इंदौर : मशहूर रैपर और गायक हनी सिंह के इंदौर कॉन्सर्ट से जुड़ा मनोरंजन कर विवाद एक बार फिर सुर्खियों में है। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर पीठ ने मामले में पहले दिए गए उस आदेश को वापस ले लिया है, जिसके तहत आयोजकों की याचिका वापस लेने की अनुमति दी गई थी। कोर्ट ने पुरानी याचिका को फिर से बहाल कर दिया है। अब इस मामले की दोबारा सुनवाई होगी और मनोरंजन कर की गणना तथा आयोजकों की ओर से दिए गए आश्वासन से जुड़े पहलुओं पर मेरिट के आधार पर विचार किया जाएगा।
मामला हनी सिंह के इंदौर में आयोजित कॉन्सर्ट से जुड़ा है। कॉन्सर्ट के बाद इंदौर नगर निगम और कार्यक्रम के आयोजकों के बीच मनोरंजन कर को लेकर विवाद सामने आया था। नगर निगम ने आयोजकों पर मनोरंजन कर की देनदारी बताते हुए भुगतान की मांग की थी। राशि जमा नहीं होने के बाद निगम की ओर से कार्यक्रम में इस्तेमाल किए गए साउंड सिस्टम को जब्त करने की कार्रवाई भी की गई थी। इसके बाद कार्यक्रम से जुड़े आयोजकों ने हाईकोर्ट का रुख किया और निगम की ओर से की गई टैक्स गणना को चुनौती दी।
मामले की सुनवाई के दौरान आयोजकों को अंतरिम राहत मिली थी। इस दौरान आयोजकों की ओर से अदालत के सामने टैक्स और अन्य देनदारियों को लेकर एक अंडरटेकिंग यानी लिखित आश्वासन दिया गया था। नगर निगम का कहना था कि आयोजकों ने अदालत को भरोसा दिलाया था कि चार्टर्ड अकाउंटेंट की ओर से तैयार की गई ऑडिट रिपोर्ट के आधार पर निर्धारित टैक्स का भुगतान किया जाएगा। निगम के मुताबिक ऑडिट रिपोर्ट में 3 करोड़ 52 लाख 61 हजार 923 रुपये की राशि पर टैक्स निर्धारित किया जाना था।
बाद में आयोजकों की ओर से याचिका वापस लेने का आवेदन दिया गया था, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया था। हालांकि, अब हाईकोर्ट ने इस पूरे मामले पर दोबारा विचार करते हुए पहले दिए गए आदेश को वापस ले लिया है। कोर्ट ने माना कि अंतरिम राहत प्राप्त करते समय याचिकाकर्ताओं की ओर से दिए गए आश्वासन और उससे जुड़ी देनदारियों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। याचिका वापस लेने से पहले यह देखना जरूरी है कि अदालत के सामने दिए गए आश्वासन का पालन हुआ या नहीं।
मनोरंजन कर को लेकर विवाद की शुरुआत तब हुई जब इंदौर नगर निगम ने आयोजकों से 50 लाख रुपये मनोरंजन कर जमा कराने को कहा था। यह मांग 8 मार्च 2025 को की गई थी। निर्धारित राशि जमा नहीं होने पर निगम ने कार्यक्रम से जुड़े साउंड सिस्टम को जब्त कर लिया था। आयोजकों ने नगर निगम की ओर से की गई टैक्स गणना पर सवाल उठाते हुए कहा था कि निगम ने जिस रकम को मनोरंजन कर की गणना का आधार बनाया है, वह केवल इंदौर में आयोजित कार्यक्रम की टिकट बिक्री से संबंधित नहीं थी।
आयोजकों की ओर से अदालत में यह तर्क दिया गया था कि जीएसटी पोर्टल पर दिखाई गई 3 करोड़ 28 लाख 1 हजार 174 रुपये की राशि को मनोरंजन कर की गणना का आधार बनाया गया। उनका कहना था कि यह रकम केवल इंदौर के कार्यक्रम की नहीं, बल्कि देशभर में आयोजित किए गए करीब 10 कार्यक्रमों से संबंधित थी। आयोजकों के अनुसार इंदौर में टिकट बिक्री से प्राप्त वास्तविक रकम 78 लाख 47 हजार 637 रुपये थी।
आयोजकों ने इसी राशि को आधार मानकर मनोरंजन कर की देनदारी का अलग हिसाब बताया था। उनका दावा था कि इंदौर में टिकट बिक्री से प्राप्त 78 लाख 47 हजार 637 रुपये पर 10 प्रतिशत की दर से मनोरंजन कर लगभग 7 लाख 84 हजार 764 रुपये बनता है। इस तरह आयोजकों और नगर निगम के बीच टैक्स की गणना को लेकर बड़ा अंतर सामने आया।
हाईकोर्ट ने अब मामले को फिर से सुनवाई के लिए बहाल कर दिया है। अदालत ने 17 नवंबर 2025 को याचिका वापस लेने से संबंधित अपने आदेश को वापस लेते हुए पुरानी याचिका को बहाल किया है। इसका मतलब है कि अब आयोजकों और नगर निगम के बीच मनोरंजन कर की गणना को लेकर उठे मूल विवाद पर अदालत विस्तार से सुनवाई कर सकेगी।
इस मामले में आगे की सुनवाई के दौरान यह देखा जाएगा कि मनोरंजन कर किस राशि पर लगाया जाना चाहिए था और आयोजकों की ओर से अदालत में दिए गए आश्वासन का कितना पालन हुआ। साथ ही, देशभर में आयोजित कार्यक्रमों की आय और इंदौर में हुई टिकट बिक्री को अलग-अलग रखने से संबंधित आयोजकों के दावे पर भी विचार किया जा सकता है।
फिलहाल हाईकोर्ट के इस फैसले से हनी सिंह के इंदौर कॉन्सर्ट से जुड़ा पुराना मनोरंजन कर विवाद फिर सक्रिय हो गया है। अब मामले की अगली सुनवाई में अदालत दोनों पक्षों की दलीलें सुनकर टैक्स देनदारी और उससे जुड़े अन्य कानूनी पहलुओं पर निर्णय की दिशा तय करेगी। जब तक अंतिम फैसला नहीं आता, आयोजकों और नगर निगम के बीच टैक्स राशि को लेकर विवाद जारी रहेगा।
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