बेंगलुरु। कर्नाटक विधान परिषद के सत्र के दौरान अधिकारियों की गैरमौजूदगी को लेकर चेयरमैन सलीम अहमद ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने चेतावनी दी कि सदन की कार्यवाही के दौरान अनुपस्थित रहने वाले संबंधित अधिकारियों के खिलाफ वह राज्य के मुख्य सचिव को पत्र लिखेंगे। उन्होंने सदन के नेता डॉ. यतींद्र सिद्धारमैया को भी इस मामले को गंभीरता से लेने और आवश्यक अधिकारियों की उपस्थिति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
विधान परिषद में विभिन्न विभागों से जुड़े सवालों और मुद्दों पर चर्चा के दौरान संबंधित अधिकारियों की मौजूदगी महत्वपूर्ण मानी जाती है। अधिकारियों के पास विभाग से जुड़ी विस्तृत जानकारी और आंकड़े होते हैं, जिनकी जरूरत मंत्रियों को सदस्यों के सवालों का जवाब देने के दौरान पड़ सकती है। ऐसे में अधिकारियों की अनुपस्थिति से सदन में किसी विषय पर विस्तृत जवाब देने और आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराने में परेशानी हो सकती है।
इसी मुद्दे को लेकर चेयरमैन सलीम अहमद ने नाराजगी जताई। उन्होंने साफ किया कि सदन की कार्यवाही को गंभीरता से लिया जाना चाहिए और जिन अधिकारियों की उपस्थिति अपेक्षित है, उन्हें सत्र के दौरान मौजूद रहना चाहिए। उन्होंने संकेत दिया कि बार-बार अनुपस्थिति को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा।
सलीम अहमद ने सदन के नेता डॉ. यतींद्र सिद्धारमैया से कहा कि वह इस विषय को गंभीरता से देखें। साथ ही संबंधित विभागों के अधिकारियों को सदन में मौजूद रहने के निर्देश दिए जाएं, ताकि विधायी कार्यवाही सुचारू रूप से चल सके। चेयरमैन की टिप्पणी से यह स्पष्ट हुआ कि विधान परिषद में अधिकारियों की उपस्थिति को लेकर अनुशासन सुनिश्चित करने पर जोर दिया जा रहा है।
विधानमंडल के सत्र के दौरान सदस्य सरकार से विभिन्न विभागों के कामकाज, योजनाओं, बजट, विकास कार्यों और प्रशासनिक फैसलों से संबंधित सवाल पूछते हैं। मंत्रियों की ओर से इन सवालों के जवाब दिए जाते हैं। कई बार विस्तृत आंकड़े या किसी खास मामले की जानकारी तत्काल उपलब्ध कराने के लिए संबंधित विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की सहायता आवश्यक होती है।
अधिकारियों की गैरमौजूदगी की स्थिति में संबंधित विषय पर सरकार की ओर से पूरी जानकारी देने में कठिनाई आ सकती है। इसी कारण विधानसभा और विधान परिषद के सत्रों के दौरान आवश्यक विभागीय अधिकारियों की उपस्थिति सुनिश्चित करने की व्यवस्था रहती है। अधिकारी सदन के भीतर निर्धारित स्थान पर मौजूद रहकर संबंधित मंत्री और विभाग को जरूरी जानकारी उपलब्ध कराते हैं।
चेयरमैन सलीम अहमद ने अधिकारियों की अनुपस्थिति को सदन की कार्यवाही से जोड़ते हुए इसे गंभीर विषय माना। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि अधिकारी सत्र में मौजूद नहीं रहते हैं तो इस संबंध में मुख्य सचिव को पत्र भेजा जाएगा। मुख्य सचिव राज्य प्रशासन के शीर्ष अधिकारी होते हैं और विभिन्न विभागों के प्रशासनिक समन्वय की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभालते हैं।
चेयरमैन की चेतावनी के बाद संबंधित विभागों पर अपने अधिकारियों की उपस्थिति सुनिश्चित करने का दबाव बढ़ सकता है। खासतौर पर जिन विभागों से जुड़े प्रश्न या प्रस्ताव सदन की कार्यसूची में शामिल हों, उनके अधिकारियों से समय पर उपस्थित रहने की अपेक्षा की जाती है।
विधान परिषद की कार्यवाही में जनप्रतिनिधि अपने क्षेत्रों और राज्य से जुड़े कई मुद्दे उठाते हैं। इसमें विकास परियोजनाओं से लेकर शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, पानी, कृषि, कानून व्यवस्था और प्रशासनिक विषयों तक कई मामले शामिल हो सकते हैं। इन विषयों पर सरकार से जवाब मांगा जाता है और कई मामलों में अधिकारियों द्वारा उपलब्ध कराई गई जानकारी जवाब तैयार करने में महत्वपूर्ण होती है।
सदन में पूछे जाने वाले प्रश्न विधायी जवाबदेही की प्रक्रिया का हिस्सा हैं। इसके माध्यम से सदस्य सरकार की नीतियों और विभागों के कामकाज के बारे में जानकारी प्राप्त करते हैं। यदि संबंधित विभाग के अधिकारी मौजूद हों तो किसी पूरक सवाल या अतिरिक्त जानकारी की जरूरत पड़ने पर मंत्री को तथ्य उपलब्ध कराने में आसानी होती है।
सलीम अहमद ने सदन के नेता को निर्देश देकर यह संदेश दिया कि अधिकारियों की उपस्थिति सुनिश्चित करना केवल संबंधित अधिकारी की व्यक्तिगत जिम्मेदारी नहीं, बल्कि सरकार और प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़ा विषय भी है। उन्होंने कहा कि मामले को गंभीरता से लिया जाए और भविष्य में ऐसी स्थिति न बने, इसके लिए जरूरी कदम उठाए जाएं।
कर्नाटक विधान परिषद राज्य विधानमंडल का उच्च सदन है। यहां विभिन्न मुद्दों पर चर्चा के साथ सरकार से सवाल-जवाब होते हैं। सदन की कार्यवाही को सुचारू रूप से चलाने की जिम्मेदारी चेयरमैन की होती है। इसी अधिकार के तहत चेयरमैन सदन में अनुशासन और निर्धारित प्रक्रियाओं के पालन को लेकर निर्देश दे सकते हैं।
अधिकारियों की अनुपस्थिति को लेकर उठे इस मुद्दे ने प्रशासनिक जवाबदेही का सवाल भी सामने रखा है। जनप्रतिनिधियों द्वारा उठाए जाने वाले सवालों पर सही और समय पर जानकारी उपलब्ध कराना सरकार के विभिन्न विभागों की जिम्मेदारी का हिस्सा है। इसलिए संबंधित अधिकारियों की मौजूदगी को विधायी प्रक्रिया के सुचारू संचालन से जोड़कर देखा जाता है।
फिलहाल चेयरमैन ने चेतावनी दी है कि अनुपस्थित अधिकारियों के मामले में मुख्य सचिव को पत्र लिखा जाएगा। साथ ही सदन के नेता डॉ. यतींद्र सिद्धारमैया को संबंधित अधिकारियों की उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है। अब यह देखना होगा कि आगे के सत्रों में इस निर्देश का कितना असर दिखाई देता है और अधिकारियों की उपस्थिति को लेकर क्या व्यवस्था की जाती है।