नई दिल्ली। देशभर के बिजली घरों में कोयले की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने और बिजली उत्पादन प्रभावित होने से रोकने के लिए केंद्र सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव पीके मिश्रा की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में बिजली संयंत्रों में कोयले की उपलब्धता और उसके परिवहन की स्थिति पर चर्चा की गई। बैठक में स्पष्ट निर्देश दिए गए कि किसी भी परिस्थिति में कोयले की कमी के कारण बिजली उत्पादन प्रभावित नहीं होना चाहिए। इसके लिए कोयले का पर्याप्त स्टॉक बनाए रखने, आपूर्ति बढ़ाने और रेलवे के माध्यम से ढुलाई तेज करने पर विशेष जोर दिया गया।
बैठक में कोयला मंत्रालय, बिजली मंत्रालय और रेलवे सहित संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया गया। केंद्र सरकार का उद्देश्य बिजली उत्पादन के लिए जरूरी ईंधन की उपलब्धता सुनिश्चित करना और मांग बढ़ने की स्थिति में किसी तरह की बाधा उत्पन्न होने से रोकना है। विशेष रूप से उन बिजली संयंत्रों पर ध्यान देने की जरूरत बताई गई, जहां कोयले का स्टॉक निर्धारित मानक से नीचे पहुंच गया है।
प्रधानमंत्री कार्यालय की उच्चस्तरीय बैठक में हुई समीक्षा
प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव पीके मिश्रा की अध्यक्षता में हुई बैठक में देश के ताप विद्युत संयंत्रों में कोयले की उपलब्धता को लेकर स्थिति की समीक्षा किए जाने की जानकारी सामने आई है।
बैठक में इस बात पर विशेष ध्यान दिया गया कि देश के किसी भी हिस्से में कोयले की कमी के कारण बिजली उत्पादन बाधित न हो।इसके लिए कोयले के उत्पादन, भंडारण और परिवहन से जुड़ी व्यवस्थाओं को मजबूत करने की आवश्यकता बताई गई।कोयला खदानों से बिजली घरों तक समय पर ईंधन पहुंचाना महत्वपूर्ण है। ऐसे में संबंधित मंत्रालयों और सरकारी कंपनियों के बीच समन्वय को प्राथमिकता दी जा रही है।
हालांकि, इस विशेष बैठक का विस्तृत आधिकारिक कार्यवृत्त स्वतंत्र रूप से उपलब्ध नहीं हो सका है। कोयला मंत्रालय की हालिया विज्ञप्तियां आपूर्ति सुधारने के प्रयासों की पुष्टि करती हैं।
बिजली घरों में 18 मिलियन टन से अधिक कोयला
केंद्रीय कोयला मंत्रालय की ओर से 12 अक्टूबर 2026 को जारी जानकारी के अनुसार, देश के घरेलू कोयला आधारित बिजली संयंत्रों में कोयले का भंडार 18 मिलियन टन से अधिक बना हुआ है।मंत्रालय ने बताया कि 29 सितंबर को बिजली घरों में 18.932 मिलियन टन कोयला उपलब्ध था, जबकि 10 अक्टूबर को यह आंकड़ा 18.205 मिलियन टन दर्ज किया गया।हालांकि, इस अवधि में कोयले के भंडार में कुछ कमी आई, लेकिन सितंबर की तुलना में अक्टूबर के दौरान स्टॉक घटने की रफ्तार काफी कम हुई है।सरकार का कहना है कि कोयले की आपूर्ति में सुधार होने से बिजली उत्पादन के लिए आवश्यक ईंधन की उपलब्धता को स्थिर बनाए रखने में मदद मिल रही है।
कोयले की दैनिक आपूर्ति में हुआ सुधार
कोयला मंत्रालय के अनुसार, अक्टूबर के शुरुआती दस दिनों में बिजली क्षेत्र को प्रतिदिन औसतन 24.9 लाख टन कोयले की आपूर्ति की गई।इसके मुकाबले सितंबर में औसत दैनिक आपूर्ति 22.1 लाख टन थी।इस तरह अक्टूबर में कोयले की आपूर्ति में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया है।
सरकार ने अक्टूबर के लिए प्रतिदिन 23.7 लाख टन कोयले की आपूर्ति का लक्ष्य निर्धारित किया था। मंत्रालय के अनुसार, शुरुआती दस दिनों में नौ दिन वास्तविक आपूर्ति निर्धारित योजना से अधिक रही।इससे बिजली घरों में ईंधन की उपलब्धता को लेकर दबाव कम करने में सहायता मिली है।
रेलवे को कोयले की ढुलाई तेज करने पर जोर
बिजली उत्पादन के लिए कोयले की उपलब्धता सुनिश्चित करने में भारतीय रेलवे की महत्वपूर्ण भूमिका है।देश की प्रमुख कोयला खदानों से बड़ी मात्रा में कोयला मालगाड़ियों के माध्यम से बिजली घरों तक पहुंचाया जाता है।कोयला मंत्रालय की जानकारी के अनुसार, सितंबर में बिजली क्षेत्र के लिए प्रतिदिन औसतन 426 रेलवे रैक लोड किए गए थे।
अक्टूबर के शुरुआती दस दिनों में यह संख्या बढ़कर औसतन 469 रैक प्रतिदिन हो गई।इस तरह रेलवे के माध्यम से कोयला ढुलाई में करीब दस प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।अक्टूबर में प्रतिदिन 447 से 482 रैक के बीच कोयले की लोडिंग हुई। इससे आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत करने में मदद मिली है।
कम स्टॉक वाले बिजली घरों पर विशेष नजर
सरकार उन बिजली संयंत्रों की स्थिति पर विशेष निगरानी रख रही है, जहां कोयले का स्टॉक निर्धारित मानकों से नीचे पहुंच गया है।कोयला मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि किसी संयंत्र को क्रिटिकल स्टॉक श्रेणी में रखे जाने का मतलब यह नहीं है कि वहां तत्काल कोयला समाप्त हो गया है।
यह एक प्रारंभिक चेतावनी व्यवस्था है, जिसके माध्यम से कम भंडार वाले बिजली घरों की पहचान की जाती है।सरकार आवश्यकता के अनुसार ऐसे संयंत्रों को अतिरिक्त कोयला उपलब्ध कराने और अन्य स्रोतों से आपूर्ति समायोजित करने पर काम कर रही है।इस व्यवस्था का उद्देश्य बिजली उत्पादन बाधित होने से पहले स्थिति को नियंत्रित करना है।
सितंबर में तेजी से घटा था कोयले का स्टॉक
सितंबर 2026 में बिजली घरों में उपलब्ध कोयले के भंडार में तेजी से गिरावट दर्ज की गई थी।कोयला मंत्रालय के अनुसार, सितंबर के दौरान स्टॉक में लगभग 72.8 लाख टन की कमी आई थी।उस समय प्रतिदिन औसतन 2.4 लाख टन कोयले का भंडार घट रहा था।इसके मुकाबले अक्टूबर के शुरुआती दस दिनों में कुल कमी लगभग 5.6 लाख टन दर्ज की गई।
इस अवधि में प्रतिदिन भंडार घटने की औसत रफ्तार लगभग 60 हजार टन रही।इस सुधार से संकेत मिलता है कि बढ़ती आपूर्ति के कारण बिजली संयंत्रों में कोयले के भंडार पर दबाव कम हुआ है।हालांकि, पर्याप्त स्टॉक दोबारा तैयार करना अभी भी महत्वपूर्ण चुनौती बनी हुई है।
कोल इंडिया और संबंधित कंपनियों की महत्वपूर्ण भूमिका
देश में ताप विद्युत संयंत्रों को कोयले की आपूर्ति सुनिश्चित करने में कोल इंडिया लिमिटेड और उसकी सहायक कंपनियों की बड़ी भूमिका है।इसके अलावा सिंगरेनी कोलियरीज कंपनी लिमिटेड भी कोयला उत्पादन और आपूर्ति व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
केंद्र सरकार इन कंपनियों के साथ समन्वय कर कोयला निकासी और परिवहन व्यवस्था को बेहतर बनाने पर काम कर रही है।खदानों से समय पर कोयला निकालना, रेलवे साइडिंग तक पहुंचाना और मालगाड़ियों में लोडिंग सुनिश्चित करना इस प्रक्रिया के महत्वपूर्ण चरण हैं।किसी भी स्तर पर देरी होने से बिजली संयंत्रों तक कोयला पहुंचने में परेशानी हो सकती है।
त्योहारों और सर्दियों से पहले आपूर्ति मजबूत करने की तैयारी
आने वाले महीनों में बिजली की मांग और मौसम की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार कोयले का पर्याप्त भंडार बनाए रखना चाहती है।त्योहारों, सर्दियों और उसके बाद गर्मी के मौसम में बिजली की मांग अलग-अलग परिस्थितियों के अनुसार बदल सकती है।
इसलिए सरकार का जोर केवल वर्तमान जरूरत पूरी करने तक सीमित नहीं है, बल्कि भविष्य के लिए भी पर्याप्त स्टॉक तैयार करने पर है।कोयला मंत्रालय ने संकेत दिया है कि रेलवे के माध्यम से प्रतिदिन 465 से 475 रैक की निरंतर ढुलाई से बिजली घरों का कोयला भंडार दोबारा बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
बिजली संकट से बचने के लिए विभागों में समन्वय जरूरी
देश की बिजली उत्पादन व्यवस्था में ताप विद्युत संयंत्रों की महत्वपूर्ण हिस्सेदारी है।इन संयंत्रों में कोयले की नियमित आपूर्ति बाधित होने से बिजली उत्पादन प्रभावित हो सकता है।इसका असर उद्योगों, व्यापारिक प्रतिष्ठानों और घरेलू बिजली उपभोक्ताओं पर भी पड़ सकता है।इसी वजह से कोयला मंत्रालय, बिजली मंत्रालय, भारतीय रेलवे और बिजली उत्पादन कंपनियों के बीच नियमित समन्वय को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।कोयले के उत्पादन से लेकर उसके अंतिम उपयोग तक पूरी आपूर्ति व्यवस्था की निगरानी जरूरी है।
केंद्र सरकार का लक्ष्य निर्बाध बिजली आपूर्ति
केंद्र सरकार का मुख्य उद्देश्य देश के सभी हिस्सों में बिजली उत्पादन के लिए आवश्यक कोयला उपलब्ध कराना और किसी संभावित संकट को समय रहते रोकना है।कोयले की आपूर्ति बढ़ाने, रेलवे रैक की उपलब्धता सुनिश्चित करने और कम स्टॉक वाले संयंत्रों को प्राथमिकता देने से स्थिति में सुधार होने की उम्मीद है।हालांकि, सरकार के सामने चुनौती यह है कि मौजूदा भंडार को स्थिर रखने के साथ आने वाले महीनों के लिए अतिरिक्त कोयला भी जमा किया जाए।
कोयला मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि वह रेलवे, कोल इंडिया और बिजली उत्पादन कंपनियों के साथ मिलकर आपूर्ति व्यवस्था की लगातार निगरानी कर रहा है, ताकि देश में बिजली उत्पादन के लिए कोयले की कमी बाधा न बने।