मैसूर। कर्नाटक के ऐतिहासिक मैसूर दशहरा महोत्सव के दौरान पारंपरिक 'जट्टी कलागा' प्रतियोगिता रद्द होने के बाद विवाद बढ़ता जा रहा है। इस बीच मैसूर-कोडगु के सांसद और पूर्व मैसूर राजपरिवार के सदस्य यदुवीर कृष्णदत्त चामराजा वोडेयार ने मामले पर महत्वपूर्ण बयान दिया है। उन्होंने कहा कि विजय यात्रा का निर्धारित समय होने के कारण राजपरिवार को आगे बढ़ना पड़ा, लेकिन जट्टी कलागा प्रतियोगिता आखिर किस वजह से रद्द हुई, इसकी पूरी जानकारी उन्हें भी नहीं है। सांसद ने दशहरा महोत्सव की व्यवस्थाओं में सुधार की जरूरत बताते हुए कर्नाटक सरकार से सभी धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों के लिए स्पष्ट आधिकारिक प्रोटोकॉल तैयार करने की मांग की है।

शुक्रवार, 23 अक्टूबर को मैसूर में पत्रकारों से बातचीत के दौरान सांसद यदुवीर ने कहा कि इस वर्ष दशहरा महोत्सव के कुछ कार्यक्रम सफल रहे, लेकिन कई व्यवस्थाओं में कमियां भी सामने आईं। उन्होंने विशेष रूप से प्रवेश पास वितरण, सुरक्षा प्रबंधन, पुलिसकर्मियों के व्यवहार और नंदी ध्वज पूजा से जुड़े प्रोटोकॉल को लेकर सवाल उठाए। सांसद ने कहा कि भविष्य में ऐसी समस्याओं से बचने के लिए सरकार को स्पष्ट नियम निर्धारित करने चाहिए।

विजय यात्रा का समय होने के कारण आगे बढ़ा राजपरिवार

सांसद यदुवीर कृष्णदत्त चामराजा वोडेयार ने बताया कि विजयादशमी के अवसर पर पारंपरिक जट्टी कलागा प्रतियोगिता का आयोजन निर्धारित समय में होना था।

उन्होंने कहा कि सुबह 9:30 बजे से 10:10 बजे के बीच इस प्रतियोगिता को संपन्न कराया जाना था। हालांकि, निर्धारित समय तक आयोजन शुरू नहीं हो सका।

यदुवीर के अनुसार, राजपरिवार की विजय यात्रा का समय नजदीक आ गया था, इसलिए उन्हें अपने अगले धार्मिक अनुष्ठान के लिए आगे बढ़ना पड़ा।

उन्होंने स्पष्ट किया कि जट्टी कलागा रद्द होने की वास्तविक वजह के बारे में उनके पास पूरी जानकारी नहीं है।

सांसद ने कहा कि मामले की विस्तृत रिपोर्ट मिलने के बाद ही वह इस संबंध में आगे टिप्पणी करेंगे।

पुलिस पर पहलवानों को प्रवेश नहीं देने का आरोप

मैसूर दशहरा महोत्सव में जट्टी कलागा एक महत्वपूर्ण पारंपरिक आयोजन माना जाता है। इसमें प्रशिक्षित पहलवान विशेष प्रकार की कुश्ती का प्रदर्शन करते हैं।

इस वर्ष प्रतियोगिता रद्द होने के बाद पहलवानों ने पुलिस व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं।

पहलवानों का आरोप है कि उनके पास वैध प्रवेश पास होने के बावजूद पुलिसकर्मियों ने उन्हें समय पर महल परिसर में प्रवेश नहीं करने दिया।

उनका कहना है कि प्रतियोगिता शुरू होने से पहले धार्मिक अनुष्ठान और अन्य तैयारियों के लिए लगभग डेढ़ घंटे का समय आवश्यक होता है।

प्रवेश में देरी होने के कारण निर्धारित मुहूर्त निकल गया और प्रतियोगिता आयोजित नहीं हो सकी।

हालांकि, इन आरोपों के संबंध में पुलिस की अंतिम जांच रिपोर्ट सामने नहीं आई है।

दशहरा आयोजन में अभी और सुधार की जरूरत

सांसद यदुवीर ने कहा कि मैसूर दशहरा महोत्सव के आयोजन में कुछ सकारात्मक बदलाव जरूर हुए हैं, लेकिन अभी भी कई व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने की आवश्यकता है।

उन्होंने बताया कि आयोजन से पहले हुई बैठकों में राजपरिवार की ओर से प्रशासन को कुछ महत्वपूर्ण सुझाव दिए गए थे।

इनमें प्रवेश पास वितरण को पारदर्शी बनाना, बैठने की क्षमता के अनुसार पास जारी करना और पुलिसकर्मियों को उचित प्रशिक्षण देना शामिल था।

सांसद के अनुसार, इनमें से कई सुझावों को पूरी तरह लागू नहीं किया गया।

उन्होंने कहा कि दशहरा जैसे बड़े आयोजन में प्रशासनिक व्यवस्था स्पष्ट होनी चाहिए, ताकि श्रद्धालुओं, कलाकारों और अतिथियों को अनावश्यक परेशानियों का सामना न करना पड़े।

नंदी ध्वज पूजा के प्रोटोकॉल पर उठाए सवाल

यदुवीर ने दशहरा महोत्सव की पारंपरिक नंदी ध्वज पूजा से जुड़े प्रोटोकॉल को लेकर भी अपनी बात रखी।

उन्होंने कहा कि इस आयोजन में किस व्यक्ति की क्या भूमिका होगी और किसे किस प्रकार की अनुमति दी जाएगी, इसे लेकर स्पष्ट आधिकारिक व्यवस्था होनी चाहिए।

सांसद ने कहा कि उन्हें भी वर्तमान प्रोटोकॉल के सभी नियमों की स्पष्ट जानकारी नहीं है।

उन्होंने सरकार से मांग की कि नंदी ध्वज पूजा सहित अन्य प्रमुख आयोजनों के लिए लिखित नियमावली तैयार की जाए।

उनके अनुसार, यदि सरकार आधिकारिक प्रोटोकॉल सार्वजनिक करती है, तो संबंधित पक्ष उसे स्वीकार करके भविष्य में उसी के अनुरूप व्यवस्था कर सकेंगे।

इससे हर वर्ष होने वाले विवादों और गलतफहमियों को कम करने में मदद मिल सकती है।

प्रवेश पास वितरण में गड़बड़ी का आरोप

सांसद ने दशहरा महोत्सव के दौरान प्रवेश पास जारी करने की व्यवस्था पर भी नाराजगी व्यक्त की।

उन्होंने कहा कि आयोजन स्थल पर जितनी सीटें उपलब्ध हों, उतनी ही संख्या में प्रवेश पास जारी किए जाने चाहिए।

सांसद के अनुसार, इस संबंध में पहले भी सुझाव दिए गए थे, लेकिन उनका पर्याप्त पालन नहीं हुआ।

उन्होंने आरोप लगाया कि पास वितरण में पारदर्शिता की कमी के कारण कई लोगों को परेशानी हुई।

सांसद ने कहा कि यह समस्या केवल इस वर्ष की नहीं है, बल्कि पिछले आयोजनों के दौरान भी इस तरह की शिकायतें सामने आती रही हैं।

उन्होंने भविष्य में पास वितरण के लिए व्यवस्थित और पारदर्शी प्रक्रिया लागू करने की आवश्यकता बताई।

पुलिसकर्मियों को विशेष प्रशिक्षण देने की मांग

यदुवीर वोडेयार ने दशहरा महोत्सव की सुरक्षा व्यवस्था में तैनात पुलिसकर्मियों के प्रशिक्षण को लेकर भी सवाल उठाए।

उन्होंने कहा कि आयोजन के दौरान दूसरे स्थानों से पुलिसकर्मियों को ड्यूटी पर बुलाया जाता है।

ऐसे कर्मचारियों को स्थानीय धार्मिक परंपराओं, राजपरिवार के अनुष्ठानों और आयोजन की विशेष व्यवस्थाओं की पर्याप्त जानकारी नहीं होती।

इस कारण कई बार अनावश्यक भ्रम और विवाद की स्थिति बन जाती है।

सांसद ने कहा कि दशहरा ड्यूटी पर तैनात किए जाने वाले पुलिसकर्मियों को पहले से प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए।

इसके अलावा मीडिया प्रतिनिधियों के लिए भी अलग प्रोटोकॉल तैयार करने की मांग की गई है।

उन्होंने कहा कि पत्रकारों को कार्यक्रम से पहले आवश्यक जानकारी दी जानी चाहिए, ताकि आयोजन के दौरान किसी तरह की अव्यवस्था न हो।

पत्रकारों और बच्ची से मारपीट की घटना की निंदा

सांसद यदुवीर ने दशहरा महोत्सव के दौरान पत्रकारों और एक बच्ची के साथ कथित मारपीट की घटनाओं की भी निंदा की।

उन्होंने कहा कि इस तरह की घटनाएं किसी भी परिस्थिति में नहीं होनी चाहिए।

सांसद के अनुसार, उन्होंने घायल बच्ची के परिजनों से बातचीत की है।

उन्होंने बताया कि बच्ची के उपचार का खर्च फिलहाल कॉर्पोरेट सामाजिक दायित्व यानी सीएसआर निधि से उठाया जा रहा है।

हालांकि, यदुवीर ने मांग की कि राज्य सरकार को स्वयं बच्ची के इलाज की जिम्मेदारी उठानी चाहिए।

उन्होंने कहा कि बड़े सार्वजनिक आयोजनों में आम लोगों और मीडिया प्रतिनिधियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी है।

मुख्यमंत्री ने भी दिए जांच के आदेश

दशहरा महोत्सव के दौरान नंदी ध्वज पूजा में प्रवेश व्यवस्था को लेकर हुए विवाद के बाद मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने जांच के आदेश दिए हैं।

रिपोर्टों के अनुसार, कुछ मंत्रियों को आयोजन स्थल में प्रवेश करने से रोके जाने की शिकायत सामने आई थी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि संबंधित घटना की जांच कराई जाएगी।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार ने राजपरिवार के सम्मान और परंपराओं का ध्यान रखते हुए दशहरा महोत्सव आयोजित किया।

वहीं, सांसद यदुवीर का कहना है कि राजनीतिक मतभेदों से अलग हटकर आयोजन में सुधार पर ध्यान दिया जाना चाहिए।

अगले साल के दशहरे के लिए बेहतर तैयारी पर जोर

मैसूर दशहरा कर्नाटक के सबसे महत्वपूर्ण सांस्कृतिक और धार्मिक आयोजनों में शामिल है। इसमें बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिकों के साथ देश-विदेश से पर्यटक भी शामिल होते हैं।

ऐसे आयोजन में सुरक्षा, यातायात, प्रवेश व्यवस्था और धार्मिक अनुष्ठानों के बीच बेहतर तालमेल आवश्यक होता है।

सांसद यदुवीर ने कहा कि दशहरा महोत्सव कुछ मामलों में सफल रहा, लेकिन व्यवस्थागत कमियों को दूर करना जरूरी है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य केवल विरोध करना नहीं, बल्कि भविष्य में आयोजन को बेहतर बनाना है।

फिलहाल जट्टी कलागा रद्द होने की वास्तविक परिस्थितियों और आयोजन के दौरान सामने आई प्रशासनिक समस्याओं को लेकर विस्तृत रिपोर्ट का इंतजार है। सांसद ने उम्मीद जताई कि सरकार आने वाले वर्षों में स्पष्ट प्रोटोकॉल और बेहतर समन्वय के साथ दशहरा महोत्सव आयोजित करेगी।

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