हुब्बल्ली। कर्नाटक के व्यापारिक शहर हुब्बल्ली में पतंग उड़ाने के लिए इस्तेमाल होने वाला खतरनाक मांझा लोगों की जान के लिए खतरा बनता जा रहा है। शहर में मांझे की चपेट में आने से एक महिला की मौत के बाद अब एक युवक के गंभीर रूप से घायल होने का मामला सामने आया है। लगातार हो रही इन घटनाओं से लोगों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। ताजा घटना शहर के उनाक्कल इलाके की बताई जा रही है, जहां बुधवार शाम एक युवक के चेहरे पर अचानक मांझा फंस गया। इससे उसके चेहरे, नाक और आंखों के आसपास गंभीर चोटें आई हैं।

इस घटना ने एक बार फिर सार्वजनिक स्थानों पर खतरनाक मांझे के इस्तेमाल और उसकी बिक्री को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। सड़कों पर आवागमन करने वाले लोग विशेष रूप से इसकी चपेट में आ सकते हैं। पतंग उड़ाने के दौरान हवा में लटकने वाला मांझा कई बार इतना पतला होता है कि सामने से आने वाले व्यक्ति को दिखाई भी नहीं देता। ऐसे में तेज रफ्तार से गुजरने वाले दोपहिया वाहन चालकों और राहगीरों के लिए यह गंभीर खतरा बन सकता है।

बुधवार शाम उनाक्कल इलाके में हुआ हादसा

प्राप्त जानकारी के अनुसार, बुधवार शाम हुब्बल्ली के उनाक्कल क्षेत्र में एक युवक अचानक पतंग के मांझे की चपेट में आ गया। मांझा उसके चेहरे से टकराया और नाक तथा आंखों के आसपास के हिस्से में चोटें आईं।

बताया जा रहा है कि युवक गंभीर रूप से घायल हुआ है। हालांकि, उसकी पहचान, उपचार की स्थिति और घटना की विस्तृत परिस्थितियों के बारे में पूरी आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।

चेहरे और आंखों के आसपास मांझे से लगने वाली चोटें विशेष रूप से खतरनाक हो सकती हैं। ऐसी स्थिति में आंखों की रोशनी प्रभावित होने, त्वचा पर गहरे घाव बनने और अत्यधिक रक्तस्राव जैसी समस्याओं का खतरा रहता है।

महिला की मौत के बाद दूसरी घटना से बढ़ी चिंता

हुब्बल्ली में मांझे से जुड़ी यह पहली गंभीर घटना नहीं है। इससे पहले एक महिला की गर्दन में मांझा फंसने के कारण मौत हो गई थी। महिला की मौत के बाद अब युवक के घायल होने की खबर ने शहर में सार्वजनिक सुरक्षा के मुद्दे को फिर चर्चा में ला दिया है।

इन घटनाओं से स्पष्ट होता है कि पतंग उड़ाने के दौरान इस्तेमाल होने वाला धारदार मांझा केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि सड़क पर चलने वाले आम लोगों के लिए भी घातक साबित हो सकता है।

खासतौर पर गर्दन, चेहरे और आंखों पर मांझा लगने से गंभीर चोटें आ सकती हैं। दोपहिया वाहन चलाने वाले लोग इस तरह की घटनाओं में अधिक जोखिम का सामना कर सकते हैं, क्योंकि खुले वाहन में उनके शरीर का ऊपरी हिस्सा सीधे मांझे की चपेट में आ सकता है।

मृतक महिला की पहचान विद्या गौड़र के रूप में हुई

जानकारी के मुताबिक, मांझे से जान गंवाने वाली महिला की पहचान 38 वर्षीय विद्या मंजुनाथ गौड़र के रूप में हुई है। वह एक अस्पताल में लैब टेक्नीशियन के पद पर कार्यरत थीं। गुरुवार, 22 अक्टूबर को वह दोपहिया वाहन से जा रही थीं, तभी कारवार रोड पर शिवशंकर कॉलोनी के पास मांझा उनकी गर्दन में फंस गया।

मांझे से गर्दन पर गहरा घाव होने के कारण वह वाहन से गिर गईं और अत्यधिक रक्तस्राव से उनकी मौत हो गई। घटना के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की।

खतरनाक मांझे की बिक्री पर सख्ती

महिला की मौत के बाद हुब्बल्ली-धारवाड़ पुलिस ने प्रतिबंधित मांझे की बिक्री और इस्तेमाल के खिलाफ कार्रवाई तेज करने की बात कही है। पुलिस आयुक्त भूषण गुलाबराव बोरसे ने स्पष्ट किया कि खतरनाक मांझा बेचने और इस्तेमाल करने वालों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज किए जाएंगे।

पुलिस ने विभिन्न थाना क्षेत्रों में प्रतिबंधित मांझे की पहचान और जब्ती के लिए टीमें भी गठित की हैं। अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि वे इस तरह के मांझे का उपयोग न करें और इसकी बिक्री या इस्तेमाल की जानकारी पुलिस को दें।

चाइनीज मांझा क्यों है खतरनाक?

चाइनीज मांझे में सामान्य सूती धागे की जगह नायलॉन या अन्य सिंथेटिक सामग्री का इस्तेमाल किया जाता है। कई प्रकार के धारदार मांझे पर कांच के महीन चूर्ण और धातु के कणों की परत चढ़ाई जाती है, जिससे उसकी धार बढ़ जाती है।

यही धार किसी व्यक्ति की गर्दन, चेहरे या शरीर के दूसरे हिस्से से टकराने पर गंभीर घाव पैदा कर सकती है। इसके अलावा पक्षियों के लिए भी यह मांझा घातक साबित होता है। पेड़ों और बिजली के तारों में उलझा हुआ मांझा लंबे समय तक लोगों के लिए खतरा बना रह सकता है।

लोगों की सुरक्षा के लिए जागरूकता जरूरी

हुब्बल्ली में सामने आई घटनाओं ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि प्रतिबंध के बावजूद खतरनाक मांझा लोगों तक कैसे पहुंच रहा है। इसकी रोकथाम के लिए बिक्री पर निगरानी के साथ-साथ नागरिकों में जागरूकता बढ़ाना भी आवश्यक है।

विशेषज्ञों के अनुसार, सड़क पर दोपहिया वाहन चलाते समय हेलमेट और अन्य सुरक्षा उपकरणों का इस्तेमाल चोट की गंभीरता कम करने में सहायक हो सकता है। हालांकि, धारदार मांझे से पूरी सुरक्षा के लिए उसका इस्तेमाल रोकना ही सबसे महत्वपूर्ण उपाय है।

महिला की मौत और उनाक्कल इलाके में युवक के घायल होने की घटना ने एक बार फिर स्पष्ट कर दिया है कि मनोरंजन के लिए इस्तेमाल की जाने वाली खतरनाक सामग्री दूसरों की जान पर भारी पड़ सकती है। ऐसे में प्रशासन की सख्ती के साथ नागरिकों की जिम्मेदारी भी जरूरी है।

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