रतलाम में एकलव्य स्कूल के विद्यार्थी 20 किमी पैदल चलकर पहुंचे कलेक्ट्रेट
रतलाम। मध्य प्रदेश के रतलाम जिले में शिक्षा और छात्रावास की व्यवस्थाओं से परेशान सैलाना स्थित एकलव्य मॉडल स्कूल के विद्यार्थियों ने सोमवार को अपनी समस्याएं प्रशासन तक पहुंचाने के लिए अनोखा कदम उठाया। विद्यार्थी करीब 20 किलोमीटर पैदल चलकर रतलाम कलेक्ट्रेट पहुंचे और अधिकारियों को लिखित शिकायत सौंपकर अपनी परेशानियों से अवगत कराया। विद्यार्थियों का आरोप है कि स्कूल में शिक्षक समय पर नहीं आते, जिससे उनकी पढ़ाई प्रभावित हो रही है। इसके अलावा छात्रावास में साफ-सफाई और अन्य बुनियादी सुविधाओं की स्थिति भी संतोषजनक नहीं है। विद्यार्थियों ने कलेक्टर से मुलाकात करने की मांग की, लेकिन उनके शहर से बाहर होने की जानकारी मिलने के बाद भी वे कलेक्ट्रेट परिसर में बैठे रहे। उनके साथ आदिवासी संगठन जयस के पदाधिकारी भी मौजूद थे।
20 किलोमीटर पैदल चलकर कलेक्ट्रेट पहुंचे विद्यार्थी
सैलाना कस्बे में स्थित एकलव्य मॉडल स्कूल के विद्यार्थियों ने सोमवार को अपनी शिकायत प्रशासन तक पहुंचाने के लिए पैदल यात्रा की।
विद्यार्थी करीब 20 किलोमीटर की दूरी तय कर रतलाम कलेक्ट्रेट पहुंचे। उनका कहना है कि स्कूल और छात्रावास में लंबे समय से समस्याएं बनी हुई हैं, लेकिन अपेक्षित समाधान नहीं होने के कारण उन्हें अधिकारियों के सामने अपनी बात रखने के लिए यह कदम उठाना पड़ा।
कलेक्ट्रेट पहुंचने के बाद विद्यार्थियों ने अपनी समस्याओं से संबंधित लिखित शिकायत अधिकारियों को सौंपी।
उन्होंने कलेक्टर से मुलाकात कर अपनी परेशानियां बताने की मांग भी की।
शिक्षकों के समय पर नहीं आने का आरोप
विद्यार्थियों की प्रमुख शिकायत स्कूल में शिक्षकों की अनियमित उपस्थिति को लेकर है।
उनका आरोप है कि शिक्षक समय पर कक्षाओं में नहीं पहुंचते, जिसके कारण पढ़ाई प्रभावित होती है।
विद्यार्थियों का कहना है कि नियमित रूप से कक्षाएं संचालित नहीं होने से पाठ्यक्रम पूरा करने और विषयों को समझने में कठिनाई होती है।
स्कूलों में शिक्षकों की नियमित उपस्थिति और समय पर कक्षाएं लगना विद्यार्थियों की पढ़ाई के लिए आवश्यक है।
हालांकि शिक्षकों की अनुपस्थिति की वास्तविक स्थिति और इस संबंध में स्कूल प्रबंधन का पक्ष अभी सामने नहीं आया है। शिकायत के तथ्यों की जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
छात्रावास की साफ-सफाई पर भी सवाल
विद्यार्थियों ने स्कूल की पढ़ाई के साथ छात्रावास की व्यवस्थाओं को लेकर भी शिकायत की है।
उनका कहना है कि छात्रावास में साफ-सफाई और अन्य बुनियादी सुविधाओं की स्थिति संतोषजनक नहीं है।
छात्रावास में रहने वाले विद्यार्थियों के लिए स्वच्छ वातावरण, साफ पानी, उचित भोजन और अन्य जरूरी सुविधाएं महत्वपूर्ण होती हैं।
यदि इन व्यवस्थाओं में कमी रहती है, तो विद्यार्थियों को रोजमर्रा की जिंदगी में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
हालांकि छात्रावास में किन-किन सुविधाओं की कमी है, इसका विस्तृत विवरण विद्यार्थियों की ओर से दी गई शिकायत की जांच के बाद ही सामने आ सकेगा।
एक महीने से परेशान होने का दावा
विद्यार्थियों का कहना है कि वे करीब एक महीने से इन समस्याओं का सामना कर रहे हैं।
उनके अनुसार, शिकायतों के बावजूद अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने के कारण उन्हें प्रशासन के पास पहुंचने का निर्णय लेना पड़ा।
विद्यार्थियों ने अधिकारियों को लिखित शिकायत देकर समस्याओं के समाधान की मांग की है।
उनका कहना है कि वे चाहते हैं कि स्कूल में नियमित रूप से पढ़ाई हो और छात्रावास की व्यवस्थाएं बेहतर बनाई जाएं।
हालांकि पहले की शिकायतें कब और किस अधिकारी को दी गई थीं, इसकी विस्तृत जानकारी उपलब्ध नहीं है।
कलेक्टर के शहर से बाहर होने की मिली जानकारी
कलेक्ट्रेट पहुंचने के बाद विद्यार्थियों ने कलेक्टर से मुलाकात करने की मांग की।
उन्हें जानकारी मिली कि कलेक्टर उस समय शहर से बाहर हैं।
इसके बावजूद विद्यार्थी कलेक्ट्रेट परिसर में बैठे रहे।
वे अपनी शिकायत पर अधिकारियों का ध्यान आकर्षित करना चाहते थे और समस्याओं के समाधान के लिए ठोस कार्रवाई की उम्मीद कर रहे थे।
हालांकि कलेक्टर की अनुपस्थिति में किस अधिकारी ने विद्यार्थियों की शिकायत प्राप्त की और प्रशासन की ओर से क्या आश्वासन दिया गया, इसकी विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है।
जयस के पदाधिकारी भी रहे मौजूद
विद्यार्थियों के साथ आदिवासी संगठन जयस के पदाधिकारी भी कलेक्ट्रेट पहुंचे।
उन्होंने विद्यार्थियों की समस्याओं को प्रशासन के सामने रखने में उनका साथ दिया।
आदिवासी क्षेत्रों में संचालित आवासीय विद्यालयों में शिक्षा और छात्रावास की व्यवस्था महत्वपूर्ण है, क्योंकि यहां पढ़ने वाले विद्यार्थियों का बड़ा हिस्सा स्कूल परिसर में ही रहता है।
ऐसे में शिक्षकों की नियमित उपस्थिति और छात्रावास में बुनियादी सुविधाओं का बेहतर होना जरूरी है।
हालांकि जयस के पदाधिकारियों की ओर से इस मामले में कोई विस्तृत आधिकारिक बयान उपलब्ध नहीं है।
आवासीय विद्यालयों में सुविधाएं जरूरी
एकलव्य मॉडल स्कूलों का उद्देश्य विद्यार्थियों को शिक्षा के साथ आवश्यक आवासीय सुविधाएं उपलब्ध कराना है।
इन स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के लिए पढ़ाई का नियमित संचालन, प्रशिक्षित शिक्षक और छात्रावास की अच्छी व्यवस्था महत्वपूर्ण होती है।
विद्यार्थियों की शिकायतों पर समय रहते ध्यान दिया जाए, तो समस्याओं का समाधान किया जा सकता है।
शैक्षणिक व्यवस्था के साथ छात्रावास की साफ-सफाई और अन्य सुविधाओं की नियमित निगरानी भी जरूरी है।
प्रशासन की जांच पर टिकी नजर
विद्यार्थियों ने अपनी शिकायत अधिकारियों को सौंप दी है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन उनकी समस्याओं पर क्या कदम उठाता है।
शिकायतों की जांच के दौरान स्कूल में शिक्षकों की उपस्थिति, कक्षाओं के संचालन और छात्रावास की व्यवस्थाओं की समीक्षा की जा सकती है।
यदि किसी स्तर पर कमी पाई जाती है, तो संबंधित अधिकारियों को सुधार के निर्देश दिए जा सकते हैं।
हालांकि फिलहाल किसी जांच के आदेश या कार्रवाई की आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है।
विद्यार्थियों की मांग- पढ़ाई और सुविधाएं बेहतर हों
विद्यार्थियों का कहना है कि वे करीब एक महीने से परेशानियों का सामना कर रहे हैं और अब अपनी समस्याओं का समाधान चाहते हैं।
करीब 20 किलोमीटर पैदल चलकर कलेक्ट्रेट पहुंचने का उनका कदम इसी नाराजगी को सामने लाता है।
उनकी प्रमुख मांग है कि शिक्षक नियमित रूप से कक्षाएं लें और छात्रावास में साफ-सफाई सहित जरूरी सुविधाएं बेहतर की जाएं।
सैलाना के एकलव्य मॉडल स्कूल के विद्यार्थियों ने सोमवार को अपनी समस्याओं को लेकर प्रशासन तक आवाज पहुंचाई। अब विद्यार्थियों की नजर इस बात पर है कि उनकी लिखित शिकायत पर क्या कार्रवाई होती है और स्कूल तथा छात्रावास की व्यवस्थाओं में कब तक सुधार किया जाता है।