झारखंड HC का आदेश, शिक्षकों को मिलेगा अपग्रेड वेतन

Update: 2026-07-10 09:04 GMT

रांची। झारखंड हाईकोर्ट ने स्नातक प्रशिक्षित शिक्षक संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा-2016 से जुड़े शिक्षकों के पक्ष में बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि संबंधित शिक्षकों को समान वरीयता, अपग्रेड वेतनमान और अन्य सभी पात्र सेवा लाभ उपलब्ध कराए जाएं। जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को आदेश का पालन 12 सप्ताह के भीतर सुनिश्चित करने को कहा है।

यह मामला वर्ष 2016 में आयोजित स्नातक प्रशिक्षित शिक्षक संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा की नियुक्ति प्रक्रिया से जुड़ा हुआ है। इस परीक्षा के आधार पर कई अभ्यर्थियों की नियुक्ति वर्ष 2019 में की गई थी, जबकि कुछ अभ्यर्थियों की नियुक्ति बाद में हुई। बाद में नियुक्त हुए शिक्षकों का कहना था कि देरी उनकी किसी गलती के कारण नहीं हुई, बल्कि प्रशासनिक कारणों से नियुक्ति प्रक्रिया पूरी होने में समय लगा।

याचिकाकर्ताओं ने हाईकोर्ट में दलील दी थी कि सभी अभ्यर्थियों का चयन एक ही विज्ञापन और एक ही प्रतियोगिता परीक्षा के आधार पर हुआ है। ऐसे में केवल नियुक्ति तिथि अलग होने के कारण उनके साथ भेदभाव नहीं किया जा सकता। उन्होंने मांग की थी कि उन्हें भी वर्ष 2019 में नियुक्त शिक्षकों के समान वरीयता, वेतन लाभ और अन्य सेवा सुविधाएं दी जाएं।

सुनवाई के दौरान अदालत ने याचिकाकर्ताओं और राज्य सरकार, दोनों पक्षों की दलीलों को विस्तार से सुना। याचिकाकर्ताओं की ओर से कहा गया कि प्रशासनिक देरी का खामियाजा चयनित अभ्यर्थियों को नहीं भुगतना चाहिए। उन्होंने हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के कई पूर्व फैसलों का हवाला देते हुए समान सेवा लाभ देने की मांग की।

राज्य सरकार की ओर से भी अपना पक्ष रखा गया। दोनों पक्षों की दलीलों और उपलब्ध तथ्यों पर विचार करने के बाद अदालत ने माना कि एक ही चयन प्रक्रिया के तहत नियुक्त शिक्षकों के बीच सेवा लाभ को लेकर असमानता नहीं होनी चाहिए।

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि पात्र शिक्षकों को नियमानुसार समान वरीयता, अपग्रेड वेतन और अन्य सेवा लाभ दिए जाएं। अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि 12 सप्ताह के अंदर सभी आवश्यक कार्रवाई पूरी कर शिक्षकों को लाभ उपलब्ध कराया जाए।

इस फैसले से उन शिक्षकों को बड़ी राहत मिली है, जिनकी नियुक्ति समान चयन प्रक्रिया के तहत हुई थी, लेकिन नियुक्ति में हुई देरी के कारण वे सेवा लाभ से वंचित रह गए थे। अब आदेश के बाद उनके लिए वरिष्ठता, वेतनमान और अन्य अधिकारों का रास्ता साफ हो गया है।

शिक्षक संगठनों और कानूनी जानकारों ने हाईकोर्ट के इस फैसले को महत्वपूर्ण बताया है। उनका कहना है कि यह निर्णय समान अवसर और समान सेवा अधिकार के सिद्धांत को मजबूती देता है। अदालत के इस आदेश से यह संदेश गया है कि प्रशासनिक प्रक्रिया में हुई देरी का नुकसान कर्मचारियों या अभ्यर्थियों पर नहीं डाला जा सकता।

अब राज्य सरकार को तय समय सीमा के भीतर हाईकोर्ट के निर्देशों का पालन करना होगा। शिक्षकों को उम्मीद है कि इस फैसले के बाद उन्हें लंबे समय से लंबित सेवा लाभ मिल सकेंगे।

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