बेंगलुरु। कर्नाटक ने विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI) के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। राज्य के बड़े एवं मध्यम उद्योग मंत्री एमबी पाटिल ने बताया कि कर्नाटक में वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान 12,939 मिलियन अमेरिकी डॉलर, यानी करीब 12.94 अरब डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश आया है। इस उपलब्धि के साथ कर्नाटक देश में सबसे अधिक विदेशी निवेश आकर्षित करने वाले राज्यों में दूसरे स्थान पर बना हुआ है। राज्य सरकार का मानना है कि निवेशकों का बढ़ता भरोसा कर्नाटक की मजबूत औद्योगिक व्यवस्था, कुशल मानव संसाधन और कारोबार के अनुकूल वातावरण को दर्शाता है।आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 में कर्नाटक को 6,619 मिलियन अमेरिकी डॉलर का एफडीआई प्राप्त हुआ था, जबकि 2025-26 में यह बढ़कर 12,939 मिलियन डॉलर हो गया। इस प्रकार राज्य में विदेशी निवेश लगभग 95.5 प्रतिशत बढ़ा है। यह वृद्धि ऐसे समय में दर्ज की गई है, जब अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अनिश्चितता और निवेश के लिए विभिन्न देशों तथा भारतीय राज्यों के बीच प्रतिस्पर्धा बनी हुई है।कर्नाटक लगातार चौथे वित्त वर्ष में भारत का दूसरा सबसे बड़ा एफडीआई प्राप्तकर्ता राज्य रहा है। देश में महाराष्ट्र पहले स्थान पर रहा, जिसने वित्त वर्ष 2025-26 में लगभग 18.42 अरब डॉलर का एफडीआई आकर्षित किया। वहीं कर्नाटक को करीब 12.94 अरब डॉलर का निवेश मिला। इसके बाद दिल्ली, गुजरात और तमिलनाडु का स्थान रहा। ये आंकड़े विदेशी निवेश के मामले में कर्नाटक की मजबूत स्थिति को दर्शाते हैं।एमबी पाटिल ने विदेशी निवेश बढ़ाने के लिए राज्य सरकार की औद्योगिक नीतियों, निवेशकों से निरंतर संवाद और वैश्विक कंपनियों को आकर्षित करने के प्रयासों पर जोर दिया है। उनका कहना रहा है कि कर्नाटक में सूचना प्रौद्योगिकी के अलावा विनिर्माण, इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर, एयरोस्पेस, रक्षा उत्पादन और स्वच्छ ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में भी निवेश की व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं।
आईटी के साथ विनिर्माण क्षेत्र पर भी सरकार का जोर
बेंगलुरु लंबे समय से भारत के प्रमुख सूचना प्रौद्योगिकी और स्टार्टअप केंद्र के रूप में पहचाना जाता है। यहां कई अंतरराष्ट्रीय तकनीकी कंपनियों, अनुसंधान संस्थानों और वैश्विक क्षमता केंद्रों की मौजूदगी है। इसके कारण विदेशी निवेशकों को आधुनिक तकनीक, कुशल कर्मचारियों और व्यावसायिक सुविधाओं का लाभ मिलता है।हालांकि, राज्य सरकार अब केवल आईटी क्षेत्र तक सीमित नहीं रहना चाहती। सरकार इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम डिजाइन एवं विनिर्माण, सेमीकंडक्टर चिप डिजाइन, चिकित्सा उपकरण, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के कलपुर्जे और उन्नत विनिर्माण जैसे क्षेत्रों में भी निवेश बढ़ाने का प्रयास कर रही है।इन क्षेत्रों में नए उद्योग स्थापित होने से इंजीनियरिंग, तकनीकी सेवाओं, उत्पादन, आपूर्ति शृंखला और संबंधित कारोबार में रोजगार के अवसर बढ़ सकते हैं। साथ ही, स्थानीय छोटे और मध्यम उद्योगों को बड़ी कंपनियों के साथ काम करने का अवसर मिल सकता है।
विदेशों में निवेश प्रोत्साहन कार्यालय खोलने की तैयारी
कर्नाटक सरकार अंतरराष्ट्रीय निवेशकों तक अपनी पहुंच बढ़ाने के लिए नई रणनीति पर भी काम कर रही है। अक्टूबर 2026 में उद्योग मंत्री एमबी पाटिल ने जानकारी दी थी कि सरकार अमेरिका, जापान, ताइवान, दक्षिण कोरिया और फ्रांस में इन्वेस्ट कर्नाटक फोरम के कार्यालय खोलने की संभावनाओं का अध्ययन कर रही है।इसके लिए अधिकारियों को प्रस्ताव के फायदे और चुनौतियों का आकलन करने तथा विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। सरकार का उद्देश्य प्रमुख औद्योगिक देशों में निवेशकों से सीधे संपर्क स्थापित करना और कर्नाटक में उपलब्ध कारोबारी अवसरों की जानकारी देना है।
अमेरिकी कंपनियों के साथ औद्योगिक सहयोग बढ़ाने की योजना
कर्नाटक सरकार अमेरिका के साथ औद्योगिक संबंधों को भी मजबूत करने में जुटी है। अगस्त 2026 में एमबी पाटिल ने घोषणा की थी कि राज्य सरकार अक्टूबर में अमेरिका में निवेश रोड शो आयोजित करने की योजना बना रही है। इसका उद्देश्य अमेरिकी कंपनियों को कर्नाटक में निवेश के अवसरों से परिचित कराना और नई औद्योगिक परियोजनाओं को आकर्षित करना है।इस दौरान मंत्री ने अमेरिकी महावाणिज्यदूत मारियाना एल. नेइसुलर के साथ निवेश और द्विपक्षीय आर्थिक सहयोग को लेकर चर्चा की थी। पाटिल के अनुसार, कर्नाटक में लगभग 700 अमेरिकी कंपनियां और स्टार्टअप कार्यरत हैं। ये कंपनियां राज्य के प्रौद्योगिकी, नवाचार और विनिर्माण क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
2027 में ग्लोबल इन्वेस्टर्स मीट पर नजर
कर्नाटक सरकार अप्रैल 2027 में प्रस्तावित ग्लोबल इन्वेस्टर्स मीट के जरिए भी बड़े निवेश आकर्षित करने की तैयारी कर रही है। सरकार की योजना इस आयोजन में अंतरराष्ट्रीय कंपनियों और निवेशकों की भागीदारी बढ़ाने की है।उद्योग मंत्री के अनुसार, विदेशी निवेश आकर्षित करने के लिए विभिन्न देशों की औद्योगिक विशेषज्ञता को ध्यान में रखते हुए रणनीति तैयार करना आवश्यक है। इससे राज्य में उच्च तकनीक वाले उद्योगों को बढ़ावा मिलने के साथ रोजगार और निर्यात की संभावनाएं मजबूत हो सकती हैं।
निवेश को धरातल पर उतारना बड़ी चुनौती
विदेशी निवेश के बढ़ते आंकड़े राज्य की अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत माने जा रहे हैं। हालांकि, निवेश आकर्षित करने के साथ औद्योगिक परियोजनाओं को समय पर पूरा करना भी महत्वपूर्ण है।इसके लिए भूमि, बिजली, परिवहन, जलापूर्ति और कुशल कर्मचारियों जैसी सुविधाओं की उपलब्धता आवश्यक है। सरकार के सामने यह चुनौती भी है कि औद्योगिक विकास का लाभ बेंगलुरु के अलावा राज्य के अन्य शहरों और जिलों तक पहुंचे।विशेषज्ञों के अनुसार, विदेशी निवेश से आर्थिक विकास को गति मिल सकती है, लेकिन रोजगार के वास्तविक अवसर निवेश की प्रकृति और परियोजनाओं के क्रियान्वयन पर निर्भर करते हैं। ऐसे में औद्योगिक परियोजनाओं की प्रगति, स्थानीय रोजगार और निर्यात में वृद्धि पर विशेष ध्यान देना आवश्यक होगा।कुल मिलाकर, वित्त वर्ष 2025-26 में 12,939 मिलियन अमेरिकी डॉलर का एफडीआई प्राप्त होना कर्नाटक की औद्योगिक अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है। पिछले वित्त वर्ष की तुलना में करीब 95.5 प्रतिशत की वृद्धि ने राज्य को देश के प्रमुख निवेश केंद्रों में बनाए रखा है। आने वाले वर्षों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि बढ़ते विदेशी निवेश का कितना लाभ नए उद्योगों, रोजगार सृजन और क्षेत्रीय आर्थिक विकास के रूप में सामने आता है।