों के झुंड की गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा रही है। टीम ने ग्रामीणों को समझाया कि हाथियों को भगाने या उनके नजदीक जाने की कोशिश न करें, क्योंकि इससे स्थिति खतरनाक हो सकती है। हाथी सामान्य रूप से शांत रहते हैं, लेकिन खतरा महसूस होने पर आक्रामक हो सकते हैं।
वन विभाग की टीम ने ग्रामीणों को जागरूक करते हुए कहा कि रात के समय विशेष सतर्कता बरतें। जंगल या खेतों की ओर अकेले जाने से बचें और हाथियों की मौजूदगी की जानकारी तुरंत वन विभाग को दें। अधिकारियों ने कहा कि विभाग की प्राथमिकता मानव और वन्यजीव दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
ग्रामीणों ने बताया कि हाथियों के आने से क्षेत्र में भय का माहौल बना हुआ है। कई लोग रातभर जागकर स्थिति पर नजर रखते रहे। ग्रामीणों को आशंका है कि यदि हाथियों का झुंड लंबे समय तक इलाके में रहा तो फसलों को नुकसान पहुंच सकता है। उन्होंने प्रशासन और वन विभाग से सुरक्षा और निगरानी बढ़ाने की मांग की है।
हाथियों का गांवों की ओर आना जंगलों में भोजन और पानी की कमी, वन क्षेत्र में बदलाव और हाथियों के पारंपरिक मार्गों में बाधा जैसे कारणों से जुड़ा माना जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, हाथियों के आवागमन वाले क्षेत्रों में मानव-वन्यजीव संघर्ष की संभावना बढ़ जाती है। इसके लिए समय पर सूचना, निगरानी और लोगों में जागरूकता बेहद जरूरी होती है।
वन विभाग ने ग्रामीणों को यह भी बताया कि हाथियों को नुकसान पहुंचाने या उन्हें परेशान करने से बचें। विभाग की ओर से हाथियों के सुरक्षित मार्ग से वापस जंगल की ओर जाने तक निगरानी जारी रखने की बात कही गई है।
फिलहाल पोमिया गांव में वन विभाग की टीम तैनात है और हाथियों के झुंड की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि स्थिति नियंत्रण में है और ग्रामीणों को किसी भी आपात स्थिति में तुरंत वन विभाग को सूचना देने के निर्देश दिए गए हैं।
22 हाथियों के एक साथ गांव के पास पहुंचने की घटना ने एक बार फिर क्षेत्र में मानव-वन्यजीव संघर्ष की चुनौती को सामने ला दिया है। ग्रामीणों को उम्मीद है कि वन विभाग की सक्रियता से हाथियों का झुंड सुरक्षित रूप से जंगल की ओर लौट जाएगा और किसी भी तरह की अप्रिय घटना से बचाव हो सकेगा।