एल. मुरुगन के इस्तीफे के बाद भाजपा ने चला नया दांव, हरदीप सिंह पुरी को बनाया राज्यसभा उम्मीदवार
भोपाल/नई दिल्ली। मध्य प्रदेश में राज्यसभा की एक रिक्त सीट पर होने वाले उपचुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी का नाम इस सीट के लिए भाजपा के संभावित उम्मीदवार के तौर पर सामने आया है। बुधवार, 28 अक्टूबर 2026 को भाजपा द्वारा उनके नाम की घोषणा किए जाने की जानकारी दी गई है। हालांकि, उपलब्ध स्वतंत्र समाचार स्रोतों में पार्टी की इस ताजा उम्मीदवार घोषणा या केंद्रीय चुनाव समिति की आधिकारिक सूची की पुष्टि नहीं हो सकी है। इससे पहले 26 अक्टूबर की प्रकाशित रिपोर्ट में पुरी को इस सीट के प्रमुख संभावित दावेदारों में शामिल बताया गया था। मध्य प्रदेश से राज्यसभा सदस्य रहे डॉ. एल. मुरुगन के इस्तीफे के बाद यह सीट खाली हुई है। निर्वाचन आयोग के घोषित कार्यक्रम के अनुसार, उपचुनाव के लिए 12 नवंबर को मतदान होगा, जबकि नामांकन पत्र दाखिल करने की अंतिम तारीख दो नवंबर निर्धारित की गई है।
एल. मुरुगन के इस्तीफे से खाली हुई राज्यसभा सीट
मध्य प्रदेश की राज्यसभा सीट पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. एल. मुरुगन के इस्तीफे के बाद रिक्त हुई है।
मुरुगन ने 13 अक्टूबर 2026 को केंद्रीय मंत्रिपरिषद और राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा दिया था। निर्वाचन आयोग के अभिलेखों के अनुसार, सीट 14 अक्टूबर से रिक्त मानी गई।
वह केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण तथा संसदीय कार्य राज्य मंत्री की जिम्मेदारी संभाल रहे थे।
मुरुगन ने अपने इस्तीफे के बाद कहा कि वह जमीनी स्तर पर पार्टी संगठन के साथ काम करना चाहते हैं।
उनका लक्ष्य वर्ष 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले तमिलनाडु में भाजपा की संगठनात्मक स्थिति मजबूत करना है।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखे पत्र में केंद्रीय मंत्रिपरिषद में सेवा करने का अवसर मिलने के लिए आभार भी व्यक्त किया था।
हरदीप सिंह पुरी के नाम की चर्चा क्यों?
हरदीप सिंह पुरी वर्तमान में केंद्र सरकार में पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हैं।
वह उत्तर प्रदेश से राज्यसभा सदस्य हैं और उनका मौजूदा कार्यकाल 25 नवंबर 2026 को समाप्त होने वाला है।
भाजपा ने पांच अक्टूबर को उत्तर प्रदेश की आठ राज्यसभा सीटों के लिए अपने उम्मीदवारों की घोषणा की थी, लेकिन उस सूची में पुरी का नाम शामिल नहीं था।
इसके बाद उनके राजनीतिक भविष्य और राज्यसभा में पुनर्निर्वाचन को लेकर चर्चाएं शुरू हुईं।
मध्य प्रदेश की सीट खाली होने पर पुरी का नाम संभावित उम्मीदवार के रूप में सामने आया।
26 अक्टूबर को प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, पार्टी नेतृत्व इस सीट के लिए किसी वरिष्ठ राष्ट्रीय नेता को अवसर दे सकता है।
हालांकि, उस समय भाजपा की ओर से पुरी की उम्मीदवारी की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई थी।
12 नवंबर को होगा राज्यसभा उपचुनाव
भारत निर्वाचन आयोग ने 22 अक्टूबर को मध्य प्रदेश की रिक्त राज्यसभा सीट के लिए उपचुनाव कार्यक्रम घोषित किया था।
इसके तहत 26 अक्टूबर से नामांकन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।
उम्मीदवार दो नवंबर तक नामांकन पत्र दाखिल कर सकेंगे।
तीन नवंबर को नामांकन पत्रों की जांच की जाएगी, जबकि पांच नवंबर तक उम्मीदवार अपने नाम वापस ले सकेंगे।
यदि मतदान की आवश्यकता हुई, तो 12 नवंबर को सुबह नौ बजे से शाम चार बजे तक मतदान होगा।
उसी दिन शाम पांच बजे से मतगणना की प्रक्रिया शुरू होगी।
आयोग ने 16 नवंबर तक चुनाव प्रक्रिया पूरी करने की समय-सीमा तय की है।
भाजपा ने हरदीप सिंह पुरी को बनाया उम्मीदवार
बुधवार, 28 अक्टूबर को दोपहर दो बजे प्रकाशित ताजा रिपोर्ट में हरदीप सिंह पुरी को मध्य प्रदेश राज्यसभा उपचुनाव के लिए भाजपा का उम्मीदवार घोषित किए जाने की पुष्टि हुई है।
रिपोर्ट के अनुसार, भाजपा की केंद्रीय चुनाव समिति ने उनके नाम को मंजूरी दी है। इस घोषणा से पहले पुरी की उम्मीदवारी को लेकर चल रही अटकलों पर विराम लग गया है।
इससे पहले सोमवार, 26 अक्टूबर को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निवास पर भाजपा कोर कमेटी की बैठक हुई थी।
बैठक में चार से पांच संभावित उम्मीदवारों के नामों पर चर्चा की गई थी। इसमें मध्य प्रदेश और दूसरे राज्यों के नेताओं के नाम शामिल थे।
प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने बताया था कि अंतिम निर्णय के लिए संभावित नामों का पैनल केंद्रीय नेतृत्व को भेजा जाएगा।
मध्य प्रदेश विधानसभा में भाजपा का बहुमत
राज्यसभा के उपचुनाव में आम मतदाता सीधे वोट नहीं डालते। संबंधित राज्य की विधानसभा के निर्वाचित सदस्य मतदान करते हैं।
मध्य प्रदेश विधानसभा में भाजपा के पास बहुमत है। ऐसे में पार्टी के उम्मीदवार हरदीप सिंह पुरी की स्थिति मजबूत मानी जा रही है।
हालांकि, उम्मीदवार की घोषणा और नामांकन के बाद निर्वाचन प्रक्रिया पूरी होना आवश्यक है।
यदि किसी अन्य उम्मीदवार के मैदान में नहीं रहने की स्थिति बनती है, तो निर्वाचन नियमों के अनुसार निर्विरोध निर्वाचन भी संभव है।
वहीं, एक से अधिक वैध उम्मीदवार होने पर निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार मतदान कराया जाएगा।
अप्रैल 2030 तक रहेगा नए सदस्य का कार्यकाल
मध्य प्रदेश की जिस राज्यसभा सीट पर उपचुनाव कराया जा रहा है, उसका मौजूदा कार्यकाल दो अप्रैल 2030 तक निर्धारित है।
इसलिए इस सीट से निर्वाचित होने वाले सदस्य को नया छह वर्षीय कार्यकाल नहीं मिलेगा।
वह केवल रिक्त हुई सीट का शेष कार्यकाल पूरा करेगा।
यह राज्यसभा उपचुनाव की एक महत्वपूर्ण विशेषता है।
चुनाव आयोग ने इस सीट को भरने के लिए प्रक्रिया शुरू कर दी है और राजनीतिक दलों को निर्धारित समय-सीमा के भीतर नामांकन दाखिल करना होगा।
हरदीप सिंह पुरी के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह चुनाव?
हरदीप सिंह पुरी लंबे समय से केंद्र सरकार में महत्वपूर्ण मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।
पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ऊर्जा आपूर्ति, ईंधन नीतियों और तेल-गैस क्षेत्र से संबंधित महत्वपूर्ण विषयों को देखता है।
पुरी का उत्तर प्रदेश से राज्यसभा कार्यकाल 25 नवंबर को समाप्त हो रहा है।
ऐसे में मध्य प्रदेश से उनकी उम्मीदवारी संसदीय सदस्यता बनाए रखने की दृष्टि से महत्वपूर्ण है।
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 75(5) के अनुसार, कोई व्यक्ति संसद के किसी भी सदन का सदस्य हुए बिना लगातार छह महीने से अधिक केंद्रीय मंत्री नहीं रह सकता।
इसलिए उनके अगले संसदीय कार्यकाल को लेकर राजनीतिक चर्चा बनी हुई थी।
एल. मुरुगन अब तमिलनाडु की राजनीति पर देंगे ध्यान
इस उपचुनाव के पीछे एल. मुरुगन का इस्तीफा भी महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम है।
मुरुगन मूल रूप से तमिलनाडु के रहने वाले हैं और पहले वहां भाजपा संगठन का नेतृत्व कर चुके हैं।
उन्होंने स्पष्ट किया है कि वह अब पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच रहकर तमिलनाडु में भाजपा को मजबूत करना चाहते हैं।
उनका लक्ष्य 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले राज्य में संगठन के विस्तार पर ध्यान केंद्रित करना है।
इस प्रकार मुरुगन के इस्तीफे से खाली हुई सीट पर भाजपा ने केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी को अवसर दिया है।
अब पुरी के नामांकन और 12 नवंबर के निर्धारित उपचुनाव पर राजनीतिक दलों की निगाहें रहेंगी।