भोपाल: मध्य प्रदेश में गरीब निर्माण श्रमिकों की बेटियों के विवाह के लिए दी जाने वाली सरकारी सहायता में कथित तौर पर बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा सामने आया है। विदिशा जिले की सिरोंज जनपद पंचायत से जुड़े मामले में 5,923 संदिग्ध विवाह सहायता प्रकरणों के जरिए लगभग 30.18 करोड़ रुपये के अनियमित वितरण का आरोप है। प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी के भोपाल जोनल कार्यालय ने इस मामले में तत्कालीन मुख्य कार्यपालन अधिकारी शोभित त्रिपाठी और उनके सहयोगी हेमंत साहू की 5.37 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्तियां अस्थायी रूप से अटैच की हैं।
ईडी ने 30 अक्टूबर को धन शोधन निवारण अधिनियम, 2002 के तहत यह कार्रवाई की। जांच का संबंध वर्ष 2019 से नवंबर 2021 के बीच विवाह सहायता राशि की स्वीकृति और वितरण से है। उस दौरान शोभित त्रिपाठी सिरोंज जनपद पंचायत के सीईओ थे। जांच एजेंसी का आरोप है कि उन्होंने अन्य लोगों के साथ मिलीभगत करके अपात्र लाभार्थियों के नाम पर सहायता राशि मंजूर की और सरकारी धन का फर्जी तरीके से वितरण कराया। 
संबंधित विवाह सहायता व्यवस्था के अंतर्गत पंजीकृत आर्थिक रूप से कमजोर निर्माण श्रमिकों की बेटियों के विवाह के लिए 51 हजार रुपये की मदद दी जाती थी। इसका उद्देश्य जरूरतमंद परिवारों पर विवाह का आर्थिक बोझ कम करना था। ईडी के मुताबिक, इसी सहायता का लाभ लेने के लिए हजारों संदिग्ध प्रकरण तैयार किए गए। जांच एजेंसी ने जिन 5,923 मामलों का उल्लेख किया है, उनमें लाभार्थियों की पात्रता और प्रस्तुत दस्तावेजों को लेकर गंभीर अनियमितताओं का आरोप है। जांच में सामने आए कथित तरीके के अनुसार, अपात्र लोगों के नाम पर फर्जी और कूटरचित आवेदन तैयार किए गए। इनके समर्थन में दस्तावेजों तथा पहचान संबंधी विवरण का इस्तेमाल हुआ। ईडी का आरोप है कि सहायता मंजूर कराने की प्रक्रिया में इन आवेदनों को वास्तविक प्रकरणों की तरह प्रस्तुत किया गया। इस तरह जिस सरकारी राशि का इस्तेमाल पात्र परिवारों की मदद के लिए होना चाहिए था, वह संदिग्ध दावों के आधार पर जारी की गई। 
मामले का महत्वपूर्ण पहलू बैंक खातों का कथित इस्तेमाल है। जांच एजेंसी के अनुसार, कुछ लाभार्थियों की जानकारी के बिना उनके पहचान संबंधी दस्तावेजों से खाते खोले गए। सहायता राशि इन खातों में पहुंचने के बाद अलग-अलग किस्तों में नकद निकाल ली गई। आरोप है कि खातों का इस्तेमाल सरकारी सहायता प्राप्त करने के उद्देश्य से किया गया था। धन के इस प्रवाह और नकद निकासी की जांच मनी लॉन्ड्रिंग मामले का प्रमुख हिस्सा है। 
ईडी ने कोविड-19 लॉकडाउन के दौरान हुए भुगतान पर भी सवाल उठाए हैं। एजेंसी के अनुसार, उस अवधि में सार्वजनिक विवाह आयोजनों पर प्रतिबंध के बावजूद अपात्र व्यक्तियों को विवाह सहायता का लाभ दिया गया। यह आरोप मामले की गंभीरता बढ़ाता है, क्योंकि भुगतान के आधार बने आवेदनों और वास्तविक परिस्थितियों के बीच अंतर की जांच जरूरी है। हालांकि, प्रत्येक प्रकरण की वास्तविक स्थिति और संबंधित लोगों की भूमिका जांच तथा आगे की कानूनी प्रक्रिया से निर्धारित होगी। 
इस कथित घोटाले की जांच की शुरुआत आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ यानी ईओडब्ल्यू, भोपाल में दर्ज प्राथमिकी से हुई थी। प्राथमिकी में त्रिपाठी और अन्य लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी, आपराधिक न्यासभंग तथा भ्रष्टाचार से जुड़े प्रावधान लगाए गए। ईडी ने इसी मामले के आधार पर कथित अपराध से अर्जित धन और उसके इस्तेमाल की जांच शुरू की। इस प्रकार ईओडब्ल्यू की मूल आपराधिक जांच के साथ धन शोधन संबंधी पहलुओं की पड़ताल भी आगे बढ़ी। ताजा कार्रवाई में अटैच की गई अचल संपत्तियां शोभित त्रिपाठी और हेमंत साहू के नाम पर हैं। इनकी कुल कीमत 5.37 करोड़ रुपये बताई गई है। यह राशि कथित अनियमित वितरण के 30.18 करोड़ रुपये से अलग है। संपत्तियों का अस्थायी अटैचमेंट पूरी कथित रकम की वसूली या अंतिम जब्ती होने के बराबर नहीं है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, कार्रवाई फिलहाल अस्थायी अटैचमेंट के स्तर पर की गई है।
शोभित त्रिपाठी को ईडी ने 2 सितंबर 2026 को गिरफ्तार किया था। ताजा रिपोर्टों के अनुसार, वह न्यायिक हिरासत में हैं। जांच एजेंसी ने मामले से संबंधित तलाशी के दौरान कई दस्तावेज और अन्य सामग्री मिलने की जानकारी भी दी है। इन्हीं रिकॉर्ड तथा वित्तीय लेन-देन के आधार पर कथित अनियमितताओं की पड़ताल जारी है। हेमंत साहू की संपत्तियां भी कार्रवाई के दायरे में आई हैं, लेकिन उपलब्ध रिपोर्टों में उनकी गिरफ्तारी की पुष्टि नहीं दी गई है। 
यह मामला सहायता योजनाओं में आवेदन की जांच, लाभार्थी की पहचान और भुगतान की निगरानी से जुड़े सवाल सामने लाता है। विशेष रूप से किसी व्यक्ति की जानकारी के बिना खाता खोलने और उसमें सरकारी राशि प्राप्त करने का आरोप दस्तावेजों के सत्यापन की अहमियत दर्शाता है। यदि जांच में आरोप साबित होते हैं, तो यह जरूरतमंद परिवारों के लिए निर्धारित धन के संगठित दुरुपयोग का गंभीर मामला होगा। फिलहाल ये जांच एजेंसी के आरोप हैं और अंतिम दोष निर्धारण अदालत में होना बाकी है। ईडी के अनुसार, मामले में आगे की जांच जारी है। अभी पुष्टि किया गया नया घटनाक्रम 5.37 करोड़ रुपये की संपत्तियों का अस्थायी अटैचमेंट है। 5,923 विवाह सहायता प्रकरणों को एजेंसी ने संदिग्ध बताया है और लगभग 30.18 करोड़ रुपये के कथित फर्जी वितरण की जांच चल रही है। इसलिए सभी विवाहों को न्यायिक रूप से फर्जी साबित बताने के बजाय जांच में सामने आए आरोपों और कार्रवाई की मौजूदा स्थिति के आधार पर मामले को समझना जरूरी है।
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