थ्रिक्कोडिथानम पंचायत में जंगली सूअरों का आतंक, किसानों की फसलें बर्बाद
कोट्टायम/केरल: थ्रिक्कोडिथानम पंचायत क्षेत्र में जंगली सूअरों के हमलों की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। जंगलों और आबादी वाले इलाकों के बीच बढ़ती आवाजाही के कारण किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। कई इलाकों में जंगली सूअरों के झुंड खेतों में घुसकर फसलों को नष्ट कर रहे हैं, जिससे किसानों में चिंता बढ़ गई है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, मडाप्पल्ली और थ्रिक्कोडिथानम पंचायतों से सटे कई क्षेत्रों में जंगली सूअरों का सबसे अधिक आतंक देखा जा रहा है। अमारा, प्लानथोट्टम चेम्बुपुरम, किझाकेकुन्नु और वालोलिकल जैसे इलाकों में किसानों को बार-बार नुकसान का सामना करना पड़ रहा है।
किसानों का कहना है कि रात के समय जंगली सूअरों के झुंड खेतों में पहुंच जाते हैं और कुछ ही समय में महीनों की मेहनत को बर्बाद कर देते हैं। फसलों के नुकसान के साथ-साथ किसानों की आर्थिक परेशानी भी बढ़ रही है।
80 एकड़ खेत को जंगली सूअरों ने किया नुकसान
थ्रिक्कोडिथानम पंचायत की वार्ड 12 सदस्य शर्ली हरिकृष्णन के 80 एकड़ के धान और अदरक के खेत को जंगली सूअरों के झुंड ने भारी नुकसान पहुंचाया है। बताया जा रहा है कि खेत में लगी फसल को जंगली जानवरों ने रौंद दिया, जिससे बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ।
शर्ली हरिकृष्णन का खेत क्षेत्र के बड़े कृषि क्षेत्रों में शामिल है। इतनी बड़ी जमीन पर फसल नष्ट होने से किसानों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।
स्थानीय किसानों का कहना है कि यह पहली बार नहीं है जब इस तरह का हमला हुआ है। पिछले कुछ समय से जंगली सूअरों की गतिविधियां बढ़ गई हैं और कई किसान अपनी फसल बचाने के लिए रात में भी खेतों की निगरानी करने को मजबूर हैं।
कई किसानों की फसलें हुईं बर्बाद
हाल ही में जंगली सूअरों के हमले में चेरुवुपापरम्पिल के थंगाचन और करीमुट्टम क्षेत्र के दिलीप कुमार के खेत भी प्रभावित हुए हैं। इन किसानों की फसलों को भी काफी नुकसान पहुंचा है।
किसानों का कहना है कि खेती में बीज, खाद, मजदूरी और सिंचाई पर काफी खर्च होता है। जब तैयार फसल जंगली जानवरों के कारण नष्ट हो जाती है तो उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है।
कई किसानों ने प्रशासन से मुआवजे और जंगली सूअरों के नियंत्रण के लिए प्रभावी कदम उठाने की मांग की है।
किसानों में बढ़ रही असुरक्षा की भावना
जंगली सूअरों के लगातार हमलों के कारण ग्रामीण इलाकों में रहने वाले किसानों में डर का माहौल है। लोगों का कहना है कि पहले जहां जंगली जानवरों की आवाजाही सीमित क्षेत्रों तक थी, अब वे रिहायशी और कृषि क्षेत्रों तक पहुंच रहे हैं।
किसानों के अनुसार, फसलों को बचाने के लिए लगाए गए अस्थायी उपाय भी कई बार कारगर साबित नहीं होते। जंगली सूअरों के झुंड बड़ी संख्या में आते हैं और खेतों को नुकसान पहुंचाकर चले जाते हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि केवल नुकसान के बाद मुआवजा देने से समस्या का समाधान नहीं होगा। इसके लिए जंगली जानवरों की आवाजाही रोकने और स्थायी सुरक्षा व्यवस्था बनाने की जरूरत है।
प्रशासन से कार्रवाई की मांग
किसानों और स्थानीय निवासियों ने वन विभाग और पंचायत प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि जंगली सूअरों को नियंत्रित करने के लिए प्रभावी योजना बनाई जानी चाहिए।
लोगों की मांग है कि प्रभावित किसानों को जल्द मुआवजा दिया जाए और ऐसे कदम उठाए जाएं जिससे भविष्य में फसलों को नुकसान से बचाया जा सके।
किसानों का कहना है कि अगर समस्या का समाधान जल्द नहीं किया गया तो खेती करना मुश्किल हो जाएगा। पहले से ही मौसम और बाजार की चुनौतियों से जूझ रहे किसानों के लिए जंगली जानवरों का खतरा एक और बड़ी परेशानी बन गया है।
खेती पर बढ़ता दबाव
केरल के कई ग्रामीण क्षेत्रों में जंगली जानवरों और मानव आबादी के बीच टकराव की घटनाएं बढ़ रही हैं। जंगलों के आसपास रहने वाले किसानों को अक्सर ऐसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
थ्रिक्कोडिथानम पंचायत में भी यही स्थिति देखने को मिल रही है। किसान चाहते हैं कि प्रशासन, वन विभाग और स्थानीय निकाय मिलकर ऐसी व्यवस्था तैयार करें, जिससे इंसानों और वन्यजीवों के बीच संघर्ष कम हो सके।
फिलहाल जंगली सूअरों के हमलों से प्रभावित किसान मदद और समाधान की उम्मीद लगाए बैठे हैं। आने वाले दिनों में प्रशासन इस समस्या से निपटने के लिए क्या कदम उठाता है, इस पर स्थानीय लोगों की नजर बनी हुई है।