हुब्बल्ली : कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा सांसद बसवराज बोम्मई ने भारत के खिलाफ कथित साजिशों और गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ) को मिलने वाली विदेशी फंडिंग को लेकर चिंता जताई है। शनिवार, 17 अक्टूबर 2026 को हुबली में मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने केंद्र सरकार से ऐसे मामलों को गंभीरता से लेने और देश के हितों के खिलाफ इस्तेमाल होने वाले कथित विदेशी धन पर सख्त कार्रवाई करने की मांग की। बोम्मई ने आरोप लगाया कि कुछ राजनीतिक दलों और संगठनों को विदेशी स्रोतों से पैसा मिल रहा है, जिसका इस्तेमाल भारत विरोधी गतिविधियों के लिए किया जा रहा है। हालांकि, उनके इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि के लिए ठोस साक्ष्यों और वित्तीय रिकॉर्ड की आवश्यकता है।
विदेशी फंडिंग को लेकर क्या बोले बसवराज बोम्मई?
बसवराज बोम्मई ने कहा कि विदेशी स्रोतों से आने वाले धन और उसके संभावित इस्तेमाल पर केंद्र सरकार को विशेष ध्यान देना चाहिए। उनके मुताबिक, कुछ गैर-सरकारी संगठनों और राजनीतिक समूहों को मिलने वाली आर्थिक सहायता की जांच की जानी चाहिए, ताकि यह पता चल सके कि धन का इस्तेमाल किन उद्देश्यों के लिए किया जा रहा है।उन्होंने दावा किया कि कुछ राजनीतिक दलों और भारत विरोधी गतिविधियों में शामिल संगठनों को विदेशों से आर्थिक मदद मिल रही है। बोम्मई ने इसे देश की सुरक्षा और राष्ट्रीय हितों से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय बताया। उन्होंने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि ऐसे मामलों में आवश्यक कदम उठाए जाएं और यदि किसी संगठन या व्यक्ति द्वारा नियमों का उल्लंघन किया जाता है, तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।
नेपाल, श्रीलंका और बांग्लादेश का किया जिक्र
मीडिया से बातचीत के दौरान बोम्मई ने भारत के पड़ोसी देशों नेपाल, श्रीलंका और बांग्लादेश का उल्लेख किया। उन्होंने दावा किया कि इन देशों में विदेशी स्रोतों से धन पहुंचने के मामले सामने आए हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पिछले लगभग 10 वर्षों से सोरोस फाउंडेशन जैसे संगठनों के माध्यम से विदेशी फंडिंग होती रही है।बोम्मई ने कहा कि इन घटनाक्रमों को ध्यान में रखते हुए भारत सरकार को भी विदेशी धन के स्रोत और उसके इस्तेमाल पर गंभीरता से निगरानी रखनी चाहिए। उनका कहना था कि यदि किसी विदेशी सहायता का इस्तेमाल देश की स्थिरता को प्रभावित करने या भारत के खिलाफ गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए किया जाता है, तो ऐसी गतिविधियों को रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाने चाहिए।हालांकि, नेपाल, श्रीलंका और बांग्लादेश में विदेशी अनुदान आने की बात और उस धन का भारत विरोधी गतिविधियों में इस्तेमाल होने का दावा अलग-अलग विषय हैं। बोम्मई ने अपने बयान में इन आरोपों के समर्थन में किसी विशेष वित्तीय लेनदेन या दस्तावेज का विस्तृत विवरण नहीं दिया। इसलिए उनके दावों को फिलहाल उनके आरोपों के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
एनजीओ की विदेशी फंडिंग पर सख्त नियमों की मांग
बोम्मई ने केंद्र सरकार से विदेशी योगदान प्राप्त करने वाले एनजीओ पर लागू नियंत्रणों की तरह कथित भारत विरोधी गतिविधियों के लिए इस्तेमाल होने वाले धन के खिलाफ भी सख्त कदम उठाने की मांग की। उन्होंने कहा कि विदेशी फंडिंग के मामलों में पारदर्शिता सुनिश्चित करना जरूरी है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि किसी संगठन को पैसा कहां से मिल रहा है और उसका इस्तेमाल किस काम में किया जा रहा है।विदेशी योगदान से जुड़े मामलों में वित्तीय रिकॉर्ड, धन के स्रोत और उसके उपयोग की जांच महत्वपूर्ण होती है। यदि किसी संगठन पर नियमों के उल्लंघन का संदेह हो, तो संबंधित एजेंसियां उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर जांच कर सकती हैं। हालांकि, केवल विदेशी फंडिंग प्राप्त करना अपने आप में किसी संगठन की अवैध गतिविधि का प्रमाण नहीं है। किसी कार्रवाई के लिए लागू कानूनों और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर निष्कर्ष निकालना आवश्यक है।
राजनीतिक दलों और संगठनों पर लगाए आरोप
बोम्मई ने आरोप लगाया कि कुछ राजनीतिक दल और संगठन विदेशी स्रोतों से मिलने वाली आर्थिक सहायता का इस्तेमाल देश के हितों के खिलाफ गतिविधियों में कर सकते हैं। उन्होंने इस विषय पर केंद्र सरकार से सतर्क रहने और कथित गतिविधियों को पूरी तरह रोकने की अपील की।उनके बयान का मुख्य जोर विदेशी धन के इस्तेमाल की जांच, वित्तीय पारदर्शिता और राष्ट्रीय हितों की सुरक्षा पर रहा। यह बयान विदेशी फंडिंग को लेकर चल रही राजनीतिक बहस के बीच सामने आया है। इस मुद्दे पर किसी भी निष्कर्ष तक पहुंचने के लिए आरोपों, संबंधित संगठनों के पक्ष और आधिकारिक जांच से सामने आने वाले तथ्यों को अलग-अलग देखना जरूरी होगा।फिलहाल, बसवराज बोम्मई ने केंद्र सरकार से विदेशी फंडिंग के कथित दुरुपयोग पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। उनके आरोपों के संबंध में किसी आधिकारिक जांच के निष्कर्ष या स्वतंत्र रूप से सत्यापित वित्तीय प्रमाण की जानकारी उपलब्ध नहीं है। ऐसे में आगे की स्थिति इस बात पर निर्भर करेगी कि संबंधित एजेंसियां इन दावों की जांच करती हैं या नहीं और जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं।