19 महीने के चीता शावक के घायल मिलने से हड़कंप, सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल
श्योपुर। मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क से एक चिंताजनक खबर सामने आई है। मादा चीता निर्वा के 19 माह के नर शावक के घायल अवस्था में मिलने की जानकारी सामने आई है। विजयपुर क्षेत्र के नितनवास गांव के पास जंगल में मिले चीते को गंभीर चोटें आई हैं। निगरानी दल ने रविवार शाम उसे मुरैना वन मंडल के पहाड़गढ़ क्षेत्र के जंगल में असामान्य हालत में देखा था। इसके बाद वन विभाग की टीम ने उसे सुरक्षित रेस्क्यू कर उपचार के लिए श्योपुर स्थित कूनो राष्ट्रीय उद्यान के चिकित्सा केंद्र पहुंचाया। वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, चीता जीवित है और प्रतिक्रिया दे रहा है। हालांकि, उसे चोट कैसे लगी, इसकी वजह अभी स्पष्ट नहीं हो सकी है।
नितनवास के पास जंगल में मिला घायल चीता
जानकारी के अनुसार, वन विभाग का निगरानी दल रविवार शाम जंगल में गश्त कर रहा था। इसी दौरान टीम को एक चीता असामान्य हालत में दिखाई दिया। वह सामान्य तरीके से चल-फिर नहीं पा रहा था।
चीते को घायल अवस्था में देखकर निगरानी दल ने तुरंत वरिष्ठ अधिकारियों को सूचना दी। इसके बाद वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और उसकी स्थिति का जायजा लिया।शुरुआती जानकारी में उसके पैर में गंभीर चोट की बात सामने आई थी। वहीं, बाद में सामने आई रिपोर्टों में उसकी पीठ पर चोट के निशान होने का भी उल्लेख किया गया। चोटों की सही स्थिति और गंभीरता का पता विस्तृत चिकित्सकीय जांच के बाद ही चल सकेगा।
रेस्क्यू कर कूनो के चिकित्सा केंद्र लाया गया
घायल चीते की हालत को देखते हुए वन विभाग ने उसे सुरक्षित तरीके से रेस्क्यू करने की प्रक्रिया शुरू की। चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध कराने के लिए उसे कूनो राष्ट्रीय उद्यान के चिकित्सा केंद्र में लाया गया।
वन्यजीवों को रेस्क्यू करते समय विशेष सावधानी बरतनी पड़ती है, क्योंकि घायल अवस्था में वे अधिक तनाव में हो सकते हैं। ऐसे में प्रशिक्षित टीम की निगरानी में ही उन्हें सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया जाता है।कूनो पहुंचने के बाद चीते का चिकित्सकीय परीक्षण शुरू किया गया। उसकी चोटों का आकलन करने और आगे के उपचार की योजना बनाने के लिए विशेषज्ञों की मदद ली जा रही है।
चोट कैसे लगी, इसकी जांच जारी
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यह है कि चीता घायल कैसे हुआ। वन विभाग ने अभी किसी एक कारण की पुष्टि नहीं की है।विशेषज्ञ इस संभावना की जांच कर रहे हैं कि कहीं चीते का किसी दूसरे जंगली जानवर के साथ संघर्ष तो नहीं हुआ। इसके अलावा किसी दुर्घटना या मानवीय गतिविधि के कारण चोट लगने की आशंका को भी पूरी तरह खारिज नहीं किया गया है।वन विभाग की वन्यजीव अपराध विरोधी इकाई स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स की टीम को भी मामले की जांच के लिए भेजे जाने की जानकारी सामने आई है।जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि चोट प्राकृतिक परिस्थितियों में लगी या इसके पीछे कोई अन्य वजह है। फिलहाल किसी व्यक्ति या गतिविधि की भूमिका की पुष्टि नहीं हुई है।
एक्स-रे और मेडिकल जांच से मिलेगी जानकारी
घायल चीते की वास्तविक स्थिति का पता लगाने के लिए मेडिकल परीक्षण और एक्स-रे की प्रक्रिया की जा रही है। विशेषज्ञों की जांच से चोटों की गंभीरता और शरीर के प्रभावित हिस्सों के बारे में अधिक स्पष्ट जानकारी मिल सकती है।
मध्य प्रदेश की प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) समीता राजोरा के अनुसार, चीता जीवित है और प्रतिक्रिया दे रहा है। उन्होंने बताया कि विस्तृत जांच के बाद ही उसकी हालत के बारे में स्पष्ट जानकारी दी जा सकेगी।घायल चीते के उपचार के लिए जबलपुर से एक विशेषज्ञ पशु चिकित्सक के कूनो पहुंचने की भी जानकारी दी गई है। वन विभाग का प्रयास है कि उसे समय पर बेहतर चिकित्सा उपलब्ध कराई जाए।
क्या घायल चीता निर्वा का ही शावक है?
उपलब्ध जानकारी में घायल चीते को मादा निर्वा का 19 माह का नर शावक बताया जा रहा है। हालांकि, कुछ मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, वन विभाग के अधिकारी फिलहाल घायल चीते की पहचान को लेकर आधिकारिक पुष्टि करने से बच रहे हैं।ऐसे में उसकी पहचान की अंतिम पुष्टि होने तक सावधानी बरतना जरूरी है। वन विभाग की निगरानी संबंधी जानकारी और चिकित्सकीय परीक्षण से इस बारे में अधिक स्पष्टता आने की उम्मीद है।
कूनो में फिलहाल 53 चीते
कूनो राष्ट्रीय उद्यान भारत में चीता पुनर्वास परियोजना का प्रमुख केंद्र है। यहां अफ्रीका से लाए गए चीतों के साथ भारत में जन्मे शावकों की भी देखभाल की जा रही है।मध्य प्रदेश की प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) समीता राजोरा के अनुसार, कूनो में फिलहाल 53 चीते हैं, जिनमें 40 भारत में जन्मे हैं।चीतों के प्रजनन और नए शावकों के जन्म के कारण इस परियोजना को महत्वपूर्ण सफलता मिली है, लेकिन जंगल में स्वतंत्र रूप से घूमने वाले चीतों की निगरानी, स्वास्थ्य और सुरक्षा अभी भी बड़ी चुनौती है।
पहाड़गढ़ क्षेत्र की भी जांच के दायरे में भूमिका
जिस क्षेत्र में घायल चीता मिला है, वह मुरैना वन मंडल के पहाड़गढ़ रेंज के अंतर्गत आता है। इस इलाके में हाल के समय में कथित तेंदुआ शिकार से जुड़ा मामला भी चर्चा में रहा था।हालांकि, वन अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि पहले सामने आए कथित शिकार प्रकरण और इस चीते की चोटों के बीच किसी संबंध की पुष्टि नहीं हुई है।इसलिए दोनों घटनाओं को जोड़कर देखना अभी उचित नहीं होगा। मौजूदा मामले में जांच दल अलग-अलग संभावनाओं की पड़ताल कर रहा है।
वन विभाग के सामने शावक को स्वस्थ करने की चुनौती
फिलहाल वन विभाग की प्राथमिकता घायल चीते को उचित उपचार उपलब्ध कराना और उसकी स्थिति को स्थिर करना है। इसके बाद ही यह तय हो सकेगा कि उसे कितने समय तक चिकित्सा केंद्र में रखना होगा और वह दोबारा सामान्य रूप से जंगल में लौटने की स्थिति में कब आएगा।मध्य प्रदेश में चीता पुनर्वास परियोजना के लिए हर चीते का सुरक्षित रहना महत्वपूर्ण है। ऐसे में इस शावक की चोटों की वजह और उसके स्वास्थ्य में सुधार पर विशेष नजर रखी जा रही है।