जबलपुर। मध्य प्रदेश के जबलपुर स्थित नेताजी सुभाष चंद्र बोस सेंट्रल जेल में बंद 18 कैदियों के लिए इस बार का स्वतंत्रता दिवस नई उम्मीद और नई शुरुआत लेकर आया। आजादी के पर्व के मौके पर अच्छे आचरण और निर्धारित नियमों को पूरा करने वाले कैदियों को सरकार की सजा में छूट नीति के तहत रिहा किया गया। जेल से बाहर निकलते समय कैदियों के चेहरों पर खुशी और भावुकता साफ नजर आई।

रिहा किए गए कैदियों में 17 पुरुष और एक महिला शामिल हैं। ये सभी कैदी उम्रकैद की सजा काट रहे थे। लंबे समय तक जेल में रहने के बाद स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर उन्हें समाज में दोबारा लौटने का अवसर मिला। जेल प्रशासन ने बताया कि इन कैदियों का व्यवहार जेल में संतोषजनक रहा और उन्होंने सुधार की दिशा में अच्छा प्रयास किया।

मध्य प्रदेश सरकार की सजा में छूट की नीति के तहत उन कैदियों को रिहाई का लाभ दिया गया, जिन्होंने जेल में अच्छा आचरण बनाए रखा और अपनी सजा की निर्धारित अवधि पूरी कर ली थी। इसी नीति के तहत जबलपुर सेंट्रल जेल से 18 कैदियों को स्वतंत्रता दिवस के दिन रिहा किया गया।

जेल अधीक्षक अखिलेश तोमर के अनुसार, रिहा किए गए सभी कैदियों ने जेल में 14 वर्ष की अवधि पूरी कर ली थी। इसके बाद सरकार की नीति के तहत उन्हें छह वर्ष की अतिरिक्त छूट प्रदान की गई। इस तरह उन्होंने कुल 20 वर्ष की सजा अवधि पूरी मानी गई और वे रिहाई के पात्र हो गए।

उन्होंने बताया कि कैदियों की रिहाई से पहले सभी आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी की गईं। उनके रिकॉर्ड, व्यवहार और अन्य मानकों की जांच के बाद ही उन्हें रिहाई का लाभ दिया गया। जेल प्रशासन का उद्देश्य केवल सजा देना नहीं, बल्कि कैदियों में सुधार की भावना पैदा करना भी है, ताकि वे समाज में वापस लौटकर सामान्य जीवन जी सकें।

रिहा होने वाले कैदी मध्य प्रदेश के अलग-अलग जिलों से संबंधित थे। इनमें जबलपुर, कटनी, सिवनी, मंडला, बालाघाट और सिंगरौली समेत कई जिलों के कैदी शामिल थे। इसके अलावा उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जिले का एक कैदी भी रिहा किया गया।

स्वतंत्रता दिवस के मौके पर हुई इस रिहाई को जेल प्रशासन ने एक सकारात्मक कदम बताया। अधिकारियों का कहना है कि लंबे समय तक जेल में रहने के बाद जब कैदियों को सुधार और अच्छे व्यवहार के आधार पर समाज में लौटने का अवसर मिलता है तो यह उनके जीवन में बड़ा बदलाव लाता है।

रिहाई के दौरान जेल परिसर में भावुक माहौल देखने को मिला। कई कैदियों ने जेल प्रशासन और सरकार की इस पहल के लिए धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि अब वे अपने परिवार के साथ नई जिंदगी शुरू करना चाहते हैं और समाज में जिम्मेदारी के साथ रहना चाहते हैं।

जेल प्रशासन ने रिहा हुए कैदियों को भविष्य में कानून का पालन करने और समाज की मुख्यधारा से जुड़ने की सलाह दी। अधिकारियों ने कहा कि अपराध से दूर रहकर सम्मानजनक जीवन जीना ही उनके लिए सबसे बड़ी सफलता होगी।

मध्य प्रदेश में समय-समय पर स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस जैसे राष्ट्रीय पर्वों पर अच्छे आचरण वाले कैदियों को रिहाई दी जाती है। इसका उद्देश्य जेलों में सुधारात्मक माहौल को बढ़ावा देना और उन लोगों को दूसरा मौका देना है, जिन्होंने अपनी गलतियों से सीख लेकर जीवन में बदलाव लाने का प्रयास किया है।

नेताजी सुभाष चंद्र बोस सेंट्रल जेल से हुई यह रिहाई कई परिवारों के लिए खुशी का अवसर लेकर आई। स्वतंत्रता दिवस के दिन इन 18 कैदियों को मिली आजादी उनके लिए केवल जेल से बाहर आने का अवसर नहीं, बल्कि अपने जीवन को नए सिरे से शुरू करने का मौका भी है।

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