'तिलक लगाएं, जय श्री राम बोलें, नितेश राणे ने दिवाली पर हिंदुओं से की बड़ी अपील
मुंबई। महाराष्ट्र सरकार के मंत्री और भारतीय जनता पार्टी के नेता नितेश राणे एक बार फिर अपने बयान को लेकर राजनीतिक विवादों में घिर गए हैं। दिवाली के त्योहार से पहले उन्होंने हिंदू समुदाय के लोगों से अपील की है कि वे त्योहार की खरीदारी करते समय दुकानदारों की धार्मिक पहचान को प्राथमिकता दें। मंगलवार, 27 अक्टूबर 2026 को मुंबई में समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत के दौरान राणे ने कहा कि हिंदुओं को ऐसे दुकानदारों से सामान खरीदना चाहिए, जो माथे पर तिलक लगाते हों, 'जय श्री राम' बोलते हों और जिन्हें हनुमान चालीसा या महाआरती का पाठ करना आता हो। उनके इस बयान ने धार्मिक पहचान के आधार पर खरीदारी करने की अपील को लेकर नई बहस छेड़ दी है। विपक्षी नेताओं ने भी इस तरह की टिप्पणियों पर आपत्ति जताई है।
दिवाली की खरीदारी को लेकर नितेश राणे की अनोखी अपील
महाराष्ट्र के मत्स्य पालन एवं बंदरगाह विकास मंत्री नितेश राणे ने दिवाली की खरीदारी को लेकर हिंदू समाज के लोगों को विशेष सलाह दी है।
उन्होंने कहा कि त्योहार के लिए पटाखे और अन्य सामान खरीदते समय लोगों को दुकानदारों की धार्मिक परंपराओं पर ध्यान देना चाहिए।
राणे के मुताबिक, हिंदुओं को ऐसे व्यापारियों को प्राथमिकता देनी चाहिए, जो माथे पर तिलक लगाते हैं और हिंदू धार्मिक प्रार्थनाओं से परिचित हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि दुकानदार को हनुमान चालीसा या महाआरती का पाठ करना आना चाहिए।
राणे ने अपनी इस अपील को हिंदू समाज के आर्थिक हितों से जोड़कर प्रस्तुत किया। हालांकि, किसी व्यक्ति की धार्मिक पहचान के आधार पर खरीदारी करने की बात को लेकर विवाद खड़ा हो गया है।
'जय श्री राम बोलने वालों से खरीदें सामान'
मंगलवार को पत्रकारों से बातचीत के दौरान नितेश राणे ने अपनी अपील को विस्तार से समझाया।
उन्होंने कहा कि दिवाली के अवसर पर हिंदू समाज के लोग ऐसे दुकानदारों से सामान खरीदें, जो 'जय श्री राम' का उद्घोष करते हों और धार्मिक परंपराओं का पालन करते हों।
राणे ने दुकानदारों के लिए तिलक लगाने और हनुमान चालीसा जानने की बात भी कही।
उन्होंने यह अपील पटाखों और त्योहार से संबंधित अन्य वस्तुओं की खरीदारी के संदर्भ में की।
यह उनका राजनीतिक बयान और व्यक्तिगत आग्रह है। सरकार की ओर से दिवाली की खरीदारी के लिए इस प्रकार का कोई आधिकारिक नियम घोषित नहीं किया गया है।
रमजान का उदाहरण देकर किया अपने बयान का बचाव
नितेश राणे ने अपनी टिप्पणी के समर्थन में रमजान के दौरान होने वाली व्यापारिक गतिविधियों का भी उदाहरण दिया।
उन्होंने सवाल उठाया कि क्या हिंदुओं को रमजान के दौरान दुकाने लगाने की अनुमति मिलती है।
इस तुलना के आधार पर उन्होंने कहा कि यदि हिंदू समाज अपने समुदाय के दुकानदारों से खरीदारी करना चाहता है, तो इसमें कोई गलत बात नहीं होनी चाहिए।
हालांकि, रमजान के दौरान हिंदू व्यापारियों पर सामान्य प्रतिबंध होने के उनके संकेत के समर्थन में कोई विशिष्ट सरकारी नियम या आधिकारिक प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया गया।
धार्मिक आयोजनों में बाजारों की व्यवस्था और व्यापार करने की अनुमति संबंधित स्थानीय नियमों के अनुसार निर्धारित होती है।
गैर-हिंदू दुकानदारों से खरीदारी पर भी दिया बयान
मंत्री नितेश राणे ने केवल हिंदू दुकानदारों को प्राथमिकता देने की बात ही नहीं कही, बल्कि गैर-हिंदू व्यापारियों से खरीदारी को लेकर भी टिप्पणी की।
उन्होंने अपने बयान में 'जिहाद' जैसे शब्द का इस्तेमाल करते हुए धार्मिक पहचान के आधार पर व्यापार करने का तर्क दिया।
इस प्रकार की टिप्पणी को लेकर सवाल उठे हैं कि क्या त्योहारों के दौरान ग्राहकों को दुकानदारों के धर्म के आधार पर निर्णय लेने के लिए प्रोत्साहित करना उचित है।
भारत में अलग-अलग समुदायों के व्यापारी वर्षों से धार्मिक त्योहारों के दौरान सामान बेचते रहे हैं।
दिवाली के बाजारों में पटाखों, सजावट, कपड़ों, मिठाइयों और अन्य उत्पादों की बिक्री विभिन्न पृष्ठभूमियों के दुकानदार करते हैं।
ऐसे में राणे की अपील व्यापार और धार्मिक पहचान के संबंध को लेकर चर्चा का विषय बन गई है।
नासिक कुंभ मेले को लेकर भी उठाई मांग
नितेश राणे ने दिवाली की खरीदारी के अलावा नासिक में आयोजित होने वाले सिंहस्थ कुंभ मेले को लेकर भी बयान दिया।
उन्होंने मांग की कि कुंभ मेले के दौरान धार्मिक आयोजन और उससे जुड़ी व्यावसायिक गतिविधियों में हिंदुओं को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
इससे पहले 24 अक्टूबर को नवी मुंबई के जुईनगर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कुंभ मेले में गैर-हिंदू व्यापारियों को दुकानें लगाने से रोकने की मांग की थी।
राणे ने तर्क दिया कि धार्मिक आयोजनों के दौरान संबंधित समुदाय के व्यापारियों को अवसर दिए जाने चाहिए।
हालांकि, किसी धार्मिक आयोजन में व्यापारिक अनुमति से संबंधित निर्णय प्रशासनिक और कानूनी प्रावधानों के अनुसार ही किए जा सकते हैं।
विपक्ष ने धार्मिक आधार पर व्यापार की अपील पर जताई आपत्ति
नितेश राणे की टिप्पणियों के बाद विपक्षी नेताओं ने उनके रुख की आलोचना की है।
विपक्ष का कहना है कि धार्मिक पहचान के आधार पर खरीदारी करने की अपील समाज में विभाजन पैदा कर सकती है।
रिपोर्टों के अनुसार, विपक्षी नेताओं ने राणे से अपनी टिप्पणियों के लिए सार्वजनिक माफी मांगने की भी मांग की है।
आलोचकों का तर्क है कि व्यापारिक गतिविधियों में किसी समुदाय को धार्मिक आधार पर अलग करना सामाजिक सद्भाव के लिए उचित नहीं है।
दूसरी ओर, राणे अपने बयान को हिंदू व्यापारियों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने की अपील के रूप में प्रस्तुत कर रहे हैं।
इस विवाद में एक ओर समुदाय आधारित आर्थिक समर्थन का तर्क है, तो दूसरी ओर धार्मिक भेदभाव और समान व्यापारिक अवसरों से जुड़े सवाल हैं।
पहले भी हनुमान चालीसा को लेकर दे चुके हैं बयान
यह पहली बार नहीं है जब नितेश राणे ने दुकानदारों की धार्मिक पहचान और हनुमान चालीसा को लेकर टिप्पणी की है।
अप्रैल 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के बाद उन्होंने कहा था कि हिंदुओं को खरीदारी करने से पहले दुकानदार का धर्म पूछना चाहिए।
उस दौरान उन्होंने यह भी कहा था कि दुकानदार से हनुमान चालीसा पढ़ने के लिए कहा जा सकता है।
उनके उस बयान पर भी राजनीतिक विवाद हुआ था।
अब अक्टूबर 2026 में दिवाली से पहले उन्होंने एक बार फिर इसी तरह की अपील की है।
इससे स्पष्ट है कि धार्मिक पहचान के आधार पर खरीदारी का मुद्दा राणे के राजनीतिक बयानों में पहले भी सामने आता रहा है।
किसानों को आर्थिक सहायता पर भी बोले मंत्री
धार्मिक और व्यापारिक मुद्दों के अलावा नितेश राणे ने महाराष्ट्र सरकार की किसान सहायता योजना पर भी बात की।
उन्होंने दावा किया कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व वाली सरकार ने किसानों की सहायता के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं।
राणे के अनुसार, त्योहार से पहले किसानों को पांच हजार रुपये की शुरुआती सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।
उन्होंने कहा कि यह पहली किस्त है और आगे भी सहायता देने की योजना है।
मंत्री ने दावा किया कि वर्तमान सरकार किसानों और मछुआरों के आर्थिक हितों को प्राथमिकता दे रही है।
हालांकि, उनकी सरकार द्वारा दी जा रही सहायता की तुलना पूर्ववर्ती सरकारों से करने संबंधी दावे का स्वतंत्र आकलन अलग विषय है।
धार्मिक पहचान और कारोबार को लेकर उठे सवाल
नितेश राणे के बयान ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा किया है कि क्या त्योहारों के दौरान खरीदारी का आधार दुकानदार की धार्मिक पहचान होनी चाहिए।
भारत में नागरिकों को अपनी पसंद के सामान और दुकानदार का चयन करने की स्वतंत्रता है।
साथ ही, संविधान सभी नागरिकों को कानून के समक्ष समानता और निर्धारित कानूनी शर्तों के तहत व्यवसाय करने की स्वतंत्रता प्रदान करता है।
किसी दुकान से सामान खरीदना या नहीं खरीदना ग्राहक का व्यक्तिगत निर्णय हो सकता है, लेकिन धार्मिक पहचान के आधार पर पूरे समुदाय के व्यापारियों से दूरी बनाने की अपील सामाजिक और राजनीतिक विवाद पैदा कर सकती है।
विशेषज्ञ दृष्टिकोण से भी इस प्रकार की टिप्पणियों का मूल्यांकन संवैधानिक समानता, धार्मिक स्वतंत्रता और सामाजिक सद्भाव के संदर्भ में किया जाना जरूरी है।
दिवाली से पहले महाराष्ट्र में बढ़ी राजनीतिक हलचल
दिवाली के त्योहार से पहले महाराष्ट्र में नितेश राणे का बयान चर्चा का विषय बन गया है।
राणे अपनी टिप्पणियों को हिंदू व्यापारियों के आर्थिक हितों से जोड़ रहे हैं, जबकि विपक्ष इसे धार्मिक आधार पर समाज को बांटने वाली अपील बता रहा है।
फिलहाल महाराष्ट्र सरकार ने दुकानदारों की धार्मिक पहचान के आधार पर खरीदारी करने से जुड़ा कोई आधिकारिक आदेश जारी नहीं किया है।
ऐसे में राणे का बयान एक राजनीतिक अपील के रूप में ही देखा जा रहा है।
अब देखना होगा कि इस बयान को लेकर महाराष्ट्र की राजनीति में आगे क्या प्रतिक्रिया सामने आती है और क्या राणे अपनी टिप्पणी पर कोई अतिरिक्त स्पष्टीकरण देते हैं।