मुंबई। महाराष्ट्र में आदिवासी समुदायों की विभिन्न मांगों को लेकर हुए बड़े आंदोलन के बाद मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने प्रशासनिक कार्रवाई तेज करने के निर्देश दिए हैं। बुधवार, 28 अक्टूबर 2026 को मुंबई के मंत्रालय में आदिवासी समुदायों से जुड़े शिक्षा, वन अधिकार, भूमि, पुनर्वास, पेयजल, आधार पंजीकरण और श्रमिक कल्याण जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों की समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने संबंधित विभागों को इन समस्याओं के समाधान के लिए विस्तृत प्रस्ताव और समयबद्ध कार्ययोजना तैयार करने को कहा है। इससे पहले मंगलवार को हजारों आदिवासियों ने अपनी मांगों को लेकर मुंबई स्थित मंत्रालय तक मार्च शुरू किया था। सरकार की ओर से मांगों पर कार्रवाई का आश्वासन मिलने के बाद प्रदर्शनकारियों ने आंदोलन वापस ले लिया। मुख्यमंत्री ने वन अधिकार अधिनियम के अंतर्गत पात्र लंबित दावों का निपटारा करने के लिए 15 दिसंबर तक विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं।

आदिवासियों की समस्याओं पर मुख्यमंत्री ने की समीक्षा


मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मंत्रालय में आयोजित बैठक के दौरान आदिवासी समुदायों की लंबित समस्याओं पर विभागीय अधिकारियों के साथ चर्चा की।

बैठक में शिक्षा, जमीन के अधिकार, पुनर्वास, स्वच्छ पेयजल और सरकारी दस्तावेजों से संबंधित कठिनाइयों को प्रमुखता से उठाया गया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आदिवासी समुदायों से संबंधित समस्याओं का समाधान तय समय के भीतर किया जाना चाहिए।

उन्होंने संबंधित विभागों को निर्देश दिया कि वे लंबित मामलों की समीक्षा करके आवश्यक प्रस्ताव तैयार करें।

इसके अतिरिक्त विभिन्न योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर भी जोर दिया गया।

करीब 49 हजार आदिवासियों ने शुरू किया था मार्च

महाराष्ट्र में आदिवासी अधिकारों को लेकर मंगलवार को बड़ा प्रदर्शन आयोजित किया गया था।

श्रमजीवी संगठन के संस्थापक विवेक पंडित के नेतृत्व में ‘संविधान हक संघर्ष मोर्चा’ निकाला गया।

इस आंदोलन में लगभग 49 हजार लोगों के शामिल होने की जानकारी सामने आई।

प्रदर्शनकारी ठाणे जिले के भिवंडी से मुंबई स्थित मंत्रालय की ओर बढ़ रहे थे।

आंदोलन में ठाणे, पालघर, रायगढ़ और नासिक सहित विभिन्न जिलों के आदिवासी समुदायों के लोग शामिल थे।

उनकी प्रमुख मांगों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, वन अधिकार अधिनियम के तहत लंबित दावों का निपटारा और आदिवासी बस्तियों में स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराना शामिल था।

सरकार के आश्वासन के बाद वापस लिया आंदोलन

आदिवासी संगठनों के प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात करके अपनी मांगें रखीं।

इसके बाद सरकार ने विभिन्न मुद्दों के समाधान के लिए कार्रवाई का आश्वासन दिया।

मंगलवार देर रात उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ठाणे के खारीगांव टोल प्लाजा पहुंचे।

उन्होंने प्रदर्शनकारियों को सरकार द्वारा जारी किए गए विभिन्न शासन निर्णयों की जानकारी दी।

इस दौरान उन्होंने संगठन के प्रतिनिधियों को संबंधित सरकारी आदेशों की प्रतियां भी सौंपीं।

सरकार की ओर से 14 शासन निर्णय जारी किए जाने की जानकारी सामने आई है।

इसके बाद आदिवासी संगठनों ने मुंबई की ओर प्रस्तावित मार्च वापस लेने का फैसला किया।

वन अधिकार अधिनियम के दावों का होगा निपटारा

बैठक में वन अधिकार अधिनियम, 2006 के तहत लंबित दावों का मुद्दा प्रमुखता से उठा।

कई आदिवासी परिवार वन भूमि पर अपने पारंपरिक अधिकारों की मान्यता के लिए लंबे समय से आवेदन कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि पात्र व्यक्तिगत और सामुदायिक दावों के निपटारे में तेजी लाई जाए।

इसके लिए 15 दिसंबर 2026 तक विशेष अभियान चलाने की घोषणा की गई है।

अधिकारियों को ग्रामस्तरीय समितियों से स्वीकृत पात्र दावों का नियमानुसार निस्तारण सुनिश्चित करने को कहा गया।

हालांकि, प्रत्येक दावे पर अंतिम निर्णय संबंधित कानूनी प्रक्रिया और पात्रता के आधार पर ही लिया जाएगा।

आदिवासी बच्चों की शिक्षा पर विशेष ध्यान

आदिवासी संगठनों ने विद्यार्थियों को 18 वर्ष की आयु तक निःशुल्क और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने की मांग की है।

इसके अतिरिक्त प्रत्येक तालुका में विशेष शैक्षणिक परिसर स्थापित करने का प्रस्ताव भी रखा गया।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से इन मांगों का परीक्षण करने और आवश्यक प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए।

उन्होंने आदिवासी विद्यार्थियों को निःशुल्क ट्यूशन और पर्याप्त छात्रवृत्ति उपलब्ध कराने के लिए तत्काल कदम उठाने को कहा।

इसके साथ ही आश्रम विद्यालयों और आवासीय स्कूलों में रिक्त पदों को भरने पर भी जोर दिया गया।

सरकार का उद्देश्य विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक सुविधाएं उपलब्ध कराना है।

स्कूलों में शौचालय और खेल सुविधाओं की व्यवस्था

मुख्यमंत्री ने जिला परिषद के विद्यालयों में बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाने के निर्देश भी दिए।

उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों के लिए पर्याप्त कक्षाएं, स्वच्छ शौचालय और खेल सुविधाएं उपलब्ध होनी चाहिए।

लड़कियों और लड़कों के लिए अलग-अलग शौचालय बनाने पर विशेष जोर दिया गया।

इसके अतिरिक्त शिक्षकों की उपलब्धता और छात्रवृत्ति संबंधी योजनाओं की समीक्षा करने को कहा गया।

आदिवासी क्षेत्रों में शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए विद्यालयों के आधारभूत ढांचे का विकास महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

हालांकि, नई सुविधाओं के निर्माण और पदों को भरने की वास्तविक समय-सीमा संबंधित विभागों की कार्ययोजना से स्पष्ट होगी।

पेयजल की समस्या दूर करने के निर्देश

आदिवासी बस्तियों में स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराना भी बैठक का महत्वपूर्ण विषय रहा।

कई दूरदराज के क्षेत्रों में लोगों को नियमित पानी की आपूर्ति से जुड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ता है।

मुख्यमंत्री ने जलापूर्ति विभाग को इन समस्याओं का समाधान करने के लिए समयबद्ध योजना तैयार करने को कहा।

जल जीवन मिशन के अंतर्गत पात्र बस्तियों और परिवारों तक नल से जलापूर्ति पहुंचाने पर जोर दिया गया।

अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि वे संबंधित क्षेत्रों की आवश्यकताओं का आकलन करके काम में तेजी लाएं।

नियमित पेयजल व्यवस्था से ग्रामीण परिवारों को दैनिक जरूरतों के लिए पानी जुटाने में होने वाली परेशानी कम हो सकती है।

आधार पंजीकरण और जन्म प्रमाणपत्र की समस्याएं

बैठक में आधार कार्ड और जन्म प्रमाणपत्र से संबंधित परेशानियों पर भी चर्चा हुई।

दूरदराज के आदिवासी क्षेत्रों में कुछ परिवारों को आवश्यक दस्तावेज बनवाने में कठिनाई होती है।

इन दस्तावेजों की कमी के कारण सरकारी योजनाओं तक पहुंच प्रभावित हो सकती है।

मुख्यमंत्री ने आधार पंजीकरण से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए विशेष प्रयास करने के निर्देश दिए।

इसके अतिरिक्त जन्म प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया को सुगम बनाने से संबंधित प्रस्तावों पर भी चर्चा की गई।

अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि पात्र लोगों को आवश्यक दस्तावेज प्राप्त करने में अनावश्यक परेशानी न हो।

मुक्त बंधुआ मजदूरों के पुनर्वास पर भी जोर

आदिवासी समुदायों के साथ श्रमिक कल्याण और पुनर्वास के मुद्दों को भी प्राथमिकता दी गई।

बैठक में बंधुआ मजदूरी से मुक्त कराए गए परिवारों के पुनर्वास की आवश्यकता पर चर्चा हुई।

मुख्यमंत्री ने संबंधित अधिकारियों को पुनर्वास योजनाओं की समीक्षा करने और आवश्यक कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए।

ठाणे, पालघर, नासिक, पुणे, रायगढ़ और अहमदनगर जैसे जिलों से जुड़े मामलों पर विशेष ध्यान देने की बात सामने आई है।

पुनर्वास के लिए सुरक्षित आवास, आजीविका और आवश्यक सरकारी सहायता जैसी सुविधाएं महत्वपूर्ण होती हैं।

इन व्यवस्थाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से प्रभावित परिवारों को सामान्य जीवन में लौटने में सहायता मिल सकती है।

विकसित भारत 2047 की योजना में शामिल होंगे आदिवासी संगठन

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बैठक में कहा कि ‘विकसित भारत 2047’ के विजन दस्तावेज की तैयारी में सामाजिक संगठनों की भागीदारी भी सुनिश्चित की जाएगी।

इसके अंतर्गत श्रमजीवी संगठन और समर्थन संस्था को शामिल करने की बात कही गई।

आदिवासी समुदायों के विकास के लिए अलग कार्ययोजना तैयार करते समय विभिन्न संगठनों के सुझावों पर भी विचार किया जाएगा।

इसका उद्देश्य स्थानीय समस्याओं और वास्तविक जरूरतों को विकास योजनाओं में शामिल करना है।

सरकार का कहना है कि नीति निर्माण में संबंधित समुदायों की भागीदारी से योजनाओं को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।

समयबद्ध कार्रवाई पर रहेगी सबकी नजर

आदिवासी संगठनों के आंदोलन के बाद सरकार ने कई मुद्दों पर कार्रवाई शुरू करने के निर्देश दिए हैं।

हालांकि, शासन निर्णय जारी होने और योजनाओं के वास्तविक क्रियान्वयन के बीच कई प्रशासनिक प्रक्रियाएं पूरी करनी होती हैं।

ऐसे में संबंधित विभागों को बजट, पात्रता, दस्तावेजों के सत्यापन और कार्यों की समय-सीमा पर ध्यान देना होगा।

आदिवासी संगठनों के लिए वन अधिकार संबंधी दावों का निपटारा, बेहतर शिक्षा और पेयजल की उपलब्धता प्रमुख मुद्दे बने हुए हैं।

मुख्यमंत्री के निर्देशों के बाद अब 15 दिसंबर तक वन अधिकारों से जुड़े पात्र लंबित दावों के निस्तारण और अन्य योजनाओं की प्रगति पर विशेष नजर रहेगी।

Tags: