पंजाब सरकार ने अब तक 23 जिलों के 1,377 गांवों में 'मेरा घर, मेरे नाम' योजना के तहत लाभार्थियों को 2.19 लाख प्रॉपर्टी कार्ड बांटे हैं। इस पहल का उद्देश्य ड्रोन-आधारित सर्वे और अधिकारों के प्रामाणिक रिकॉर्ड (रिकॉर्ड ऑफ राइट्स) तैयार करके 'लाल लकीर' (आबादी देह) क्षेत्रों के निवासियों को कानूनी रूप से मान्यता प्राप्त मालिकाना हक देना है। इससे संपत्ति के स्वामित्व से जुड़े दस्तावेजों में दशकों से चली आ रही कमियों को दूर किया जा सकेगा।
राजस्व, पुनर्वास और आपदा प्रबंधन मंत्री हरदीप सिंह मुंडियां ने कहा, "इस योजना का लक्ष्य ड्रोन-आधारित सर्वे और अधिकारों के प्रामाणिक रिकॉर्ड तैयार करके, पंजाब के सभी 10,689 गांवों की 'लाल लकीर' के भीतर स्थित संपत्तियों पर स्पष्ट मालिकाना हक स्थापित करना है। असली मालिकों को प्रॉपर्टी कार्ड दिए जा रहे हैं, ताकि उन्हें स्वामित्व का कानूनी रूप से मान्य दस्तावेजी सबूत मिल सके।" मंत्री ने बताया, "प्रॉपर्टी कार्ड बांटने की शुरुआत 7 अक्टूबर को संगरूर में आयोजित एक राज्य-स्तरीय कार्यक्रम से हुई थी, और तब से यह प्रक्रिया बिना किसी रुकावट के रोज़ाना चल रही है।"
योजना को लागू करने के शेड्यूल के बारे में विस्तार से बताते हुए उन्होंने कहा, "सभी गांवों को चार चरणों में कवर किया जा रहा है। पहले चरण में, 2,284 गांवों का काम 15 नवंबर तक पूरा होने की उम्मीद है। दूसरे चरण में 1,680 गांवों को शामिल किया जाएगा, जिसे नवंबर के अंत तक पूरा करने का लक्ष्य है। तीसरे चरण में कुल 1,152 गांवों को कवर किया जाएगा, जिसका काम दिसंबर के मध्य तक पूरा होने की संभावना है। बाकी बचे 5,579 गांवों को जनवरी 2027 के अंत तक कवर कर लिया जाएगा।" मुंडियां ने कहा, "आप (AAP) सरकार, गांव-स्तरीय समितियों और ग्राम सभाओं के साथ मिलकर, गांवों के नक्शों से जुड़ी अधूरी जानकारी को पूरा करने और आपत्तियों को सुलझाने का काम भी कर रही है। इस कवायद का मकसद राजस्व रिकॉर्ड को सटीक और पूर्ण बनाना है।"
उन्होंने कहा, "जिन गांवों में तकनीकी कारणों से ड्रोन सर्वे नहीं हो सका, वहां विभाग की इस प्रक्रिया के अंतिम चरण के रूप में 'ग्राउंड-ट्रूथिंग' (ज़मीनी स्तर पर सत्यापन) के ज़रिए काम पूरा किया जाएगा।" इस पहल के फायदों पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा, “गांव के निवासियों के पास अपने घरों के मालिकाना हक का कोई आधिकारिक दस्तावेज नहीं था, जबकि उनके परिवार पीढ़ियों से इन घरों में रह रहे थे। यह योजना हर पात्र परिवार को मालिकाना हक का आधिकारिक दस्तावेज देकर, लंबे समय से चली आ रही इस कमी को दूर करती है।”
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