पन्ना। मध्य प्रदेश के पन्ना जिले में वन भूमि से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान रविवार, 18 अक्टूबर को बड़ा बवाल हो गया। अजयगढ़ वन परिक्षेत्र के पेराहा गांव में करीब 30 हेक्टेयर वन भूमि से कब्जा हटाने पहुंची वन विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम का ग्रामीणों ने विरोध शुरू कर दिया। देखते ही देखते विवाद हिंसक झड़प में बदल गया और दोनों पक्षों के बीच लाठी-डंडे चलने लगे। इस घटना में महिलाओं सहित करीब 20 से 25 ग्रामीण और वन विभाग के कर्मचारी घायल हुए हैं। घायलों को उपचार के लिए पन्ना जिला अस्पताल और अजयगढ़ के स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया। घटना के बाद गांव में तनाव की स्थिति बन गई। हालात को नियंत्रित करने के लिए पुलिस बल तैनात किया गया है।

30 हेक्टेयर वन भूमि से कब्जा हटाने पहुंची थी टीम

जानकारी के अनुसार, पन्ना जिले के उत्तर वन मंडल अंतर्गत अजयगढ़ रेंज के पेराहा गांव में करीब 30 हेक्टेयर वन भूमि को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा है।

वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि इस भूमि पर पटेल समुदाय के कुछ परिवार वर्षों से खेती कर रहे थे। विभाग इस जमीन को वन भूमि बताते हुए कब्जा हटाने की कार्रवाई कर रहा है।

रविवार को छतरपुर और पन्ना के वन अधिकारियों के साथ बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी गांव पहुंचे। टीम का उद्देश्य विवादित भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराना था।

कार्रवाई शुरू होते ही स्थानीय ग्रामीणों ने विरोध करना शुरू कर दिया। इसके बाद विवाद बढ़ता चला गया।

देखते ही देखते हिंसक हो गया विरोध प्रदर्शन

वन विभाग की टीम जब जमीन पर कार्रवाई कर रही थी, तभी ग्रामीणों ने इसका विरोध किया।

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, दोनों पक्षों के बीच पहले कहासुनी हुई। इसके बाद विवाद ने हिंसक रूप ले लिया और लाठी-डंडों से मारपीट शुरू हो गई।

घटना के दौरान महिलाओं सहित कई ग्रामीण घायल हो गए। दूसरी ओर वन विभाग के कर्मचारियों को भी चोटें आईं।

अचानक हुई इस झड़प से मौके पर अफरा-तफरी मच गई। पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए हस्तक्षेप किया।

महिलाओं सहित 20 से 25 ग्रामीण घायल

हिंसक झड़प में महिलाओं सहित करीब 20 से 25 ग्रामीणों के घायल होने की जानकारी सामने आई है।

घायलों में सोना पटेल, विनोद पटेल, दिनेश पटेल, राधा पटेल और रजनीश पटेल सहित अन्य ग्रामीणों के नाम सामने आए हैं।

घटना के बाद घायलों को उपचार के लिए पन्ना जिला अस्पताल और अजयगढ़ भेजा गया।

कुछ रिपोर्ट में दो वनकर्मियों के घायल होने की जानकारी दी गई है, जबकि बाद की रिपोर्ट में छह कर्मचारियों को चोटें लगने का उल्लेख है। घायलों की अंतिम आधिकारिक संख्या स्पष्ट होना बाकी है।

ग्रामीणों ने बिना नोटिस कार्रवाई का लगाया आरोप

अस्पताल में भर्ती ग्रामीण विनोद पटेल ने वन विभाग और प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं।

उनका कहना है कि वन विभाग की टीम सुबह बिना पूर्व सूचना या नोटिस दिए गांव पहुंची और जबरन जमीन खाली कराने लगी।

ग्रामीणों के अनुसार, जब उन्होंने कार्रवाई का विरोध किया तो कथित तौर पर उनके साथ लाठी-डंडों से मारपीट की गई।

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि महिलाओं को भी नहीं बख्शा गया और विरोध करने वाले कई लोगों को चोटें आईं।

हालांकि, ग्रामीणों द्वारा लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।

वन विभाग ने ग्रामीणों पर लगाया हमले का आरोप

वहीं वन विभाग ने ग्रामीणों के आरोपों से अलग अपना पक्ष रखा है।

वन अधिकारियों के अनुसार, विभाग की टीम निर्धारित कार्रवाई के लिए गांव पहुंची थी। इस दौरान कुछ ग्रामीणों ने विरोध करते हुए कर्मचारियों पर हमला कर दिया।

विभाग का कहना है कि अचानक हुए हमले में वनकर्मी घायल हुए हैं।

शुरुआती रिपोर्ट में घायल वनकर्मियों की पहचान देवेंद्रनगर के वन रक्षक बसंत लाला वर्मा और पवई रेंज की वनपाल भारती कुमारी के रूप में हुई है।

वन विभाग ने अपने कर्मचारियों पर हुए कथित हमले की जांच और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

वन भूमि पर पौधरोपण को लेकर भी विवाद

वन विभाग की ओर से विवादित जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराकर वहां पौधरोपण करने की योजना थी।

जानकारी के अनुसार, विभाग ने जमीन से कब्जा हटाने के बाद पौधरोपण की प्रक्रिया भी शुरू की थी।

बाद में सामने आई जानकारी के मुताबिक, विभाग ने संबंधित क्षेत्र में लगभग 30 हजार पौधे लगाने का लक्ष्य रखा था, जिनमें से 22 हजार पौधे लगाए जाने का दावा किया गया है।

वहीं, ग्रामीणों का कहना है कि वे लंबे समय से इस जमीन पर खेती करके अपनी आजीविका चला रहे हैं।

ऐसे में जमीन से हटाए जाने की कार्रवाई उनके परिवारों की आर्थिक स्थिति को प्रभावित कर सकती है।

पहले भी हो चुका था जमीन को लेकर विवाद

पेराहा गांव की वन भूमि पर कब्जे को लेकर यह पहला विवाद नहीं है।

जानकारी के अनुसार, पहले भी वन विभाग ने इस जमीन से कथित अतिक्रमण हटाने की कोशिश की थी, लेकिन ग्रामीणों के विरोध के कारण कार्रवाई पूरी नहीं हो सकी थी।

इस बार विभाग पुलिस बल के साथ पहुंचा था। इसके बावजूद स्थिति नियंत्रण से बाहर हो गई और हिंसक झड़प हो गई।

इस घटना ने वन भूमि पर वर्षों से खेती कर रहे परिवारों और प्रशासन के बीच भूमि अधिकार से जुड़े विवाद को फिर सामने ला दिया है।

पुलिस ने शुरू की कानूनी कार्रवाई

घटना के बाद पुलिस ने दोनों पक्षों से जानकारी जुटाने की प्रक्रिया शुरू की।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, मामले में प्राप्त शिकायतों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जा रही है।

कुछ रिपोर्ट में 14 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किए जाने की जानकारी भी सामने आई है।

पुलिस घटना में शामिल लोगों की पहचान करने और हिंसा के कारणों का पता लगाने में जुटी है।

वन भूमि और आजीविका का सवाल

पेराहा गांव में हुआ विवाद केवल अतिक्रमण हटाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें भूमि अधिकार और ग्रामीण परिवारों की आजीविका का प्रश्न भी जुड़ा हुआ है।

वन विभाग का कहना है कि संबंधित भूमि सरकारी वन क्षेत्र का हिस्सा है और उसे अतिक्रमण से मुक्त कराया जाना आवश्यक है।

दूसरी ओर ग्रामीणों का दावा है कि वे वर्षों से उस भूमि पर खेती करते आ रहे हैं।

ऐसी परिस्थितियों में जमीन के रिकॉर्ड, पूर्व में दिए गए नोटिस, संबंधित कानूनी प्रक्रियाओं और किसी संभावित अधिकार दावे की निष्पक्ष जांच महत्वपूर्ण है।

हिंसक झड़प के बाद गांव में तनाव

इस घटना के बाद पेराहा गांव में तनाव की स्थिति बनी हुई है। पुलिस प्रशासन स्थिति पर नजर रख रहा है।

दोनों पक्षों के अलग-अलग आरोपों के कारण मामले की निष्पक्ष जांच की आवश्यकता बढ़ गई है।

पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह पता लगाना है कि हिंसा की शुरुआत कैसे हुई और किन परिस्थितियों में इतनी बड़ी संख्या में लोग घायल हो गए।

फिलहाल घायलों का उपचार किया जा रहा है और मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है।

वन भूमि पर कब्जे के विवाद का स्थायी समाधान भूमि अभिलेखों, कानूनी अधिकारों और उचित प्रशासनिक प्रक्रिया के आधार पर ही संभव होगा।

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