बागेश्वर बाबा का मजेदार बयान वायरल करवा चौथ पर पति-पत्नी को दे डाली खास सलाह
शिवपुरी। मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले के करैरा में चल रही सात दिवसीय श्रीराम कथा के दौरान बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने करवा चौथ को लेकर ऐसी टिप्पणी की, जो सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गई है। सोमवार, 26 अक्टूबर 2026 को आयोजित 'सीधी बात' कार्यक्रम में एक नवविवाहित श्रद्धालु ने उनसे पूछा कि क्या उसकी पत्नी इस वर्ष करवा चौथ का व्रत रख सकती है। इस सवाल का जवाब देते हुए धीरेंद्र शास्त्री ने मजाकिया अंदाज में करवा चौथ को 'खसम पूजन दिवस' बता दिया। उन्होंने कहा कि महिलाएं पति की लंबी उम्र के लिए एक दिन व्रत रखती हैं, लेकिन पूरे साल पति-पत्नी के बीच प्रेम और सम्मान बना रहना चाहिए। उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा कि ऐसा नहीं होना चाहिए कि एक दिन व्रत रखा जाए और बाकी 364 दिन पति को ताने सुनाए जाएं। उनकी टिप्पणी सुनकर कथा पंडाल में मौजूद श्रद्धालु हंस पड़े। अब इस बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा में है।
करवा चौथ पर भक्त ने पूछा था सवाल
शिवपुरी जिले के करैरा कस्बे में 24 से 30 अक्टूबर तक सात दिवसीय श्रीराम कथा का आयोजन किया जा रहा है।
कथा के दौरान श्रद्धालुओं के लिए 'सीधी बात' नाम से सवाल-जवाब का सत्र भी आयोजित किया गया।
इसी कार्यक्रम में एक नवविवाहित श्रद्धालु ने धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री से करवा चौथ का व्रत रखने को लेकर सवाल पूछा।
श्रद्धालु ने बताया कि उसकी नई-नई शादी हुई है और वह जानना चाहता है कि उसकी पत्नी इस बार करवा चौथ का व्रत रख सकती है या नहीं।
सवाल सुनकर शास्त्री मुस्कुराए और अपने चिर-परिचित अंदाज में जवाब देना शुरू किया।
उनके जवाब का मजाकिया हिस्सा अब सोशल मीडिया पर लोगों का ध्यान आकर्षित कर रहा है।
करवा चौथ का नाम रखा 'खसम पूजन दिवस'
धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने सवाल का जवाब देते हुए कहा कि उन्होंने करवा चौथ का नया नाम 'खसम पूजन दिवस' रख लिया है।
उनकी इस बात पर कथा सुन रहे श्रद्धालुओं के बीच हंसी का माहौल बन गया।
दरअसल, 'खसम' शब्द का प्रयोग कई क्षेत्रीय भाषाओं और बोलियों में पति के लिए किया जाता है।
शास्त्री ने इसी शब्द का इस्तेमाल करते हुए त्योहार को मजाकिया अंदाज में नया नाम दिया।
हालांकि, उन्होंने स्पष्ट रूप से यह संदेश भी दिया कि व्रत केवल धार्मिक परंपरा निभाने तक सीमित नहीं रहना चाहिए।
पति-पत्नी के रिश्ते में विश्वास, समर्पण और सम्मान भी जरूरी हैं।
एक दिन व्रत और 364 दिन ताने देने पर ली चुटकी
कथावाचक ने अपने संबोधन में वैवाहिक जीवन से जुड़ी रोजमर्रा की नोकझोंक को लेकर भी मजाक किया।
उन्होंने कहा कि महिलाएं पति की लंबी उम्र के लिए पूरे विश्वास और श्रद्धा के साथ करवा चौथ का व्रत रखती हैं।
लेकिन ऐसा नहीं होना चाहिए कि एक दिन पूजा-पाठ करने के बाद पूरे साल पति को ताने दिए जाएं।
उन्होंने उदाहरण देते हुए पति-पत्नी के बीच होने वाली शिकायतों और कहासुनी का जिक्र किया।
उनका कहना था कि जिस भावना से करवा चौथ पर पति की लंबी उम्र की कामना की जाती है, वही अपनापन बाकी दिनों में भी बना रहना चाहिए।
इस टिप्पणी को उन्होंने हास्य के माध्यम से प्रस्तुत किया, लेकिन इसके पीछे वैवाहिक रिश्तों में अच्छे व्यवहार का संदेश था।
पति-पत्नी के बीच प्रेम और सम्मान बनाए रखने की सलाह
धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कहा कि वैवाहिक जीवन में केवल त्योहार मनाना पर्याप्त नहीं है।
उन्होंने रिश्तों में आपसी समझ, प्रेम और सम्मान बनाए रखने की आवश्यकता बताई।
उनके अनुसार, करवा चौथ पर पति की लंबी आयु के लिए प्रार्थना करना श्रद्धा और विश्वास का विषय है।
लेकिन इस अवसर पर लिया गया अच्छा संकल्प सालभर के व्यवहार में भी दिखाई देना चाहिए।
विवाह दो व्यक्तियों के बीच साझेदारी का रिश्ता है, जिसमें दोनों की भावनाओं और जरूरतों का सम्मान महत्वपूर्ण होता है।
शास्त्री की टिप्पणी का मुख्य संदेश भी यही था कि रिश्ते की मजबूती केवल एक दिन की धार्मिक रस्म से नहीं, बल्कि नियमित अच्छे व्यवहार से आती है।
व्रत रखने को लेकर क्या बोले बागेश्वर बाबा?
नवविवाहित श्रद्धालु के सवाल पर शास्त्री ने करवा चौथ का व्रत रखने का समर्थन किया।
उन्होंने कहा कि धार्मिक परंपराओं के साथ अच्छे संकल्प भी लेने चाहिए।
अपने संबोधन में उन्होंने वर्तमान सामाजिक और सांस्कृतिक परिवर्तनों का उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि पाश्चात्य संस्कृति के प्रभाव वाले इस दौर में भी लोगों को अपने पारिवारिक संबंधों और परंपराओं का महत्व समझना चाहिए।
हालांकि, उन्होंने व्रत को लेकर शास्त्रीय नियमों पर अपनी व्याख्या भी प्रस्तुत की।
उनका कहना था कि पति-पत्नी को एक-दूसरे के प्रति अच्छी भावनाएं बनाए रखने का संकल्प लेना चाहिए।
सोशल मीडिया पर वायरल हुई टिप्पणी
श्रीराम कथा के दौरान दिया गया यह बयान सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया है।
करवा चौथ को 'खसम पूजन दिवस' कहने और 364 दिनों के तानों पर चुटकी लेने वाला हिस्सा लोगों का ध्यान आकर्षित कर रहा है।
बुधवार, 28 अक्टूबर को कई समाचार माध्यमों ने उनके इस बयान की रिपोर्ट प्रकाशित की।
धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री पहले भी अपने प्रवचनों के दौरान धार्मिक विषयों के साथ सामाजिक और पारिवारिक मुद्दों पर टिप्पणी करते रहे हैं।
उनका बोलने का अंदाज अक्सर हास्य और उदाहरणों से भरा रहता है।
इस बार भी उन्होंने एक श्रद्धालु के सवाल का जवाब देते हुए वैवाहिक संबंधों पर अपनी राय रखी।
करवा चौथ का धार्मिक और सामाजिक महत्व
करवा चौथ हिंदू परंपरा में विवाहित महिलाओं से जुड़ा एक प्रमुख त्योहार है।
परंपरागत रूप से इस दिन महिलाएं पति की लंबी उम्र और वैवाहिक जीवन की खुशहाली की कामना करते हुए व्रत रखती हैं।
विभिन्न क्षेत्रों में इस पर्व को मनाने की विधियां और पारिवारिक परंपराएं अलग-अलग हो सकती हैं।
कई परिवारों में महिलाएं पूरे दिन व्रत रखने के बाद चंद्रमा के दर्शन और पूजा के पश्चात भोजन करती हैं।
आज के समय में कुछ पति भी अपनी पत्नी के साथ व्रत रखते हैं।
ऐसे में यह पर्व अनेक परिवारों के लिए परस्पर प्रेम और साथ निभाने की भावना से जुड़ गया है।
शिवपुरी में सात दिनों तक चल रही श्रीराम कथा
धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की श्रीराम कथा का आयोजन करैरा में 24 अक्टूबर से शुरू हुआ था।
यह कार्यक्रम 30 अक्टूबर तक चलेगा।
कथा में भगवान श्रीराम के जीवन, आदर्शों और धार्मिक प्रसंगों पर प्रवचन दिए जा रहे हैं।
इसके अतिरिक्त श्रद्धालुओं के साथ संवाद और प्रश्नोत्तरी कार्यक्रम भी आयोजित किए जा रहे हैं।
कथा के चौथे दिन भगवान श्रीराम के प्राकट्योत्सव का आयोजन किया गया।
इस अवसर पर भक्ति गीतों और धार्मिक प्रस्तुतियों के बीच श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
पूर्व मंत्री इमरती देवी भी पहुंचीं कथा सुनने
करैरा में आयोजित श्रीराम कथा में मध्य प्रदेश की पूर्व मंत्री इमरती देवी भी शामिल हुईं।
उन्होंने व्यासपीठ पर पहुंचकर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री से आशीर्वाद लिया।
भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव से जुड़े कार्यक्रम के दौरान भक्ति गीतों की प्रस्तुतियां हुईं।
श्रद्धालुओं ने भजनों और बधाई गीतों पर उत्साह दिखाया।
पूर्व मंत्री इमरती देवी भी श्रद्धालुओं के साथ भक्ति गीतों पर झूमती नजर आईं।
सात दिवसीय आयोजन में कथा के साथ धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम भी चल रहे हैं।
हास्य के माध्यम से दिया रिश्तों का संदेश
धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की टिप्पणी में एक तरफ करवा चौथ को लेकर हास्य था, तो दूसरी तरफ वैवाहिक रिश्तों में अच्छे व्यवहार पर जोर दिया गया।
उन्होंने अपने बयान में पतियों को ताने देने की बात पर मजाक किया, लेकिन उनके व्यापक संदेश में पूरे वर्ष प्रेम और सम्मान बनाए रखने की सलाह शामिल थी।
वैवाहिक जीवन में मतभेद होना सामान्य बात है।
ऐसी परिस्थितियों में आपसी बातचीत, धैर्य और सम्मान से समस्याओं का समाधान करने का प्रयास किया जा सकता है।
त्योहारों पर व्यक्त किया जाने वाला स्नेह यदि रोजमर्रा के जीवन में भी बना रहे, तो रिश्तों में सकारात्मकता बढ़ सकती है।
फिलहाल करैरा की श्रीराम कथा में धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की 'खसम पूजन दिवस' वाली टिप्पणी चर्चा में है। उनका संदेश था कि करवा चौथ पर एक दिन की पूजा के साथ पति-पत्नी को पूरे साल एक-दूसरे के प्रति प्रेम और सम्मान बनाए रखना चाहिए।