Jharkhand में नक्सलवाद कमजोर, 15 साल में नक्सलियों से हजारों हथियार बरामद
रांची: झारखंड में नक्सलवाद अब अपने अंतिम दौर में पहुंच चुका है। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार राज्य में सक्रिय नक्सली संगठनों की ताकत काफी कमजोर हो गई है और बचे हुए नक्सलियों के पास पुलिस और केंद्रीय बलों का मुकाबला करने की क्षमता पहले जैसी नहीं रह गई है। नक्सलवाद के कमजोर होने की सबसे बड़ी वजहों में से एक उनके हथियारों की लगातार जब्ती को माना जा रहा है।
झारखंड पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बलों ने पिछले कई वर्षों में नक्सलियों के खिलाफ चलाए गए अभियानों में बड़ी संख्या में हथियार, गोला-बारूद और विस्फोटक बरामद किए हैं। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, नक्सलियों की सबसे बड़ी ताकत उनके हथियार थे, जिन्हें सुरक्षा बलों ने लगातार निशाना बनाकर कमजोर कर दिया।
नक्सलियों से 1000 से ज्यादा पुलिस हथियार बरामद
एक समय झारखंड में नक्सली हमलों के दौरान पुलिसकर्मियों से हथियार लूटना उनकी रणनीति का अहम हिस्सा हुआ करता था। लूटे गए इन्हीं हथियारों के जरिए नक्सली सुरक्षा बलों पर हमले करते थे। लेकिन अब स्थिति बदल चुकी है।
सुरक्षा बलों ने नक्सलियों के कब्जे से बड़ी संख्या में पुलिस के हथियार वापस बरामद किए हैं। पिछले 15 वर्षों में झारखंड पुलिस ने नक्सलियों से अपने लूटे गए हजारों हथियार बरामद किए हैं। इसके अलावा नक्सली संगठनों के अन्य हथियारों को भी जब्त किया गया है।
2021 से जुलाई 2026 तक 972 हथियार जब्त
आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, साल 2021 से 30 जुलाई 2026 तक झारखंड में चलाए गए नक्सल विरोधी अभियानों में कुल 972 हथियार बरामद किए गए हैं।
इनमें:
299 पुलिस हथियार शामिल हैं।
87 रेगुलर हथियार बरामद हुए।
588 देसी हथियार जब्त किए गए।
आंकड़ों के अनुसार, कुल बरामद हथियारों में करीब 30 प्रतिशत हथियार पुलिस बलों के थे, जबकि लगभग 70 प्रतिशत हथियार अन्य श्रेणी के थे।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि नक्सलियों के पास मिले 299 पुलिस हथियार इस बात का संकेत हैं कि उन्होंने पहले सुरक्षा बलों पर हमलों और लूट की घटनाओं के जरिए सरकारी हथियार हासिल किए थे। लगातार अभियानों के चलते अब ये हथियार वापस सुरक्षा बलों के पास पहुंच रहे हैं।
हथियारों के साथ भारी मात्रा में विस्फोटक बरामद
सुरक्षा बलों ने सिर्फ हथियार ही नहीं बल्कि बड़ी मात्रा में गोला-बारूद और विस्फोटक भी बरामद किए हैं।
2021 से 2026 के बीच बरामदगी में शामिल हैं:
61,847 कारतूस
2,163 आईईडी (IED)
करीब 1,903 किलोग्राम विस्फोटक सामग्री
लगभग 2.01 करोड़ रुपये की लेवी राशि
इन बरामदगी से नक्सली संगठनों की आर्थिक और सैन्य क्षमता को बड़ा झटका लगा है।
2014 से 2020 के बीच भी हुई बड़ी कार्रवाई
झारखंड पुलिस के आंकड़ों के अनुसार, साल 2014 से दिसंबर 2020 तक भी सुरक्षा बलों ने नक्सलियों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की थी।
इस दौरान:
277 पुलिस हथियार
77 रेगुलर हथियार
1,778 देसी हथियार
बरामद किए गए थे। यानी इस अवधि में कुल 1,855 हथियार नक्सलियों से जब्त हुए।
इसके अलावा:
68,846 राउंड गोलियां
3,661 आईईडी
21,867 किलोग्राम से अधिक विस्फोटक सामग्री
74,807 डेटोनेटर
करीब 6.40 करोड़ रुपये की लेवी राशि
भी बरामद की गई थी।
हथियारों की जब्ती बनी नक्सलियों की कमजोरी की बड़ी वजह
झारखंड पुलिस के आईजी अभियान नरेंद्र सिंह ने कहा कि राज्य में नक्सलवाद लगभग समाप्ति की ओर है। उन्होंने बताया कि नक्सलियों को कमजोर करने में उनके हथियारों की जब्ती ने सबसे अहम भूमिका निभाई है।
उन्होंने कहा कि नक्सली पहले पुलिस और केंद्रीय बलों से हथियार लूटकर अपनी ताकत बढ़ाते थे, लेकिन अब सुरक्षा बलों ने बड़ी संख्या में वही हथियार वापस हासिल कर लिए हैं। ये हथियार नक्सलियों के आत्मसमर्पण, मुठभेड़ और गिरफ्तारी के बाद बरामद किए गए हैं।
लगातार अभियान, आत्मसमर्पण नीति और हथियारों की कमी के कारण झारखंड में नक्सली गतिविधियों में भारी गिरावट आई है।