बेलगावी। उत्तरी कर्नाटक में गन्ने के समर्थन मूल्य को लेकर किसानों का विरोध प्रदर्शन तेज होता जा रहा है। अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे किसान संगठनों ने राज्य सरकार को अंतिम समय-सीमा देते हुए चेतावनी दी है कि यदि उनकी समस्याओं का समाधान नहीं किया गया, तो 27 अक्टूबर को पूरे कर्नाटक में बंद का आयोजन किया जाएगा। किसान संगठनों ने 26 अक्टूबर को बेलगावी में प्रस्तावित उच्चस्तरीय बैठक से पहले सरकार के सामने तीन प्रमुख मांगें रखने की बात कही है। किसानों का कहना है कि वे अपनी उपज का उचित मूल्य चाहते हैं और इसके लिए लंबे समय से आवाज उठा रहे हैं। अब उनकी नजर सरकार के साथ होने वाली बैठक पर टिकी है।
26 अक्टूबर की बैठक पर टिकी किसानों की उम्मीदें
जानकारी के अनुसार, गन्ना किसानों की समस्याओं पर चर्चा करने के लिए 26 अक्टूबर को बेलगावी में एक उच्चस्तरीय बैठक प्रस्तावित है। किसान संगठनों को उम्मीद है कि इस बैठक में उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय लिया जाएगा।
कर्नाटक रैथा संघ ग्रीन आर्मी के महासचिव प्रेम चौगुला ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि किसान संगठनों को सरकार के साथ होने वाली बैठक से काफी उम्मीदें हैं। उन्होंने बताया कि बैठक में किसानों की तीन प्रमुख मांगों को सामने रखा जाएगा।
हालांकि, उपलब्ध जानकारी में इन तीनों मांगों का पूरा विवरण स्पष्ट नहीं किया गया है। आंदोलन का मुख्य मुद्दा गन्ने का उचित समर्थन मूल्य बताया जा रहा है।
किसान संगठनों का कहना है कि बैठक में उनकी समस्याओं का संतोषजनक समाधान नहीं निकलने पर आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।
27 अक्टूबर को राज्यव्यापी बंद की चेतावनी
किसान संगठनों ने सरकार को स्पष्ट संदेश दिया है कि 26 अक्टूबर की बैठक उनके लिए बेहद महत्वपूर्ण है। यदि बैठक में मांगों को लेकर कोई ठोस समाधान नहीं निकलता है, तो अगले ही दिन यानी 27 अक्टूबर को राज्यव्यापी बंद आयोजित किया जाएगा।
इस चेतावनी के बाद राज्य में किसानों के आंदोलन को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक गतिविधियां तेज होने की संभावना है।
राज्यव्यापी बंद की स्थिति में विभिन्न क्षेत्रों में जनजीवन और व्यापारिक गतिविधियों पर असर पड़ सकता है। हालांकि, बंद में कौन-कौन से संगठन शामिल होंगे और किन क्षेत्रों में इसका प्रभाव रहेगा, इसकी विस्तृत जानकारी अभी सामने नहीं आई है।
गन्ने के उचित मूल्य को लेकर किसानों में नाराजगी
उत्तरी कर्नाटक गन्ना उत्पादन के महत्वपूर्ण क्षेत्रों में शामिल है। यहां बड़ी संख्या में किसानों की आजीविका गन्ने की खेती और उससे जुड़ी गतिविधियों पर निर्भर करती है।
गन्ने की खेती में सिंचाई, खाद, मजदूरी, परिवहन और अन्य कृषि कार्यों पर काफी खर्च आता है। किसानों का कहना है कि उनकी उपज का मूल्य उत्पादन लागत और आर्थिक जरूरतों के अनुरूप होना चाहिए।
गन्ने की कीमत तय करने की व्यवस्था में केंद्र सरकार द्वारा घोषित उचित एवं लाभकारी मूल्य (एफआरपी) महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसके अतिरिक्त राज्य स्तर पर किसानों की मांगों और चीनी मिलों से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा होती रहती है।
ऐसे में गन्ने के मूल्य को लेकर किसानों और सरकार के बीच बातचीत का महत्व बढ़ जाता है।
किसानों की तीन प्रमुख मांगें सामने आईं
प्रेम चौगुला के अनुसार, किसानों की पहली मांग राज्य सरकार की ओर से प्रति टन गन्ने पर 1,000 रुपये का अतिरिक्त समर्थन है। दूसरी मांग चीनी मिलों से प्रति टन 4,500 रुपये का मूल्य दिलाने की है।
तीसरी मांग गन्ने की तौल के दौरान कचरे या अन्य अशुद्धियों के नाम पर कथित अनुचित कटौती को रोकने की है। किसानों का आरोप है कि ऐसी कटौतियों से उनकी वास्तविक कमाई प्रभावित होती है।
चीनी मिलों और किसानों के बीच मूल्य का विवाद
गन्ना उत्पादक किसानों की समस्याएं केवल फसल के मूल्य तक सीमित नहीं हैं। किसानों की मांग है कि चीनी मिलों से भुगतान में पारदर्शिता हो और उपज का उचित मूल्य समय पर मिले।
इस बीच किसान संगठनों ने चीनी के न्यूनतम बिक्री मूल्य को बढ़ाने और एथेनॉल खरीद नीति में बदलाव की मांग भी उठाई है। किसानों का मानना है कि चीनी उद्योग की आर्थिक स्थिति में सुधार होने से गन्ना उत्पादकों को बेहतर भुगतान मिल सकेगा।
केंद्र और राज्य सरकारों के स्तर पर इन मुद्दों पर अलग-अलग फैसलों की जरूरत पड़ सकती है।
कई जिलों के किसान आंदोलन में शामिल
बेलगावी, बागलकोट, विजयपुरा, हुबली-धारवाड़ और हावेरी सहित उत्तरी कर्नाटक के कई क्षेत्रों में किसान गन्ने के मूल्य को लेकर अपनी मांगें उठा रहे हैं।
इससे पहले 17 अक्टूबर को भी किसानों ने केंद्र और राज्य सरकारों के सामने अपनी समस्याएं रखी थीं। बेलगावी के उपायुक्त मोहम्मद रोशन ने बताया था कि दोनों सरकारों की ओर से किसानों के हित में निर्णय लेने का आश्वासन दिया गया है।
सरकार ने बातचीत से समाधान निकालने का दिया भरोसा
मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने 22 अक्टूबर को बताया था कि गन्ना उत्पादकों और चीनी मिल मालिकों के साथ 26 अक्टूबर को बेलगावी में बैठक होगी।
उन्होंने कहा कि गन्ना किसानों की समस्याएं केवल कर्नाटक तक सीमित नहीं हैं। इनके समाधान के लिए केंद्र सरकार की भागीदारी भी जरूरी है। केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी के साथ अलग से केंद्रीय स्तर पर चर्चा करने की बात भी सामने आई है।
26 अक्टूबर की बैठक होगी निर्णायक
अब किसानों की नजर 26 अक्टूबर की बैठक पर है। किसान संगठन चाहते हैं कि सरकार केवल आश्वासन देने के बजाय उनकी मांगों पर ठोस निर्णय ले।
यदि बैठक में संतोषजनक समाधान नहीं निकलता है, तो 27 अक्टूबर को राज्यव्यापी बंद की चेतावनी दी गई है।
हालांकि, फिलहाल बंद का आयोजन तय नहीं हुआ है। यह सरकार के साथ बातचीत के परिणाम पर निर्भर करेगा। किसानों और चीनी मिलों के बीच सहमति बनने से आंदोलन टल सकता है, जबकि मांगों पर गतिरोध जारी रहने से विरोध प्रदर्शन और तेज हो सकता है।