मैसूर : कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार की पत्नी उषा शिवकुमार ने शुक्रवार को मैसूर की प्रसिद्ध चामुंडी पहाड़ियों पर पहुंचकर देवी चामुंडेश्वरी की पूजा-अर्चना की और अपनी पुरानी मन्नत पूरी की। आषाढ़ महीने के पहले शुक्रवार के शुभ अवसर पर उन्होंने देवी को विशेष साड़ी अर्पित की।
बताया जा रहा है कि उषा शिवकुमार ने पहले यह मन्नत मांगी थी कि यदि उनके पति डी.के. शिवकुमार राज्य के मुख्यमंत्री बनते हैं, तो वह देवी चामुंडेश्वरी को साड़ी भेंट करेंगी। इसी संकल्प को पूरा करने के लिए वह चामुंडी पहाड़ियों स्थित मंदिर पहुंचीं और धार्मिक परंपरा के अनुसार पूजा-अर्चना की।
चामुंडी पहाड़ी स्थित प्रसिद्ध चामुंडेश्वरी मंदिर कर्नाटक के सबसे प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक है। यहां सालभर बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। विशेष रूप से आषाढ़ महीने के शुक्रवार को मंदिर में भक्तों की भारी भीड़ रहती है और देवी की विशेष पूजा आयोजित की जाती है।
उषा शिवकुमार ने मंदिर में देवी के दर्शन किए और विधि-विधान से पूजा संपन्न कराई। इस दौरान उन्होंने देवी को साड़ी अर्पित की और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की।
डी.के. शिवकुमार और उनका परिवार लंबे समय से धार्मिक आस्था के लिए जाना जाता है। राजनीतिक जीवन में कई महत्वपूर्ण मौकों पर शिवकुमार मंदिरों में जाकर पूजा-अर्चना करते रहे हैं। उनके समर्थकों का मानना है कि वे कठिन परिस्थितियों और राजनीतिक चुनौतियों के समय आध्यात्मिक शक्ति और ईश्वर के आशीर्वाद में विश्वास रखते हैं।
कर्नाटक की राजनीति में डी.के. शिवकुमार एक प्रमुख चेहरा हैं। कांग्रेस संगठन में उनकी अहम भूमिका रही है और राज्य की राजनीति में उनका प्रभाव लंबे समय से देखा जाता रहा है। ऐसे में उनके परिवार द्वारा की गई धार्मिक गतिविधियां भी अक्सर चर्चा में रहती हैं।
आषाढ़ महीने के पहले शुक्रवार को चामुंडी मंदिर में विशेष धार्मिक माहौल रहा। मंदिर परिसर को फूलों से सजाया गया था और सुबह से ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु देवी के दर्शन के लिए पहुंचे। इसी अवसर पर उषा शिवकुमार ने भी मंदिर पहुंचकर अपनी मन्नत पूरी की।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, देवी चामुंडेश्वरी को मैसूर की अधिष्ठात्री देवी माना जाता है। मैसूर राजघराने की भी देवी चामुंडेश्वरी में गहरी आस्था रही है। यहां होने वाली पूजा और धार्मिक आयोजन कर्नाटक की सांस्कृतिक परंपराओं का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।
उषा शिवकुमार के मंदिर पहुंचने के दौरान सुरक्षा और व्यवस्थाओं का भी ध्यान रखा गया। मंदिर प्रशासन की ओर से पूजा की व्यवस्था की गई। उन्होंने शांतिपूर्ण तरीके से दर्शन कर धार्मिक अनुष्ठान पूरा किया।
मन्नत पूरी करने की परंपरा भारतीय धार्मिक संस्कृति में लंबे समय से चली आ रही है। श्रद्धालु अपनी मनोकामना पूरी होने पर मंदिरों में जाकर पूजा, दान या विशेष भेंट अर्पित करते हैं। उषा शिवकुमार द्वारा देवी को साड़ी अर्पित करना भी इसी परंपरा का हिस्सा माना जा रहा है।
इस मौके पर उनके साथ परिवार के अन्य सदस्य और समर्थक भी मौजूद रहे। पूजा के बाद उन्होंने देवी का आशीर्वाद लिया और राज्य तथा लोगों की भलाई की प्रार्थना की।
चामुंडी पहाड़ियों पर आषाढ़ शुक्रवार के अवसर पर पहले से ही उत्सव जैसा माहौल था। ऐसे में उषा शिवकुमार की यात्रा और मन्नत पूरी करने की खबर ने लोगों का ध्यान आकर्षित किया।
राजनीतिक जीवन और धार्मिक आस्था का जुड़ाव भारतीय समाज में अक्सर देखने को मिलता है। नेता और उनके परिवार शुभ अवसरों पर मंदिरों में जाकर पूजा-अर्चना करते हैं। डी.के. शिवकुमार का परिवार भी इसी परंपरा का पालन करता रहा है।
उषा शिवकुमार की यह धार्मिक यात्रा ऐसे समय में हुई है, जब कर्नाटक की राजनीति में डी.के. शिवकुमार एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। उनकी पत्नी द्वारा देवी चामुंडेश्वरी को साड़ी अर्पित करने की घटना अब राजनीतिक और धार्मिक दोनों ही दृष्टिकोण से चर्चा में है।