2028 में कांग्रेस 50-60 सीटों पर सिमटेगी: Vijayendra

Update: 2026-07-29 08:56 GMT

बेंगलुरु। कर्नाटक भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बी.वाई. विजयेंद्र ने दावा किया है कि वर्ष 2028 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी का प्रदर्शन बुरी तरह प्रभावित होगा और उसकी सीटें घटकर केवल 50 से 60 के बीच रह जाएंगी। उन्होंने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के चुनावी राजनीति से संन्यास लेने के फैसले का कांग्रेस पर व्यापक असर पड़ेगा और इससे पार्टी की राजनीतिक स्थिति कमजोर हो जाएगी।

मीडिया से बातचीत के दौरान विजयेंद्र ने कहा कि मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने सार्वजनिक रूप से चुनावी राजनीति से हटने की घोषणा की है। उनके अनुसार, कांग्रेस के सबसे वरिष्ठ नेताओं में से एक के सक्रिय राजनीति से हटने का सीधा प्रभाव पार्टी के संगठन और चुनावी प्रदर्शन पर पड़ेगा। उन्होंने दावा किया कि 2028 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस अपनी वर्तमान स्थिति बनाए रखने में सफल नहीं होगी।

विजयेंद्र ने कहा कि सिद्धारमैया लंबे समय से कांग्रेस के प्रमुख चेहरों में शामिल रहे हैं। ऐसे में उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर लिया गया निर्णय कांग्रेस के लिए चुनौती बन सकता है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस का जनाधार कमजोर होगा और पार्टी विधानसभा में सीमित सीटों तक सिमट सकती है।

'कांग्रेस की नींव हिल जाएगी'

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि सिद्धारमैया के फैसले से कांग्रेस की राजनीतिक नींव हिल जाएगी। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार के भीतर नेतृत्व को लेकर पहले से ही मतभेद दिखाई दे रहे हैं और भविष्य में इसका असर संगठन पर और अधिक पड़ेगा।

उन्होंने कहा कि भाजपा राज्य में कांग्रेस सरकार की नीतियों के खिलाफ लगातार जनआंदोलन चलाएगी। विजयेंद्र ने कहा कि विपक्ष के नेता आर. अशोक के साथ मिलकर भाजपा सरकार की नीतियों और फैसलों के खिलाफ अभियान चलाएगी तथा जनता के मुद्दों को प्रमुखता से उठाएगी।

कावेरी जल विवाद पर सरकार को घेरा

बी.वाई. विजयेंद्र ने कावेरी जल विवाद को लेकर भी कांग्रेस सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार को कावेरी जल प्रबंधन के मामले में अधिक जिम्मेदारी के साथ काम करना चाहिए था। उनका आरोप था कि सरकार ने इस संवेदनशील मुद्दे पर अपेक्षित गंभीरता नहीं दिखाई।

उन्होंने कहा कि कावेरी बेसिन सहित राज्य के कई हिस्से इस समय गंभीर जल संकट और सूखे की स्थिति का सामना कर रहे हैं। ऐसे समय में सरकार की प्राथमिकता किसानों और पेयजल की जरूरतों को पूरा करना होनी चाहिए थी।

विजयेंद्र ने कहा कि राज्य सरकार को किसानों के हितों की रक्षा के लिए अधिक प्रभावी कदम उठाने चाहिए थे। उनका आरोप था कि सरकार के फैसलों से किसानों की चिंताएं बढ़ी हैं और जल प्रबंधन को लेकर स्पष्ट रणनीति दिखाई नहीं दे रही है।

किसानों के समर्थन में आंदोलन का ऐलान

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि कावेरी मुद्दे से प्रभावित किसानों की समस्याओं को लेकर व्यापक विरोध प्रदर्शन किया जाएगा। उन्होंने बताया कि इस आंदोलन का नेतृत्व वे स्वयं और विधानसभा में विपक्ष के नेता आर. अशोक करेंगे।

उन्होंने दावा किया कि राज्य के विभिन्न किसान संगठन और कई सामाजिक संगठन इस आंदोलन में शामिल होंगे। विजयेंद्र ने यह भी कहा कि जनता दल (सेक्युलर) यानी जेडीएस भी किसानों के हितों से जुड़े इस अभियान में भाग लेगा।

उनके अनुसार, आंदोलन का उद्देश्य सरकार का ध्यान उन किसानों की ओर आकर्षित करना है, जो जल संकट और सूखे के कारण कठिन परिस्थितियों का सामना कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि किसानों की समस्याओं को लेकर विपक्ष एकजुट होकर आवाज उठाएगा।

सूखे की स्थिति पर चिंता

विजयेंद्र ने कहा कि कावेरी बेसिन समेत कर्नाटक के कई हिस्सों में जल स्तर लगातार घट रहा है। बारिश कम होने और जलाशयों में पानी की कमी के कारण कृषि क्षेत्र प्रभावित हो रहा है। उन्होंने कहा कि ऐसी परिस्थितियों में राज्य सरकार को जल संसाधनों का प्रबंधन अधिक सावधानी और दूरदर्शिता के साथ करना चाहिए।

उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की नीतियों के कारण किसानों में असंतोष बढ़ा है। भाजपा इस मुद्दे को जनता के बीच लेकर जाएगी और सरकार से जवाबदेही की मांग करेगी।

2028 चुनाव को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज

कर्नाटक में आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर अभी से राजनीतिक बयानबाजी तेज होती दिखाई दे रही है। भाजपा और कांग्रेस दोनों ही राज्य में अपनी राजनीतिक स्थिति मजबूत करने की कोशिश में जुटे हैं।

विजयेंद्र के इस बयान को चुनावी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। उन्होंने जहां कांग्रेस के भविष्य पर सवाल उठाए, वहीं भाजपा को राज्य में मजबूत विकल्प के रूप में पेश करने की कोशिश की। दूसरी ओर, कावेरी जल विवाद और किसानों के मुद्दे को भी उन्होंने सरकार के खिलाफ प्रमुख राजनीतिक मुद्दा बताया।

आने वाले समय में कर्नाटक की राजनीति में कावेरी जल विवाद, किसानों की समस्याएं और नेतृत्व से जुड़े मुद्दे प्रमुख विषय बने रह सकते हैं। भाजपा ने संकेत दिया है कि वह इन मुद्दों को लेकर सरकार पर दबाव बनाए रखेगी, जबकि कांग्रेस सरकार अपने फैसलों और नीतियों का बचाव करने की तैयारी में है।

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