धनबाद। बरवाअड्डा थाना प्रभारी से कथित दुर्व्यवहार और पुलिस हिरासत से आरोपी को छुड़ाने के मामले में डुमरी विधायक जयराम कुमार महतो ने बुधवार को एमपी-एमएलए कोर्ट में आत्मसमर्पण किया। विधायक ने विशेष न्यायिक दंडाधिकारी अर्पिता नारायण की अदालत में उपस्थित होकर बंध-पत्र दाखिल किया। अदालत ने बंध-पत्र स्वीकार करते हुए उन्हें जमानत पर मुक्त करने का निर्देश दिया।

यह कार्रवाई जिला एवं सत्र न्यायाधीश-16 डीसी अवस्थी की अदालत से मिली अग्रिम जमानत के आदेश के अनुपालन में की गई। अग्रिम जमानत मिलने के बाद जयराम कुमार महतो अदालत पहुंचे और कानूनी प्रक्रिया पूरी करते हुए सरेंडर किया। इसके बाद उनकी ओर से निर्धारित शर्तों के अनुसार जमानत संबंधी दस्तावेज पेश किए गए।

अग्रिम जमानत आदेश के मुताबिक जयराम कुमार महतो समेत चार आरोपियों को 20-20 हजार रुपये का जमानत बांड भरने का निर्देश दिया गया था। इसके साथ ही प्रत्येक आरोपी को इतनी ही राशि के दो-दो जमानतदार भी प्रस्तुत करने थे। अदालत में आवश्यक प्रक्रिया पूरी होने और बंध-पत्र स्वीकार किए जाने के बाद विधायक को जमानत पर मुक्त करने का आदेश दिया गया।

मामला बरवाअड्डा थाना क्षेत्र से जुड़ा हुआ है। आरोप है कि थाना प्रभारी के साथ दुर्व्यवहार किया गया और पुलिस हिरासत में मौजूद एक आरोपी को छुड़ाने की कोशिश की गई। इस घटनाक्रम को लेकर संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया गया था। केस में डुमरी विधायक जयराम कुमार महतो का नाम भी आरोपी के रूप में सामने आया था। इसके बाद उन्होंने गिरफ्तारी से राहत पाने के लिए अदालत में अग्रिम जमानत की अर्जी दाखिल की थी।

मामले पर सुनवाई के बाद जिला एवं सत्र न्यायाधीश-16 डीसी अवस्थी की अदालत ने उन्हें अग्रिम जमानत प्रदान की थी। हालांकि इसके लिए कुछ शर्तें तय की गई थीं। इन्हीं शर्तों के तहत विधायक को निचली अदालत के समक्ष आत्मसमर्पण कर निर्धारित जमानत बांड और जमानतदार पेश करने थे। बुधवार को उन्होंने अदालत पहुंचकर इस प्रक्रिया को पूरा किया।

विधायक के आत्मसमर्पण को देखते हुए कोर्ट परिसर में उनके समर्थकों और मामले से जुड़े लोगों की भी नजर बनी रही। न्यायिक प्रक्रिया के तहत उनके अधिवक्ताओं की ओर से जरूरी कागजात अदालत के समक्ष प्रस्तुत किए गए। दस्तावेजों की जांच के बाद अदालत ने बंध-पत्र स्वीकार कर लिया।

इस मामले में जयराम कुमार महतो समेत कुल चार आरोपियों को अग्रिम जमानत का लाभ मिला है। सभी आरोपियों के लिए अदालत ने समान शर्त निर्धारित करते हुए 20 हजार रुपये का जमानत बांड और समान राशि के दो जमानतदार प्रस्तुत करने का आदेश दिया था। जयराम महतो ने इन्हीं निर्देशों का पालन करते हुए अदालत में आत्मसमर्पण किया।

मामले की शुरुआत बरवाअड्डा थाना प्रभारी से कथित दुर्व्यवहार की घटना के बाद हुई थी। पुलिस की ओर से लगाए गए आरोपों में हिरासत में मौजूद आरोपी को छुड़ाने का मामला भी शामिल है। घटना के बाद कानूनी कार्रवाई शुरू हुई और मामला अदालत तक पहुंचा। विधायक की ओर से गिरफ्तारी की आशंका को देखते हुए अग्रिम जमानत के लिए आवेदन दिया गया था।

अग्रिम जमानत मिलने का अर्थ यह है कि संबंधित व्यक्ति को अदालत द्वारा तय शर्तों के तहत गिरफ्तारी की स्थिति में जमानत का संरक्षण मिलता है। इसी आदेश के अनुपालन में आरोपी को संबंधित अदालत के सामने उपस्थित होकर आवश्यक बंध-पत्र दाखिल करना होता है। जयराम महतो ने बुधवार को इसी कानूनी प्रक्रिया को पूरा किया।

अदालत से जमानत मिलने के बाद फिलहाल विधायक को इस मामले में राहत मिली है, हालांकि मुकदमे की न्यायिक प्रक्रिया आगे जारी रहेगी। मामले में आरोपों और उपलब्ध साक्ष्यों पर आगे अदालत में सुनवाई होगी। अभियोजन और बचाव पक्ष अपनी-अपनी दलीलें तथा साक्ष्य अदालत के समक्ष रखेंगे, जिसके आधार पर आगे की कानूनी प्रक्रिया तय होगी।

बरवाअड्डा थाना प्रभारी से कथित दुर्व्यवहार और पुलिस हिरासत से आरोपी को छुड़ाने से जुड़ा मामला विधायक का नाम सामने आने के कारण चर्चा में रहा है। बुधवार को जयराम कुमार महतो के आत्मसमर्पण और जमानत की औपचारिकता पूरी होने के बाद मामले में एक महत्वपूर्ण न्यायिक प्रक्रिया पूरी हो गई है। अब इस केस में आगे होने वाली सुनवाई पर नजर रहेगी।

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