गन्ना किसानों के लिए बड़ा फैसला! सरकार लाई त्रिपक्षीय समझौते का फॉर्मूला
बेलगावी/बेंगलुरु। कर्नाटक में गन्ने की कीमत को लेकर किसानों और चीनी मिल मालिकों के बीच लंबे समय से चल रहे विवाद को सुलझाने के लिए राज्य सरकार ने नई पहल की है। मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने गन्ना किसानों, चीनी मिल संचालकों और राज्य सरकार के बीच त्रिपक्षीय समझौता करने का प्रस्ताव रखा है। मंगलवार, 27 अक्टूबर को बेलगावी के सरकारी गेस्ट हाउस में पत्रकारों से बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिलना चाहिए, लेकिन चीनी मिलों की आर्थिक स्थिति को भी ध्यान में रखना जरूरी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार दोनों पक्षों के बीच संतुलन बनाकर विवाद का स्थायी समाधान निकालने की कोशिश कर रही है। गन्ने की कीमत को लेकर उत्तर कर्नाटक के कई जिलों में किसानों के विरोध प्रदर्शन के बाद सरकार सक्रिय हुई है। हालांकि, गन्ने की अंतिम कीमत अभी निर्धारित नहीं हुई है और इस संबंध में केंद्र सरकार के निर्णय का इंतजार किया जा रहा है।
गन्ना मूल्य विवाद सुलझाने के लिए नया फॉर्मूला
कर्नाटक सरकार ने गन्ना किसानों और चीनी मिल मालिकों के बीच जारी गतिरोध समाप्त करने के लिए त्रिपक्षीय समझौते का प्रस्ताव रखा है।
इस व्यवस्था में तीन पक्ष शामिल होंगे। पहला गन्ना उत्पादक किसान, दूसरा चीनी मिल संचालक और तीसरा राज्य सरकार।
मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने कहा कि गन्ना किसानों को उचित कीमत दिलाना सरकार की प्राथमिकता है। हालांकि, इसका समाधान ऐसा होना चाहिए जिससे किसानों की आजीविका सुरक्षित रहे और चीनी मिलों का संचालन भी प्रभावित न हो।
उन्होंने कहा कि किसानों और चीनी मिलों का एक-दूसरे से सीधा संबंध है। यदि किसानों को उचित मूल्य नहीं मिलेगा तो उनकी आर्थिक स्थिति प्रभावित होगी। वहीं, मिलों को पर्याप्त आर्थिक संसाधन नहीं मिलने पर गन्ने की खरीद और प्रसंस्करण में समस्याएं आएंगी।
इसी कारण सरकार बातचीत के जरिए दोनों पक्षों की सहमति से समाधान निकालना चाहती है।
10 घंटे तक चली बैठक, देर रात बनी सहमति
गन्ने की कीमत को लेकर सोमवार, 26 अक्टूबर को बेलगावी में उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई थी।
मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के नेतृत्व में हुई बातचीत सुबह करीब 11 बजे शुरू हुई और देर रात तक जारी रही।
इस दौरान पांच चरणों में लगभग 10 घंटे तक किसान संगठनों और चीनी मिल मालिकों के प्रतिनिधियों के साथ चर्चा हुई।
बैठक में नौ मंत्री, लगभग 70 विधायक और अन्य जनप्रतिनिधि शामिल हुए।
राज्य की 80 चीनी मिलों में से 79 मिलों के प्रतिनिधियों ने भी बातचीत में भाग लिया।
मुख्यमंत्री ने बताया कि लंबी चर्चा के बाद दोनों पक्षों के बीच कुछ मुद्दों पर समझ बनी है। हालांकि, अंतिम समझौते की शर्तें अभी तय नहीं हुई हैं।
किसान कर रहे 6,000 रुपये प्रति टन की मांग
कर्नाटक के गन्ना उत्पादक किसान अपनी उपज के लिए अधिक कीमत की मांग कर रहे हैं।
किसान संगठनों ने गन्ने का मूल्य बढ़ाकर 6,000 रुपये प्रति टन करने की मांग उठाई है।
कुछ किसान संगठनों ने केंद्र द्वारा निर्धारित उचित एवं लाभकारी मूल्य (FRP) के अतिरिक्त राज्य सरकार से 1,000 रुपये प्रति टन सहायता देने की मांग भी रखी है।
किसानों का कहना है कि खेती की लागत लगातार बढ़ रही है। खाद, मजदूरी, सिंचाई, बिजली और परिवहन पर होने वाले खर्च में वृद्धि से उनकी आय प्रभावित हो रही है।
उनकी मांग है कि गन्ने की कीमत तय करते समय वास्तविक उत्पादन लागत और किसानों की आर्थिक जरूरतों को ध्यान में रखा जाए।
सरकार ने किसानों की मांगों को उचित बताते हुए समाधान निकालने का भरोसा दिलाया है।
चीनी मिल मालिकों ने भी बताईं आर्थिक परेशानियां
बैठक में चीनी मिल संचालकों ने भी मुख्यमंत्री के सामने अपनी समस्याएं रखीं।
मिल मालिकों का कहना है कि पिछले करीब दस वर्षों में चीनी की बिक्री कीमत में पर्याप्त बढ़ोतरी नहीं हुई है।
उनका तर्क है कि चीनी की कीमत नहीं बढ़ने से किसानों को अधिक भुगतान करना मुश्किल हो रहा है।
इसके अतिरिक्त मिल संचालकों ने बैंक ऋण मिलने में आने वाली कठिनाइयों का भी उल्लेख किया।
उनके अनुसार, राष्ट्रीयकृत बैंकों से पर्याप्त ऋण नहीं मिलने के कारण कई मिलों को सहकारी संस्थाओं से अधिक ब्याज दर पर पैसा उधार लेना पड़ रहा है।
इससे चीनी उत्पादन की लागत और वित्तीय दबाव बढ़ रहा है।
मुख्यमंत्री ने मिल संचालकों की समस्याओं को भी समाधान प्रक्रिया में शामिल करने की बात कही है।
केंद्र सरकार के फैसले पर टिकी गन्ने की कीमत
मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने कहा कि गन्ने की अंतिम कीमत तय करने में केंद्र सरकार की महत्वपूर्ण भूमिका है।
उन्होंने बताया कि चीनी के न्यूनतम बिक्री मूल्य में संशोधन का विषय केंद्र सरकार के अधिकार क्षेत्र में आता है।
राज्य सरकार ने केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी के सामने चीनी की कीमत बढ़ाने का मुद्दा उठाया है।
मुख्यमंत्री के अनुसार, केंद्रीय मंत्री से इस संबंध में सकारात्मक आश्वासन मिला है।
उन्होंने कहा कि चीनी की कीमत और बिक्री से जुड़ी व्यवस्था स्पष्ट होने के बाद गन्ने के भुगतान पर अंतिम फैसला लेना आसान होगा।
इसलिए राज्य सरकार फिलहाल निश्चित गन्ना मूल्य घोषित करने की स्थिति में नहीं है।
फसल सूखने की चिंता, कटाई जारी रखने की अपील
गन्ने की कीमत को लेकर विवाद के कारण कई क्षेत्रों में फसल की कटाई और चीनी मिलों में पेराई का काम प्रभावित हुआ है।
मिल संचालकों ने बैठक में चिंता जताई कि पेराई शुरू होने में देरी से खेतों में खड़ी गन्ने की फसल सूख सकती है।
इससे किसानों को उत्पादन और गुणवत्ता दोनों स्तरों पर नुकसान हो सकता है।
मुख्यमंत्री ने आंदोलन कर रहे किसानों से कटाई का काम जारी रखने की अपील की है।
उन्होंने कहा कि सरकार किसानों की मांगों पर बातचीत कर रही है और जल्द समाधान निकालने का प्रयास किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने किसानों को भरोसा दिलाया कि उनकी समस्याओं को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा।
किसानों को सीधे आर्थिक सहायता देना मुश्किल
मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने राज्य सरकार की वित्तीय स्थिति का भी उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में सरकार के लिए गन्ना किसानों को सीधे अतिरिक्त आर्थिक सहायता देना मुश्किल है।
हालांकि, सरकार किसानों की आजीविका की सुरक्षा के लिए हर संभव विकल्प तलाश रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि केवल राज्य सरकार पर पूरा आर्थिक बोझ डालना व्यावहारिक समाधान नहीं होगा।
इसलिए चीनी मिल मालिकों और केंद्र सरकार की भागीदारी भी जरूरी है।
उन्होंने जोर दिया कि किसानों को उचित कीमत दिलाने और चीनी उद्योग को आर्थिक रूप से सक्षम बनाए रखने के लिए सभी संबंधित पक्षों को मिलकर काम करना होगा।
दो दिन में अंतिम फैसला आने की उम्मीद
मुख्यमंत्री कार्यालय के अनुसार, किसान संगठनों और चीनी मिल संचालकों को प्रस्तावित व्यवस्था पर विचार करने के लिए दो दिन का समय दिया गया है।
इस अवधि में दोनों पक्ष आपसी चर्चा करके अपने अंतिम सुझाव सरकार के सामने रखेंगे।
मुख्यमंत्री ने संकेत दिया कि इसके बाद गन्ने की कीमत पर आगे का निर्णय लिया जाएगा।
हालांकि, बुधवार, 28 अक्टूबर तक उपलब्ध जानकारी के अनुसार, अंतिम मूल्य और समझौते की विस्तृत शर्तों की घोषणा नहीं हुई है।
इसलिए त्रिपक्षीय समझौते को अभी प्रस्तावित व्यवस्था के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
उत्तर कर्नाटक के किसानों को राहत मिलने की उम्मीद
कर्नाटक के बेलगावी, बागलकोट, विजयपुरा और आसपास के जिलों में बड़े पैमाने पर गन्ने की खेती होती है।
इन क्षेत्रों में गन्ना उत्पादन हजारों किसानों की आजीविका का प्रमुख आधार है।
गन्ने की कीमत को लेकर विवाद बढ़ने से किसान संगठनों ने विभिन्न स्थानों पर विरोध प्रदर्शन किए हैं।
राज्य सरकार का मानना है कि त्रिपक्षीय समझौते से किसानों और चीनी मिलों के बीच विवाद को बातचीत के जरिए हल करने में मदद मिल सकती है।
अब सभी की निगाहें केंद्र सरकार के निर्णय और किसान संगठनों की अगली बैठक पर टिकी हैं।
यदि तीनों पक्ष गन्ने की कीमत तथा भुगतान की शर्तों पर सहमति बना लेते हैं तो इससे किसानों को राहत मिल सकती है और चीनी मिलों में पेराई का काम सामान्य होने में मदद मिलेगी।
फिलहाल गन्ना मूल्य विवाद का अंतिम समाधान होना बाकी है।