बेंगलुरु: कर्नाटक हाई कोर्ट ने कहा कि सहानुभूति के आधार पर नियुक्ति की प्रक्रिया को ऊंचे पदों, बेहतर कैडर या ज़्यादा सर्विस बेनिफिट्स के दावों के लिए अंतहीन रूप से नहीं चलने दिया जा सकता, सिर्फ़ इसलिए कि ऐसे आधार पर नियुक्त व्यक्ति के पास ऊंचे पदों के लिए ज़रूरी योग्यता है। कोर्ट ने आगे कहा कि एक बार जब सहानुभूति के आधार पर नियुक्ति की योजना का मकसद उस पद पर नियुक्ति से पूरा हो जाता है, तो किसी दूसरे और ऊंचे पद को पाने के लिए फिर से सहानुभूति का सहारा नहीं लिया जा सकता।

जस्टिस एम नागप्रसन्ना और जस्टिस हेमा कुलकर्णी की डिवीज़न बेंच ने बेलगावी ज़िले के सेकंड डिवीज़न असिस्टेंट (SDA) सतीश वी गुल्ला की याचिका पर कर्नाटक स्टेट एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल के 24 मार्च, 2026 के आदेश को रद्द करते हुए यह फ़ैसला सुनाया। गुल्ला के पिता बेलगावी में असिस्टेंट डायरेक्टर ऑफ़ लैंड रिकॉर्ड्स के ऑफ़िस में 'बंध चपरासी' (Bandh Peon) के तौर पर काम करते थे। 2017 में नौकरी के दौरान ही उनकी मौत हो गई। इसके बाद, गुल्ला को उसी ऑफ़िस में सेकंड डिवीज़न असिस्टेंट के तौर पर नियुक्त किया गया।

ड्यूटी जॉइन करने के सात महीने बाद, उन्होंने अपनी शैक्षणिक योग्यता के आधार पर फर्स्ट डिवीज़न असिस्टेंट (FDA) के पद पर नियुक्ति के लिए अपना मामला विचारार्थ रखने का अनुरोध किया। रेवेन्यू डिपार्टमेंट ने 2019 में एक एंडोर्समेंट के ज़रिए इसे खारिज कर दिया, जिसे ट्रिब्यूनल के सामने चुनौती दी गई।

ट्रिब्यूनल ने याचिका मंज़ूर कर ली और एंडोर्समेंट को रद्द करते हुए डिपार्टमेंट को निर्देश दिया कि वह गुल्ला के मामले पर उस पद के लिए विचार करे। इसी तरह के एक मामले में, ट्रिब्यूनल ने रेवेन्यू डिपार्टमेंट को आदेश दिया कि वह बागलकोट के संदीपकुमार विनायकराव कुलकर्णी के मामले पर FDA पद के लिए विचार करे।

 

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