कावेरी जल आदेश के खिलाफ अपील करेगा कर्नाटक

Update: 2026-07-29 09:06 GMT

बेंगलुरु। कर्नाटक में कमजोर मानसून और लगातार बढ़ते जल संकट के बीच राज्य सरकार ने कावेरी जल नियंत्रण समिति (CWRC) के उस आदेश के खिलाफ अपील करने का फैसला किया है, जिसमें कर्नाटक को अगले 15 दिनों तक प्रतिदिन 3,500 क्यूसेक पानी तमिलनाडु को छोड़ने का निर्देश दिया गया है। राज्य सरकार का कहना है कि मौजूदा परिस्थितियों में जलाशयों में पानी का स्तर लगातार घट रहा है और कई जिलों में सूखे जैसी स्थिति बनी हुई है। ऐसे में राज्य के लोगों की पेयजल जरूरतों और किसानों के हितों को प्राथमिकता देना आवश्यक है।

जल संसाधन मंत्री रामलिंगा रेड्डी ने बुधवार को एक आपातकालीन बैठक के बाद घोषणा की कि सरकार कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (CWMA) के समक्ष CWRC के आदेश को चुनौती देगी। उन्होंने कहा कि राज्य के मौजूदा हालात को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है और सरकार सभी कानूनी विकल्पों का उपयोग करेगी।

कमजोर मानसून से बढ़ी चिंता

सरकार के अनुसार इस वर्ष कर्नाटक में मानसून सामान्य नहीं रहा है। राज्य के कई हिस्सों में अपेक्षित वर्षा नहीं हुई, जिससे जलाशयों में पानी का संग्रह भी कम हुआ है। विशेष रूप से बेंगलुरु और उसके आसपास के जिलों में बारिश की कमी ने पेयजल और सिंचाई दोनों को लेकर चिंता बढ़ा दी है।

जल संसाधन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि यदि आने वाले दिनों में पर्याप्त वर्षा नहीं हुई तो कई क्षेत्रों में जल संकट और गहरा सकता है। ऐसे में जलाशयों से अतिरिक्त पानी छोड़ना भविष्य की जरूरतों पर असर डाल सकता है।

कई जिलों में सूखे जैसे हालात

राज्य सरकार का कहना है कि मांड्या, मैसूर, हासन, बेंगलुरु, कोलार सहित कई जिले इस समय वर्षा की कमी का सामना कर रहे हैं। इन क्षेत्रों की कृषि बड़े पैमाने पर कावेरी नदी के पानी पर निर्भर करती है। किसानों को आशंका है कि यदि जलाशयों से बड़ी मात्रा में पानी तमिलनाडु के लिए छोड़ा गया तो सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता प्रभावित होगी।

सरकार का कहना है कि उसकी पहली जिम्मेदारी राज्य के नागरिकों के लिए पेयजल उपलब्ध कराना और किसानों की सिंचाई आवश्यकताओं को पूरा करना है। इसी कारण CWRC के निर्देश के खिलाफ अपील करने का निर्णय लिया गया है।

किसानों में बढ़ा आक्रोश

कावेरी जल छोड़ने के आदेश के बाद राज्य के किसानों में नाराजगी बढ़ गई है। मांड्या, मैसूर, हासन, बेंगलुरु और कोलार के किसान संगठनों ने सरकार के समक्ष अपना विरोध दर्ज कराया है।

किसानों का कहना है कि इस समय खेतों को सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी नहीं मिल रहा है। यदि जलाशयों का पानी दूसरे राज्य को दिया गया तो उनकी फसलें प्रभावित होंगी और आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा।

कई किसान संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार तमिलनाडु के लिए पानी छोड़ती है तो वे व्यापक आंदोलन शुरू करेंगे। किसानों का कहना है कि राज्य के भीतर जल संकट को देखते हुए पहले स्थानीय जरूरतों को पूरा किया जाना चाहिए।

आपात बैठक में लिया गया निर्णय

जल संसाधन मंत्री रामलिंगा रेड्डी ने अधिकारियों के साथ आपात बैठक कर जलाशयों की स्थिति, वर्षा के आंकड़ों और भविष्य की जल उपलब्धता की समीक्षा की। बैठक में विभिन्न तकनीकी और कानूनी पहलुओं पर चर्चा की गई।

बैठक के बाद मंत्री ने कहा कि सरकार ने सर्वसम्मति से CWRC के आदेश के खिलाफ कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (CWMA) में अपील करने का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि राज्य की वर्तमान स्थिति को देखते हुए यह कदम आवश्यक है।

मंत्री ने यह भी कहा कि सरकार अदालतों और संबंधित प्राधिकरणों के समक्ष यह बताएगी कि कर्नाटक इस समय गंभीर जल संकट से गुजर रहा है और ऐसे में पानी छोड़ना राज्य के हित में नहीं होगा।

कावेरी जल विवाद फिर सुर्खियों में

कावेरी नदी के पानी के बंटवारे को लेकर कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच लंबे समय से विवाद चलता आ रहा है। दोनों राज्यों की कृषि और पेयजल व्यवस्था काफी हद तक इस नदी पर निर्भर है।

कावेरी जल नियंत्रण समिति समय-समय पर जल उपलब्धता और न्यायिक निर्देशों के आधार पर दोनों राज्यों के लिए पानी छोड़ने के आदेश जारी करती है। हालांकि, जब भी वर्षा कम होती है या जलाशयों में पानी की कमी होती है, तब यह मुद्दा राजनीतिक और सामाजिक रूप से संवेदनशील बन जाता है।

राजनीतिक और कानूनी लड़ाई की तैयारी

राज्य सरकार अब इस मामले में कानूनी लड़ाई लड़ने की तैयारी कर रही है। सरकार का कहना है कि वह सभी उपलब्ध तथ्यों और जलाशयों की मौजूदा स्थिति को CWMA के सामने रखेगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला केवल कानूनी नहीं, बल्कि लाखों किसानों और करोड़ों लोगों की पेयजल जरूरतों से जुड़ा हुआ है। इसलिए आने वाले दिनों में इस विवाद पर केंद्र और दोनों राज्यों की नजर बनी रहेगी।

फिलहाल कर्नाटक सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि वह राज्य के हितों से कोई समझौता नहीं करेगी और जल संकट की मौजूदा स्थिति को देखते हुए CWRC के आदेश के खिलाफ औपचारिक अपील दायर करेगी। अब सभी की नजर कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण के अगले निर्णय और इस विवाद के आगे के घटनाक्रम पर टिकी हुई है।

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