ISM में संविदा कर्मचारियों के नियमितीकरण का रास्ता साफ

Update: 2026-07-10 15:03 GMT

रांची। झारखंड हाई कोर्ट ने लंबे समय से संविदा और आउटसोर्सिंग व्यवस्था के तहत काम कर रहे कर्मचारियों के हित में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने आईआईटी (आईएसएम) धनबाद को निर्देश दिया है कि 20 वर्षों से अधिक समय से कार्यरत संविदा और आउटसोर्सिंग कर्मचारियों की सेवाओं को नियमित किया जाए। कोर्ट ने कहा कि आउटसोर्सिंग व्यवस्था की आड़ में कर्मचारियों को उनके वैधानिक अधिकारों से लंबे समय तक वंचित नहीं रखा जा सकता।

हाई कोर्ट के जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने यह फैसला कर्मचारियों की ओर से दायर मामले की सुनवाई के बाद सुनाया। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि यदि संस्थान में नियमित पद उपलब्ध नहीं हैं तो कर्मचारियों के समायोजन के लिए अधिसंख्य (सुपरन्यूमेरेरी) पदों का सृजन किया जाए, ताकि लंबे समय से सेवा दे रहे कर्मचारियों को राहत मिल सके।

अदालत ने स्पष्ट किया कि जिन कर्मचारियों ने वर्षों तक संस्थान की जरूरतों के अनुसार लगातार सेवाएं दी हैं, उनके योगदान को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने कहा कि केवल आउटसोर्सिंग व्यवस्था का हवाला देकर कर्मचारियों को स्थायी अधिकारों से दूर रखना उचित नहीं है।

फैसले में हाई कोर्ट ने कर्मचारियों की पूर्व सेवा अवधि को भी महत्वपूर्ण माना है। अदालत ने निर्देश दिया कि उनकी पहले की सेवा अवधि को सेवा निरंतरता के लिए जोड़ा जाए। इसके अलावा सेवानिवृत्ति से जुड़े लाभों की गणना में भी इस अवधि को शामिल किया जाएगा।

आईआईटी (आईएसएम) धनबाद में कई कर्मचारी लंबे समय से संविदा और आउटसोर्सिंग व्यवस्था के तहत काम कर रहे थे। इन कर्मचारियों का कहना था कि वे वर्षों से संस्थान की नियमित जरूरतों के अनुसार कार्य कर रहे हैं, लेकिन उन्हें स्थायी कर्मचारियों की तरह अधिकार और सुविधाएं नहीं मिल रही थीं।

कर्मचारियों की ओर से अदालत में यह तर्क रखा गया कि लंबे समय तक सेवा देने के बावजूद उन्हें अस्थायी व्यवस्था में रखना उनके अधिकारों के विपरीत है। मामले की सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने कर्मचारियों की स्थिति को देखते हुए नियमितीकरण का आदेश जारी किया।

हाई कोर्ट के इस फैसले को लंबे समय से कार्यरत संविदा कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है। अदालत के आदेश से ऐसे कर्मचारियों में उम्मीद जगी है, जो वर्षों से स्थायी नियुक्ति और नौकरी की सुरक्षा की मांग कर रहे थे।

विशेषज्ञों के अनुसार, यह फैसला संस्थानों में लंबे समय से कार्यरत संविदा कर्मचारियों के अधिकारों से जुड़ा महत्वपूर्ण निर्णय है। कोर्ट ने अपने आदेश में यह संदेश दिया है कि किसी भी कर्मचारी को वर्षों तक काम लेने के बाद केवल अस्थायी व्यवस्था के नाम पर उसके अधिकारों से वंचित नहीं किया जा सकता।

अब आईआईटी (आईएसएम) धनबाद को हाई कोर्ट के निर्देशों के अनुसार आगे की प्रक्रिया पूरी करनी होगी। संस्थान को कर्मचारियों की सेवा अवधि, उपलब्ध पदों और आवश्यक प्रशासनिक प्रक्रियाओं को ध्यान में रखते हुए नियमितीकरण की कार्रवाई करनी होगी।

झारखंड हाई कोर्ट के इस फैसले से न केवल आईआईटी धनबाद के कर्मचारियों को लाभ मिलेगा, बल्कि लंबे समय से संविदा और आउटसोर्सिंग पर काम कर रहे अन्य कर्मचारियों के लिए भी यह आदेश एक महत्वपूर्ण उदाहरण बन सकता है।

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