रिश्तों में शक ने ली दो मासूमों की जान, मां ने अपने बेटे और भतीजे को कुएं में फेंका
दुमका। झारखंड के दुमका जिले से एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है। पारिवारिक विवाद, पति के कथित अवैध संबंधों का शक और ससुराल में विधवा जेठानी को अधिक महत्व दिए जाने से नाराज एक महिला पर अपने ही आठ वर्षीय बेटे और 11 वर्षीय भतीजे की हत्या करने का गंभीर आरोप लगा है। पुलिस के अनुसार, 28 वर्षीय राखी कुमारी ने दोनों बच्चों को कुएं में धक्का देकर उनकी जान ले ली। इसके बाद खुद को भी आत्महत्या का शिकार दिखाने की कोशिश की, ताकि पुलिस और परिवार के लोग घटना की वास्तविकता का पता न लगा सकें। शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2026 को पुलिस ने पूरे मामले का खुलासा करते हुए आरोपी महिला को न्यायिक हिरासत में भेज दिया।
दुमका के पुलिस अधीक्षक पीतांबर सिंह खेरवार ने शुक्रवार शाम पत्रकार वार्ता में बताया कि महिला ने पूछताछ के दौरान दोनों बच्चों की हत्या करने की बात स्वीकार की है। पुलिस का दावा है कि आरोपी पिछले छह महीने से इस वारदात की योजना बना रही थी। हालांकि, अपराध की परिस्थितियों और आरोपी की भूमिका पर अंतिम फैसला न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगा।
दुर्गापूजा का मेला देखने आया था परिवार
पुलिस के मुताबिक, राखी कुमारी अपने पति विक्रांत कुमार, बेटे आरव, भतीजे आयुष और दो भतीजियों के साथ 19 अक्टूबर को दुमका पहुंची थी। परिवार मूल रूप से पाकुड़ जिले के महेशपुर प्रखंड अंतर्गत बलियाडंगाल गांव का रहने वाला है।
दुर्गापूजा के अवसर पर आयोजित मेला देखने के लिए पूरा परिवार कार से दुमका आया था। परिवार ने शहर के कई स्थानों पर घूमने के बाद मेला देखने की योजना बनाई थी।
इसी दौरान नगर थाना के सामने से राखी अपने बेटे और भतीजे के साथ अचानक लापता हो गई। काफी तलाश करने के बाद भी जब तीनों का पता नहीं चला, तो पति ने पुलिस से संपर्क किया।
महिला और दोनों बच्चों के अचानक गायब होने की सूचना से परिवार में चिंता बढ़ गई। पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू की।
सीसीटीवी फुटेज से मिला अहम सुराग
राखी और दोनों बच्चों के लापता होने के बाद पुलिस ने विशेष जांच दल का गठन किया। जांच टीम ने शहर के विभिन्न स्थानों पर लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालनी शुरू की।
इस दौरान पुलिस को महत्वपूर्ण सुराग मिला। सीसीटीवी फुटेज में महिला दोनों बच्चों के साथ टोटो यानी ई-रिक्शा से दुधानी की ओर जाती दिखाई दी।
इसके बाद पुलिस ने महिला की आगे की गतिविधियों का पता लगाना शुरू किया। जांच में सामने आया कि वह दुधानी से किराए पर एक कार लेकर गोड्डा जिले के पोड़ैयाहाट थाना क्षेत्र स्थित अपने मायके सलगाटांड़ गांव की ओर गई थी।
पुलिस के अनुसार, महिला गांव पहुंचने से पहले ही कार से उतर गई थी। इसके बाद वह दोनों बच्चों को लेकर पैदल एक कुएं के पास पहुंची।
बेटे और भतीजे को कुएं में धक्का देने का आरोप
पुलिस जांच के अनुसार, राखी दोनों बच्चों को अपने मायके के पास स्थित एक कुएं तक लेकर गई थी। आरोप है कि उसने सुनसान स्थान पर दोनों बच्चों को कुएं में धक्का दे दिया।
इस घटना में आठ वर्षीय आरव कुमार और 11 वर्षीय आयुष कुमार की मौत हो गई। दोनों मासूमों को यह अंदाजा भी नहीं रहा होगा कि परिवार के साथ घूमने का उनका सफर इस तरह समाप्त हो जाएगा।
पुलिस ने बताया कि आरोपी महिला से पूछताछ के दौरान मिली जानकारी के आधार पर गुरुवार को कुएं से दोनों बच्चों के शव बरामद किए गए।
शव मिलने के बाद मामले की जांच हत्या के आरोपों पर केंद्रित हो गई। पुलिस ने घटनास्थल और महिला की गतिविधियों से संबंधित साक्ष्यों का विश्लेषण किया।
पति पर शक और जेठानी से नाराजगी बनी कथित वजह
दुमका के पुलिस अधीक्षक पीतांबर सिंह खेरवार के अनुसार, पूछताछ में पारिवारिक विवाद की बात सामने आई है।
पुलिस का कहना है कि राखी को संदेह था कि उसके पति विक्रांत कुमार के किसी दूसरी महिला से अवैध संबंध हैं। इसके अलावा वह इस बात से भी नाराज थी कि ससुराल में उसकी विधवा जेठानी को उससे अधिक महत्व दिया जाता है।
इन परिस्थितियों को लेकर महिला के मन में लंबे समय से नाराजगी होने का दावा किया गया है।
पुलिस के अनुसार, इसी नाराजगी में महिला ने अपने बेटे और जेठानी के इकलौते बेटे की हत्या करने की योजना बनाई थी। जांच अधिकारियों का दावा है कि आरोपी का उद्देश्य परिवार के वंश को समाप्त करके बदला लेना था।
हालांकि, पति के कथित अवैध संबंधों का कोई स्वतंत्र प्रमाण सामने नहीं आया है। यह महिला के संदेह और पुलिस द्वारा बताए गए कथित मकसद से जुड़ी जानकारी है।
छह महीने से रची जा रही थी साजिश
पुलिस जांच में एक और गंभीर बात सामने आने का दावा किया गया है। अधिकारियों के अनुसार, राखी लगभग छह महीने से दोनों बच्चों की हत्या करने की योजना बना रही थी।
पुलिस का कहना है कि आरोपी ने वारदात के लिए अपने मायके के आसपास का स्थान चुना और बच्चों को वहां ले जाने की योजना बनाई।
इस दावे के अनुसार, यह घटना अचानक हुए विवाद का नतीजा नहीं थी, बल्कि पहले से तैयार की गई योजना का हिस्सा थी।
जांच एजेंसियों के लिए यह तथ्य महत्वपूर्ण है, क्योंकि किसी भी हत्या के मामले में पूर्व नियोजन और आरोपी की मंशा से संबंधित साक्ष्यों की अदालत में महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
हत्या के बाद आत्महत्या का नाटक करने का आरोप
पुलिस अधीक्षक ने बताया कि महिला ने दोनों बच्चों की मौत के बाद घटना को अलग रूप देने की कोशिश की।
आरोप है कि उसने अपनी साड़ी की सहायता से पेड़ पर फांसी लगाने का नाटक किया, ताकि लोगों को लगे कि उसके साथ कोई गंभीर अपराध हुआ है।
पुलिस के अनुसार, महिला यह भ्रम पैदा करना चाहती थी कि किसी अज्ञात व्यक्ति ने उसके साथ अपराध करने के बाद बच्चों की हत्या कर दी।
हालांकि, जांच के दौरान पुलिस को उसके बयान और घटनाक्रम में विरोधाभास नजर आया। इसके बाद पूछताछ में महिला ने कथित रूप से हत्या की बात स्वीकार कर ली।
अंधविश्वास से भी जोड़ने की कोशिश
पुलिस के मुताबिक, आरोपी महिला ने घटना को अंधविश्वास से जोड़कर प्रस्तुत करने का भी प्रयास किया।
जांच अधिकारियों का कहना है कि उसने खुद को तांत्रिक बताया और दावा किया कि उसके पास मृत व्यक्ति को दोबारा जीवित करने की शक्ति है।
पुलिस ने यह भी बताया कि महिला के एक रिश्तेदार का संबंध पारंपरिक ओझा गतिविधियों से है। हालांकि, पुलिस के अनुसार, इस हत्याकांड में किसी दूसरे व्यक्ति की संलिप्तता सामने नहीं आई है।
जांच में उपलब्ध जानकारी के आधार पर पुलिस ने महिला को ही इस घटना का आरोपी बनाया है।
गिरफ्तारी के बाद न्यायिक हिरासत में भेजा
दुमका पुलिस ने दोनों बच्चों की हत्या के आरोप में राखी कुमारी को गिरफ्तार कर लिया है। पूछताछ और आवश्यक कानूनी प्रक्रियाएं पूरी करने के बाद उसे न्यायिक हिरासत में भेजा गया।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, मामले में आरोपी महिला की भूमिका सामने आई है और उसी आधार पर आगे की कार्रवाई की जा रही है।
दो मासूम बच्चों की मौत से दोनों परिवारों में शोक का माहौल है। जिस परिवार में दुर्गापूजा के अवसर पर घूमने की खुशियां थीं, वहां अब मातम पसरा हुआ है।
इस घटना ने पारिवारिक विवादों और आपसी अविश्वास के गंभीर परिणामों को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं।
फिलहाल पुलिस की जांच और न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से मामले के सभी तथ्यों का परीक्षण किया जाएगा। आरोपी के कथित स्वीकारोक्ति बयान के साथ अन्य साक्ष्यों की कानूनी जांच के बाद ही उसकी आपराधिक जिम्मेदारी तय होगी।