मां की मौत के बाद गहरे सदमे में थे गोविंदा, बोले- लगा सब खत्म हो गया नर्मदा में चले गए थे
मुंबई। बॉलीवुड अभिनेता गोविंदा ने अपनी जिंदगी के सबसे मुश्किल और दर्दनाक दौर को याद करते हुए मां निर्मला देवी के निधन से जुड़ी भावुक बातें साझा की हैं। अभिनेता ने बताया कि मां की मौत का उन पर इतना गहरा असर पड़ा था कि वह लंबे समय तक इस सदमे से उबर नहीं पाए। उन्होंने कहा कि उस समय उन्हें ऐसा महसूस होता था जैसे उनकी जिंदगी में सब कुछ खत्म हो गया हो।
गोविंदा ने बताया कि मां के निधन के बाद उनका मानसिक और भावनात्मक संतुलन बुरी तरह प्रभावित हुआ था। वह अपनी मां से बेहद करीब थे और उनके जाने के बाद पैदा हुए खालीपन को स्वीकार करना उनके लिए बेहद मुश्किल था। इसी भावनात्मक स्थिति में एक बार वह नर्मदा नदी में भी चले गए थे। उन्हें उम्मीद थी कि शायद किसी तरह उन्हें अपनी मां से दोबारा मिलने का अवसर मिल सके।
अभिनेता ने अपने उस दौर को याद करते हुए कहा कि वह बेहद गहरे दर्द से गुजर रहे थे। उनके अनुसार, उस समय उन्हें लगता था कि जीवन में अब कुछ भी बाकी नहीं है। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि उस दौर में उनके मन में आत्महत्या के विचार तक आए थे।
मां से बेहद गहरा था रिश्ता
गोविंदा की मां निर्मला देवी हिंदुस्तानी शास्त्रीय गायिका और अभिनेत्री थीं। उनका निधन 15 जून 1996 को 69 वर्ष की उम्र में हुआ था। मां के निधन के समय गोविंदा अपने फिल्मी करियर में सक्रिय थे और हिंदी सिनेमा में उनकी लोकप्रियता लगातार बढ़ रही थी।
पेशेवर जीवन में सफलता के बावजूद निजी जिंदगी में मां का जाना उनके लिए बड़ा आघात था। गोविंदा ने बताया कि मां उनके लिए केवल परिवार की सदस्य नहीं थीं, बल्कि भावनात्मक सहारा भी थीं। उनके निधन के बाद अभिनेता को ऐसा लगा जैसे उन्होंने अपना सबसे महत्वपूर्ण सहारा खो दिया हो।
मां की यादों और उनके साथ बिताए समय का गोविंदा के जीवन पर गहरा प्रभाव रहा। उन्होंने जिस तरह अपने उस दौर को याद किया, उससे पता चलता है कि किसी करीबी व्यक्ति को खोने का दर्द उनके लिए कितना गहरा था।
‘मुझे लगा सब कुछ खत्म हो गया’
गोविंदा ने अपनी भावनात्मक स्थिति को याद करते हुए बताया कि उस समय वह बेहद तकलीफ में थे। उन्होंने कहा कि उन्हें ऐसा महसूस होता था कि अब जिंदगी में आगे बढ़ने का कोई रास्ता नहीं बचा है।
अभिनेता के मुताबिक, मां की मौत के बाद वह इस कदर टूट गए थे कि उन्हें हर चीज निरर्थक लगने लगी थी। उन्होंने बताया कि उनके मन में ऐसे विचार आने लगे थे, जिनसे पता चलता है कि वह कितने गंभीर मानसिक तनाव से गुजर रहे थे।
नर्मदा नदी तक पहुंचने की घटना को याद करते हुए गोविंदा ने बताया कि उस समय उनका मन अपनी मां से दोबारा मिलने की इच्छा से भरा हुआ था। यह घटना उनके जीवन के उन सबसे भावुक क्षणों में से एक थी, जिसे वह आज भी याद करते हैं।
सफलता के बीच निजी जिंदगी का दर्द
गोविंदा का फिल्मी करियर 1990 के दशक में बुलंदियों पर था। उनकी फिल्मों, अभिनय और डांस को दर्शकों से खूब पसंद किया जाता था। पर्दे पर वह अपनी कॉमेडी और ऊर्जावान अंदाज से दर्शकों को हंसाते थे, लेकिन निजी जिंदगी में वह गहरे दुख से गुजर रहे थे।
यह विरोधाभास उनके जीवन के उस दौर को और मुश्किल बनाता था। एक तरफ उन्हें लगातार काम और सफलता मिल रही थी, वहीं दूसरी तरफ मां की मौत ने उन्हें अंदर से तोड़ दिया था।
कई कलाकारों की तरह गोविंदा ने भी अपने निजी दुख को लंबे समय तक सार्वजनिक रूप से विस्तार से साझा नहीं किया। अब जब उन्होंने उस दौर को याद किया है तो उनके प्रशंसकों को उनके व्यक्तित्व के उस पहलू के बारे में जानने का मौका मिला है, जो उनकी फिल्मी छवि से बिल्कुल अलग था।
निर्मला देवी की अपनी पहचान
निर्मला देवी केवल गोविंदा की मां के रूप में ही नहीं, बल्कि अपनी कला के लिए भी जानी जाती थीं। वह हिंदुस्तानी शास्त्रीय गायिका थीं और फिल्मों में भी काम कर चुकी थीं। संगीत और अभिनय से जुड़े उनके योगदान ने परिवार की सांस्कृतिक पृष्ठभूमि को मजबूत किया।
गोविंदा के जीवन में उनकी मां की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रही। अभिनेता ने कई मौकों पर अपने परिवार और मां से जुड़े भावनात्मक संबंधों का उल्लेख किया है। उनके लिए मां का निधन सिर्फ एक पारिवारिक क्षति नहीं था, बल्कि जीवन में एक बड़े सहारे का खत्म हो जाना था।
समय के साथ संभले अभिनेता
मां के निधन के बाद गोविंदा को उस गहरे दुख से बाहर आने में समय लगा। धीरे-धीरे उन्होंने खुद को संभाला और अपने काम पर ध्यान केंद्रित किया। फिल्मी करियर में आगे बढ़ते हुए उन्होंने दर्शकों का मनोरंजन जारी रखा और हिंदी सिनेमा में अपनी अलग पहचान कायम की।
हालांकि, मां की याद उनके जीवन का हमेशा महत्वपूर्ण हिस्सा बनी रही। उनके हालिया खुलासे से यह भी सामने आता है कि पर्दे पर हमेशा मुस्कुराने वाला कलाकार निजी जिंदगी में कितना गहरा दर्द झेल चुका है।
मानसिक स्वास्थ्य पर भी उठता है सवाल
गोविंदा का यह अनुभव इस बात की ओर भी ध्यान खींचता है कि किसी करीबी व्यक्ति की मौत का मानसिक स्वास्थ्य पर कितना गहरा असर पड़ सकता है। शोक की प्रक्रिया हर व्यक्ति के लिए अलग होती है और कई बार गहरा दुख व्यक्ति को बेहद कठिन भावनात्मक स्थिति में पहुंचा सकता है।
अभिनेता द्वारा अपने अनुभव को सार्वजनिक रूप से साझा करना इस मायने में भी महत्वपूर्ण है कि इससे लोगों को अपने मानसिक संघर्षों के बारे में बात करने की प्रेरणा मिल सकती है। मुश्किल दौर में परिवार, दोस्तों और पेशेवर मदद का सहारा लेना महत्वपूर्ण माना जाता है।
गोविंदा की मां निर्मला देवी को गुजरे करीब तीन दशक हो चुके हैं, लेकिन उनकी यादें आज भी अभिनेता के जीवन में उतनी ही भावनात्मक हैं। मां के निधन के बाद का वह दौर उनके लिए जिंदगी का सबसे कठिन अध्याय रहा। नर्मदा नदी तक पहुंचने की घटना और उस समय आए बेहद नकारात्मक विचारों को याद करते हुए गोविंदा ने अपने उस दर्द को सामने रखा, जिसे उन्होंने वर्षों तक अपने भीतर संभालकर रखा था।