भोपाल : परीक्षा के पेपर लीक और अन्य अनियमितताओं से जुड़े मामलों में तेजी से न्याय दिलाने के उद्देश्य से मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने बड़ा कदम उठाया है। हाई कोर्ट ने ऐसे मामलों की सुनवाई के लिए चार स्पेशल फास्ट-ट्रैक कोर्ट तय किए हैं। अदालत ने निर्देश दिया है कि इन मामलों का निपटारा चार्जशीट दाखिल होने के तीन महीने के भीतर किया जाए।
यह फैसला परीक्षा में गड़बड़ियों को लेकर बढ़ती चिंता के बीच आया है। केंद्र सरकार की ओर से परीक्षाओं में अनियमितताओं, खासकर NEET-UG जैसे मामलों की सुनवाई के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट बनाने का आश्वासन दिए जाने के दो दिन बाद मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने यह पहल की है।
चार जिलों की अदालतों को बनाया गया स्पेशल कोर्ट
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विवेक रूसिया ने शुक्रवार को चार जिलों में जिला एवं अतिरिक्त सत्र न्यायालयों को स्पेशल फास्ट-ट्रैक कोर्ट के रूप में नामित किया।
इन अदालतों को ‘लोक परीक्षा (अनुचित साधनों का निवारण) अधिनियम, 2024’ और इससे जुड़े अपराधों की सुनवाई की जिम्मेदारी दी गई है। इस कानून का उद्देश्य सार्वजनिक परीक्षाओं में पेपर लीक, नकल और अन्य अनुचित साधनों के इस्तेमाल पर रोक लगाना है।
हाई कोर्ट के निर्देश के अनुसार, इन विशेष अदालतों में ऐसे मामलों को प्राथमिकता के आधार पर सुना जाएगा, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया लंबे समय तक लंबित न रहे।
तीन महीने में निपटाने का निर्देश
हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि चार्जशीट दाखिल होने के बाद संबंधित मामलों का निपटारा तीन महीने के भीतर किया जाना चाहिए। अदालत का उद्देश्य है कि परीक्षा से जुड़े अपराधों में दोषियों के खिलाफ जल्द कार्रवाई हो और छात्रों के हितों की रक्षा की जा सके।
पेपर लीक जैसे मामलों में देरी होने से छात्रों और अभ्यर्थियों को लंबे समय तक अनिश्चितता का सामना करना पड़ता है। ऐसे मामलों में तेजी से फैसला आने से परीक्षा प्रणाली में भरोसा मजबूत होने की उम्मीद है।
NEET-UG विवाद के बाद बढ़ी थी मांग
देश में परीक्षा पारदर्शिता को लेकर बहस उस समय तेज हुई, जब मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG में कथित पेपर लीक और अन्य अनियमितताओं के आरोप सामने आए। इसके बाद छात्रों, अभिभावकों और विभिन्न संगठनों ने जांच और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर प्रदर्शन किए थे।
इन विरोध प्रदर्शनों के बाद केंद्र सरकार ने परीक्षाओं में गड़बड़ी से जुड़े मामलों के लिए विशेष फास्ट-ट्रैक अदालतों के गठन की दिशा में कदम उठाने की बात कही थी।
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट का यह फैसला इसी व्यापक प्रयास का हिस्सा माना जा रहा है, जिसका उद्देश्य परीक्षा संबंधी अपराधों की सुनवाई को तेज करना है।
लोक परीक्षा कानून के तहत होगी कार्रवाई
‘लोक परीक्षा (अनुचित साधनों का निवारण) अधिनियम, 2024’ को सार्वजनिक परीक्षाओं में होने वाली गड़बड़ियों पर रोक लगाने के लिए बनाया गया है। इस कानून के तहत पेपर लीक, फर्जी तरीके अपनाने और परीक्षा प्रक्रिया को प्रभावित करने वाले अपराधों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का प्रावधान है।
इस कानून के लागू होने के बाद अब ऐसे मामलों की सुनवाई के लिए विशेष अदालतों की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है।
कानून विशेषज्ञों का मानना है कि केवल सख्त नियम बनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि मामलों का समय पर निपटारा भी जरूरी है। फास्ट-ट्रैक कोर्ट इसी दिशा में एक प्रभावी कदम साबित हो सकते हैं।
छात्रों के हितों को मिलेगी प्राथमिकता
परीक्षा में अनियमितताओं का सबसे बड़ा असर मेहनत करने वाले छात्रों पर पड़ता है। पेपर लीक जैसी घटनाओं से न केवल छात्रों का समय और मेहनत प्रभावित होती है, बल्कि पूरी परीक्षा व्यवस्था पर सवाल उठते हैं।
विशेष अदालतों के गठन से उम्मीद है कि ऐसे मामलों में जांच एजेंसियों और न्यायपालिका के बीच बेहतर समन्वय होगा और दोषियों के खिलाफ जल्द कार्रवाई संभव हो सकेगी।
देशभर में परीक्षा सुधारों पर जोर
हाल के वर्षों में प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता और सुरक्षा को लेकर सरकार और न्यायपालिका दोनों की ओर से कई कदम उठाए गए हैं। ऑनलाइन परीक्षा प्रणाली, कड़े सुरक्षा प्रोटोकॉल और कानूनी प्रावधानों के साथ अब मामलों की तेज सुनवाई पर भी जोर दिया जा रहा है।
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट का फैसला इसी प्रयास को आगे बढ़ाने वाला माना जा रहा है। चार स्पेशल फास्ट-ट्रैक कोर्ट के माध्यम से परीक्षा संबंधी अपराधों की सुनवाई तेज होने की उम्मीद है।
फिलहाल हाई कोर्ट के निर्देश के बाद संबंधित अदालतों में इन मामलों की सुनवाई की प्रक्रिया शुरू होगी। अब यह देखना होगा कि निर्धारित समय सीमा के भीतर कितने मामलों का निपटारा हो पाता है और इससे परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ाने में कितनी मदद मिलती है