बेंगलुरु। कर्नाटक में केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण (CARA) के माध्यम से बच्चों को गोद लेने के मामलों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वर्ष 2025-26 में राज्य में कुल 377 बच्चों को गोद लिया गया, जबकि 2024-25 में यह संख्या 306 थी। इस तरह एक साल में गोद लेने के मामलों में 71 की बढ़ोतरी हुई, जो करीब 23 प्रतिशत है।
गोद लेने के मामलों में यह वृद्धि ऐसे समय में सामने आई है, जब सरकार दत्तक ग्रहण की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, सरल और समयबद्ध बनाने पर जोर दे रही है। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने लोकसभा में पूछे गए एक लिखित सवाल के जवाब में कर्नाटक समेत दत्तक ग्रहण से संबंधित आंकड़े और प्रक्रिया को बेहतर बनाने के लिए उठाए जा रहे कदमों की जानकारी दी।
एक साल में 71 मामलों की बढ़ोतरी
उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, कर्नाटक में 2024-25 के दौरान 306 बच्चों को गोद लिया गया था। 2025-26 में यह संख्या बढ़कर 377 हो गई। यानी पिछले वित्त वर्ष की तुलना में 71 अधिक बच्चों को परिवार मिला।
प्रतिशत के लिहाज से देखें तो यह वृद्धि लगभग 23 प्रतिशत है। गोद लेने के मामलों में यह बढ़ोतरी राज्य में दत्तक ग्रहण व्यवस्था के प्रति बढ़ती जागरूकता और ऑनलाइन प्रक्रिया के विस्तार की ओर भी संकेत करती है।
हालांकि, विशेषज्ञों और संबंधित संस्थाओं के लिए चुनौती यह सुनिश्चित करना है कि गोद लेने की प्रक्रिया में बच्चों के हित सर्वोच्च प्राथमिकता बने रहें और प्रत्येक मामले में सभी कानूनी एवं सुरक्षा संबंधी मानकों का पालन हो।
लोकसभा में पूछे गए सवाल के जवाब में सामने आए आंकड़े
महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की ओर से यह जानकारी लोकसभा में कई सदस्यों द्वारा पूछे गए एक लिखित सवाल के जवाब में दी गई। सांसदों ने सरकार से यह जानना चाहा था कि देश में गोद लेने की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, आसान और निर्धारित समय-सीमा के भीतर पूरा करने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं।
सवालों के जवाब में महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री सावित्री ठाकुर ने बताया कि केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण ने मिशन वात्सल्य पोर्टल पर उपलब्ध अडॉप्शन मॉड्यूल के माध्यम से गोद लेने की प्रक्रिया के विभिन्न चरणों को डिजिटल कर दिया है।
इस डिजिटल व्यवस्था का उद्देश्य प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित बनाना और अलग-अलग स्तरों पर होने वाले काम को एक ही ऑनलाइन प्रणाली के माध्यम से आगे बढ़ाना है।
पूरी प्रक्रिया को डिजिटल बनाने पर जोर
सरकार के अनुसार, मिशन वात्सल्य पोर्टल पर अडॉप्शन मॉड्यूल के जरिए बच्चे के रेफरल से लेकर संभावित माता-पिता के साथ मैचिंग और दस्तावेजों की जांच तक कई प्रक्रियाएं ऑनलाइन की जा रही हैं।
दत्तक ग्रहण की प्रक्रिया में दस्तावेजों की जांच और पात्रता का सत्यापन महत्वपूर्ण चरण होते हैं। डिजिटल प्रणाली के जरिए इन प्रक्रियाओं की निगरानी करना आसान हो सकता है। इससे अलग-अलग एजेंसियों के बीच सूचनाओं के आदान-प्रदान को भी बेहतर बनाने में मदद मिलती है।
ऑनलाइन व्यवस्था का एक प्रमुख उद्देश्य यह भी है कि आवेदकों को प्रक्रिया के अलग-अलग चरणों के बारे में जानकारी मिलती रहे और मामलों के निपटारे में अनावश्यक देरी को कम किया जा सके।
राज्यों और एजेंसियों के साथ नियमित निगरानी
मंत्रालय के मुताबिक, गोद लेने के मामलों के तेजी से निपटारे के लिए राज्य सरकारों और अन्य संबंधित एजेंसियों के साथ नियमित निगरानी और फॉलो-अप की व्यवस्था की गई है।
दत्तक ग्रहण की प्रक्रिया में कई विभाग और संस्थाएं शामिल होती हैं। ऐसे में किसी एक स्तर पर देरी होने से पूरे मामले के निपटारे में समय लग सकता है। नियमित निगरानी के जरिए ऐसे मामलों की पहचान कर उन्हें आगे बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है।
सरकार का जोर यह सुनिश्चित करने पर है कि पात्र बच्चों को निर्धारित प्रक्रिया के तहत जल्द से जल्द उपयुक्त परिवार मिल सके और पूरी प्रक्रिया कानूनी मानकों के अनुरूप हो।
बच्चों के हित को प्राथमिकता
दत्तक ग्रहण की प्रक्रिया केवल कानूनी औपचारिकता नहीं है, बल्कि इसमें बच्चे की सुरक्षा, कल्याण और भविष्य सबसे महत्वपूर्ण पहलू होते हैं। इसलिए किसी बच्चे को गोद देने से पहले संबंधित दस्तावेजों और पात्रता की जांच जरूरी होती है।
सरकार की डिजिटल व्यवस्था में भी इन पहलुओं को ध्यान में रखा गया है। बच्चे का रेफरल, संभावित माता-पिता के साथ मैचिंग और दस्तावेजों की जांच जैसे चरण प्रक्रिया का अहम हिस्सा हैं।
दत्तक ग्रहण की व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ने से संभावित अभिभावकों को भी प्रक्रिया के बारे में स्पष्ट जानकारी मिल सकती है। साथ ही, संबंधित अधिकारियों के लिए मामलों की निगरानी करना आसान हो सकता है।
जागरूकता बढ़ने से बढ़ सकते हैं मामले
कर्नाटक में 2025-26 के दौरान गोद लेने के मामलों में हुई 23 प्रतिशत वृद्धि के पीछे कई कारण हो सकते हैं। डिजिटल प्रक्रिया के विस्तार के साथ-साथ लोगों में कानूनी दत्तक ग्रहण प्रक्रिया को लेकर जागरूकता बढ़ना भी एक महत्वपूर्ण कारक हो सकता है।
ऑनलाइन प्रणाली के जरिए इच्छुक अभिभावकों के लिए आवेदन और प्रक्रिया की जानकारी हासिल करना पहले की तुलना में अधिक सुविधाजनक हो सकता है। हालांकि, गोद लेने के मामलों में केवल संख्या बढ़ाना ही लक्ष्य नहीं है। महत्वपूर्ण यह है कि प्रत्येक बच्चे को सुरक्षित, स्थिर और उपयुक्त पारिवारिक वातावरण मिले।
प्रक्रिया को समयबद्ध बनाने की कोशिश
लोकसभा में पूछे गए सवाल का एक प्रमुख हिस्सा दत्तक ग्रहण की प्रक्रिया को तय समय-सीमा में पूरा करने से जुड़ा था। सरकार ने बताया कि मामलों के तेजी से निपटारे के लिए संबंधित राज्यों और एजेंसियों के साथ निगरानी और फॉलो-अप किया जा रहा है।
डिजिटल सिस्टम के जरिए लंबित मामलों की स्थिति पर नजर रखना और संबंधित अधिकारियों से समय पर कार्रवाई सुनिश्चित करना आसान हो सकता है। इससे प्रक्रिया में होने वाली देरी को कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
कर्नाटक के आंकड़े महत्वपूर्ण संकेत
कर्नाटक में 306 से बढ़कर 377 दत्तक ग्रहण मामलों तक पहुंचना राज्य की व्यवस्था में सकारात्मक बदलाव का संकेत माना जा सकता है। एक साल में 71 अतिरिक्त बच्चों को परिवार मिलना इस दिशा में महत्वपूर्ण वृद्धि है।
हालांकि, आने वाले वर्षों में यह देखना अहम होगा कि दत्तक ग्रहण की प्रक्रिया को और कितना सरल बनाया जाता है और लंबित मामलों को कम करने के लिए क्या अतिरिक्त कदम उठाए जाते हैं।
सरकार की ओर से मिशन वात्सल्य पोर्टल के माध्यम से प्रक्रिया के डिजिटलीकरण, नियमित निगरानी और संबंधित एजेंसियों के साथ समन्वय पर जोर दिया जा रहा है। यदि इन प्रयासों को प्रभावी ढंग से लागू किया जाता है, तो इससे दत्तक ग्रहण प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाने के साथ-साथ जरूरतमंद बच्चों को समय पर परिवार उपलब्ध कराने में भी मदद मिल सकती है।
कुल मिलाकर, कर्नाटक में गोद लेने के मामलों में 23 प्रतिशत की वृद्धि एक महत्वपूर्ण आंकड़ा है। यह वृद्धि बताती है कि दत्तक ग्रहण व्यवस्था में तकनीक और बेहतर निगरानी की भूमिका लगातार बढ़ रही है। अब चुनौती इस वृद्धि को बच्चों के सर्वोत्तम हित, पारदर्शिता और सुरक्षित दत्तक ग्रहण प्रक्रिया के साथ आगे बढ़ाने की है।