इंदौर। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर निकाली गई तिरंगा यात्रा में जहां हजारों लोग हाथों में तिरंगा लेकर देशभक्ति के रंग में नजर आए, वहीं एक व्यक्ति ने अपनी छोटी सी पहल से नागरिक जिम्मेदारी की बड़ी मिसाल पेश की। देवी अहिल्या विश्वविद्यालय कैंपस से राजीव गांधी स्क्वायर तक निकली तिरंगा यात्रा के दौरान भोला बाबूलाल शिंदे ने ऐसा काम किया, जिसने सभी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया।

भंडारी ब्रिज इलाके में रहने वाले 70 वर्षीय भोला शिंदे तिरंगा यात्रा में शामिल तो नहीं हुए थे, लेकिन उन्होंने यात्रा के पीछे-पीछे चलते हुए सड़क पर फैली गंदगी को साफ करने का जिम्मा उठा लिया। हाथगाड़ी लेकर चल रहे शिंदे रास्ते में फेंकी गई प्लास्टिक की खाली बोतलों को उठाते रहे और उन्हें अपनी गाड़ी में जमा करते गए।

देशभक्ति के साथ स्वच्छता का संदेश

तिरंगा यात्रा में हजारों लोग देशभक्ति के गीत गाते हुए और हाथों में राष्ट्रीय ध्वज लेकर आगे बढ़ रहे थे। इस दौरान लोग उत्साह और जोश के साथ यात्रा का हिस्सा बने हुए थे।

वहीं, दूसरी ओर भोला शिंदे बिना किसी प्रचार या दिखावे के अपने काम में जुटे रहे। जैसे-जैसे यात्रा आगे बढ़ती गई, वह पीछे छूटे रास्ते से प्लास्टिक की बोतलें और अन्य कचरा उठाते गए।

उनकी यह पहल बताती है कि देश के प्रति प्रेम केवल नारों और झंडे तक सीमित नहीं है, बल्कि अपने आसपास के वातावरण को स्वच्छ रखना भी राष्ट्र सेवा का ही एक रूप है।

कचरा बीनकर चलाते हैं परिवार का खर्च

भोला बाबूलाल शिंदे की आर्थिक स्थिति सामान्य नहीं है। वह कचरा इकट्ठा करके और उसे बेचकर अपनी आजीविका चलाते हैं।

रोजाना की तरह वह अपनी हाथगाड़ी लेकर निकले थे, लेकिन स्वतंत्रता दिवस की तिरंगा यात्रा को देखकर उन्होंने अलग तरीके से योगदान देने का फैसला किया।

उन्होंने बताया कि रास्ते में बड़ी संख्या में प्लास्टिक की बोतलें और कचरा पड़ा हुआ था। उन्होंने सोचा कि अगर इसे साफ कर दिया जाए तो यात्रा का रास्ता भी स्वच्छ रहेगा और लोगों को भी अच्छा संदेश मिलेगा।

बिना किसी उम्मीद के किया काम

भोला शिंदे ने यह काम किसी सम्मान या प्रशंसा के लिए नहीं किया। वह चुपचाप अपनी जिम्मेदारी निभाते रहे।

जब हजारों लोग तिरंगा लेकर आगे बढ़ रहे थे, तब शिंदे पीछे रहकर उस रास्ते को साफ कर रहे थे, जहां से लोग गुजर रहे थे।

उनकी इस सोच ने यह संदेश दिया कि समाज में हर व्यक्ति अपने स्तर पर योगदान दे सकता है।

लोगों ने की सराहना

तिरंगा यात्रा में शामिल कई लोगों ने जब भोला शिंदे को कचरा उठाते देखा तो उनकी सराहना की। लोगों का कहना था कि स्वतंत्रता दिवस जैसे अवसर पर उनका यह प्रयास देशभक्ति की सच्ची भावना को दर्शाता है।

लोगों ने कहा कि देश को बेहतर बनाने के लिए केवल बड़े स्तर के प्रयास ही जरूरी नहीं होते, बल्कि छोटी-छोटी जिम्मेदारियां निभाने वाले लोग भी समाज में बड़ा बदलाव लाते हैं।

स्वच्छता भी है देश सेवा

भोला शिंदे की कहानी यह संदेश देती है कि देशभक्ति केवल राष्ट्रीय पर्वों पर दिखाई देने वाली भावना नहीं है, बल्कि रोजमर्रा के जीवन में जिम्मेदारी निभाने का नाम भी है।

सड़क पर फेंकी गई एक बोतल उठाना भले ही छोटा काम लगे, लेकिन इससे स्वच्छता और जिम्मेदारी का बड़ा संदेश जाता है।

उन्होंने दिखाया कि उम्र, आर्थिक स्थिति या साधन सीमित होने के बावजूद कोई भी व्यक्ति समाज के लिए सकारात्मक योगदान दे सकता है।

सोशल मीडिया पर भी चर्चा

भोला शिंदे की इस पहल की चर्चा अब लोगों के बीच हो रही है। कई लोगों ने उनके प्रयास को स्वतंत्रता दिवस की भावना से जोड़ते हुए कहा कि उन्होंने अपने कर्मों से देशप्रेम का उदाहरण पेश किया है।

उनका कहना है कि तिरंगा केवल हाथ में रखने की चीज नहीं है, बल्कि उसके सम्मान के लिए अपने कर्तव्यों को निभाना भी जरूरी है।

एक साधारण व्यक्ति की असाधारण सोच

70 साल से अधिक उम्र के भोला बाबूलाल शिंदे ने बिना किसी मंच और भाषण के एक बड़ा संदेश दे दिया। उन्होंने साबित किया कि समाज और देश के प्रति जिम्मेदारी निभाने के लिए किसी बड़े पद या विशेष संसाधन की जरूरत नहीं होती।

तिरंगा यात्रा के दौरान उनकी छोटी सी पहल ने लोगों को यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि स्वच्छता, अनुशासन और जिम्मेदारी भी राष्ट्र निर्माण का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।

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