बेंगलुरु। कर्नाटक में गन्ना किसानों की समस्याओं को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। विधानसभा में विपक्ष के नेता आर. अशोक ने शनिवार को कांग्रेस के नेतृत्व वाली राज्य सरकार पर किसानों के हितों की अनदेखी करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार गन्ना किसानों की समस्याओं के समाधान के लिए सक्रिय रूप से काम कर रही है, जबकि राज्य सरकार अपनी जिम्मेदारी निभाने में पीछे नजर आ रही है।बेंगलुरु में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में आर. अशोक ने गन्ने के उचित मूल्य और किसानों की आर्थिक स्थिति से जुड़े मुद्दे उठाए। उन्होंने दावा किया कि केंद्र सरकार ने गन्ने के उचित एवं लाभकारी मूल्य (FRP) और न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से संबंधित विषयों पर निर्णय लिए हैं। उनके मुताबिक, केंद्र सरकार किसानों की मांगों पर कार्रवाई कर रही है, लेकिन राज्य सरकार की ओर से अपेक्षित पहल नहीं की जा रही है।
केंद्र सरकार ने गन्ना किसानों की मांगों पर बनाई समिति
आर. अशोक ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने गन्ना किसानों के मुद्दे पर पहल की है। उनके अनुसार, किसानों की समस्याओं पर विचार करने और उनकी मांगों के समाधान का रास्ता तलाशने के लिए केंद्र स्तर पर कदम उठाए गए हैं। हालिया रिपोर्टों के मुताबिक, केंद्र सरकार ने किसानों की मांगों पर विचार करने के लिए नीति आयोग के पूर्व सदस्य रमेश चंद की अध्यक्षता में एक समिति गठित की है।इस घटनाक्रम के बीच गन्ना किसानों की मांगें अभी पूरी तरह हल नहीं हुई हैं। किसान गन्ने का उचित एवं लाभकारी मूल्य (FRP) बढ़ाकर 5,500 रुपये प्रति टन करने और चीनी का न्यूनतम बिक्री मूल्य (MSP) 60 रुपये प्रति किलोग्राम निर्धारित करने की मांग कर रहे हैं। इसके अलावा, किसान गन्ने की तौल और चीनी मिलों में रिकवरी की जांच जैसी समस्याओं का समाधान भी चाहते हैं।
किसानों की सात मांगों को लेकर सरकार पर दबाव
आर. अशोक ने दावा किया कि केंद्र सरकार गन्ना किसानों की सात मांगों को पूरा करने की दिशा में कदम उठा रही है। उन्होंने कहा कि केंद्र किसानों के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और इस मामले में आवश्यक पहल की गई है। हालांकि, किसानों की मांगों पर अंतिम निर्णय और उनके क्रियान्वयन को लेकर अभी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है।गन्ना किसानों की समस्याओं में उत्पादन लागत, गन्ने के उचित दाम, चीनी मिलों में भुगतान और तौल प्रक्रिया की पारदर्शिता जैसे मुद्दे शामिल हैं। किसानों का कहना है कि खेती की बढ़ती लागत को देखते हुए उन्हें गन्ने का अधिक मूल्य मिलना चाहिए। इसके साथ ही, चीनी मिलों में गन्ने की वास्तविक मात्रा और रिकवरी प्रतिशत का निष्पक्ष आकलन भी जरूरी है, ताकि किसानों को उनके उत्पादन का उचित भुगतान मिल सके।
कांग्रेस सरकार पर जिम्मेदारी से बचने का आरोप
विपक्ष के नेता ने आरोप लगाया कि कर्नाटक की कांग्रेस सरकार किसानों की समस्याओं के समाधान के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठा रही है। उन्होंने कहा कि जब केंद्र सरकार इस विषय पर पहल कर रही है, तो राज्य प्रशासन को भी अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए किसानों को राहत देने के लिए प्रभावी कदम उठाने चाहिए।गन्ना मूल्य निर्धारण में केंद्र और राज्य की भूमिकाएं अलग-अलग हैं। केंद्र सरकार गन्ने के लिए FRP तय करती है, जबकि राज्य सरकार किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए राज्य सलाहकारी मूल्य (SAP) जैसे उपायों पर विचार कर सकती है। ऐसे में किसानों की मांगों का समाधान निकालने के लिए दोनों सरकारों के बीच समन्वय महत्वपूर्ण है।
गन्ना किसानों को फैसले का इंतजार
कर्नाटक में गन्ने की कीमतों को लेकर किसानों के विरोध और मांगों के बीच अब केंद्र सरकार द्वारा गठित समिति की सिफारिशों पर नजर रहेगी। आर. अशोक ने केंद्र की पहल का समर्थन करते हुए राज्य सरकार से भी सक्रिय भूमिका निभाने की मांग की है।हालांकि, किसानों के लिए वास्तविक राहत तभी सुनिश्चित होगी, जब उनकी मांगों पर ठोस निर्णय लिया जाएगा और उसे लागू करने की स्पष्ट व्यवस्था बनेगी। फिलहाल, गन्ने के मूल्य में बढ़ोतरी, चीनी के न्यूनतम बिक्री मूल्य और राज्य स्तर पर अतिरिक्त सहायता जैसे विषय किसानों की प्रमुख मांगों में शामिल हैं।
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