सूखे से संकट में चित्रदुर्ग किसान, बैल बेचने की मजबूरी

Update: 2026-07-17 07:47 GMT

चित्रदुर्ग : मध्य कर्नाटक में सूखे की स्थिति लगातार गंभीर होती जा रही है। इसका सीधा असर किसानों और उनके पशुधन पर पड़ रहा है। चित्रदुर्ग जिले के कई किसान, जिन्होंने अच्छी बारिश की उम्मीद में खेती के लिए बैल खरीदे थे, अब पानी और चारे की भारी कमी की आशंका के चलते उन्हें नुकसान उठाकर बेचने की कोशिश कर रहे हैं।

किसानों का कहना है कि उन्होंने खरीफ सीजन में बेहतर फसल की उम्मीद के साथ मई और जून के शुरुआती दिनों में पशु बाजारों से बैल खरीदे थे। खासतौर पर अमृतमहल नस्ल के बैलों की मांग रहती है, क्योंकि यह नस्ल खेती के काम के लिए मजबूत और उपयोगी मानी जाती है। लेकिन मानसून कमजोर रहने और बारिश में देरी के कारण अब किसानों के सामने पशुओं को पालने का संकट खड़ा हो गया है।

चित्रदुर्ग का पशु बाजार हर साल खेती के मौसम के दौरान काफी सक्रिय रहता है। किसान खेती की तैयारियों के लिए बैल खरीदते हैं और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में पशुधन की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। इस बार भी बड़ी संख्या में किसानों ने बारिश की उम्मीद के साथ बैल खरीदे थे, लेकिन मौसम ने उनका साथ नहीं दिया।

किसानों के अनुसार, खेतों में पर्याप्त नमी नहीं होने के कारण खेती की गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं। वहीं, पशुओं के लिए हरा चारा और पीने के पानी की व्यवस्था करना भी मुश्किल होता जा रहा है। ऐसे में कई किसान मजबूरी में अपने बैलों को बेचने के लिए बाजार पहुंच रहे हैं।

हालांकि, समस्या यह है कि बाजार में खरीदारों की संख्या काफी कम हो गई है। किसान बैलों को बेचने के लिए ला तो रहे हैं, लेकिन उचित कीमत नहीं मिल रही। कई किसानों को अपनी खरीद कीमत से कम दाम पर भी पशु बेचने के लिए तैयार होना पड़ रहा है। इसके बावजूद कई लोग बिना बिक्री किए ही अपने मवेशियों को वापस गांव ले जाने को मजबूर हैं।

किसानों का कहना है कि पशुओं को रखना दिन-ब-दिन महंगा होता जा रहा है। चारे की कीमत बढ़ रही है और पानी की उपलब्धता भी कम हो रही है। अगर सूखे की स्थिति और खराब हुई तो आने वाले समय में पशुओं की देखभाल करना और कठिन हो जाएगा।

कई किसानों ने पिछले सूखे के अनुभवों को याद करते हुए कहा कि उस समय भी उन्हें पशुधन बचाने के लिए काफी संघर्ष करना पड़ा था। लंबे समय तक बारिश नहीं होने से चारे का संकट पैदा हो गया था और कई लोगों को मजबूरी में अपने पशु बेचने पड़े थे। इस बार किसान पहले से ही सतर्क होकर कदम उठाना चाहते हैं, ताकि हालात और बिगड़ने से पहले नुकसान कम किया जा सके।

किसानों का कहना है कि उन्होंने खेती और पशुपालन दोनों को ध्यान में रखते हुए बैल खरीदे थे। लेकिन बारिश नहीं होने से खेती प्रभावित हो रही है और अब पशुओं को रखना भी चुनौती बन गया है। ऐसे में वे चाहते हैं कि सरकार सूखे की स्थिति को देखते हुए पशुपालकों के लिए राहत उपाय शुरू करे।

ग्रामीणों के अनुसार, चित्रदुर्ग जैसे इलाकों में पशुधन केवल खेती का साधन नहीं होता, बल्कि किसानों की आर्थिक सुरक्षा का भी हिस्सा होता है। बैल खरीदने में किसानों ने अपनी बचत लगाई थी, लेकिन अब उन्हें कम कीमत पर बेचने की नौबत आ रही है।

मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, बारिश की कमी का असर कृषि क्षेत्र पर व्यापक रूप से पड़ सकता है। यदि आने वाले दिनों में पर्याप्त वर्षा नहीं हुई तो किसानों की परेशानियां और बढ़ सकती हैं। ऐसे में सरकार और प्रशासन के सामने किसानों के साथ-साथ पशुओं के लिए भी राहत व्यवस्था करना बड़ी चुनौती होगी।

किसानों की सबसे बड़ी चिंता फिलहाल पानी और चारे की उपलब्धता को लेकर है। वे चाहते हैं कि सूखे की स्थिति को देखते हुए जल्द कदम उठाए जाएं, ताकि पशुधन को बचाया जा सके और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले असर को कम किया जा सके।

चित्रदुर्ग के पशु बाजारों में दिख रही यह स्थिति बताती है कि सूखे का प्रभाव केवल खेतों तक सीमित नहीं है, बल्कि किसानों के पूरे जीवन और आजीविका को प्रभावित कर रहा है। बारिश की उम्मीद में खरीदे गए बैल अब कई किसानों के लिए आर्थिक बोझ बनते जा रहे हैं।

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