बिक्रम मजीठिया की कानूनी मुश्किलें बढ़ीं करोड़ों के लेनदेन की जांच में नया मोड़
चंडीगढ़/मोहाली : 28 अक्टूबर 2026। पंजाब की राजनीति में बुधवार को बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। शिरोमणि अकाली दल (SAD) के वरिष्ठ नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री बिक्रम सिंह मजीठिया के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति के मामले में पंजाब विजिलेंस ब्यूरो ने मोहाली की विशेष अदालत में अंतिम चार्जशीट दाखिल कर दी है। इस मामले में मजीठिया समेत कुल 13 लोगों को आरोपी बनाया गया है। जांच एजेंसी ने वित्तीय लेनदेन, बैंक खातों, कंपनियों और संपत्तियों से जुड़े हजारों पन्नों के दस्तावेज अदालत में पेश किए हैं। विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार, अब तक दाखिल दस्तावेजों की कुल संख्या लगभग 52 से 53 हजार पन्नों तक पहुंच गई है।
मोहाली कोर्ट में दाखिल हुई हजारों पन्नों की चार्जशीट
पंजाब विजिलेंस ब्यूरो ने बुधवार को मोहाली की विशेष अदालत में बिक्रम सिंह मजीठिया के खिलाफ विस्तृत चार्जशीट प्रस्तुत की। जांच एजेंसी ने मामले में कथित अवैध संपत्ति, संदिग्ध वित्तीय लेनदेन और कंपनियों के माध्यम से धन के हस्तांतरण से संबंधित दस्तावेज शामिल किए हैं।इससे पहले अगस्त 2025 में भी विजिलेंस ब्यूरो ने लगभग 40 हजार पन्नों की चार्जशीट दाखिल की थी। अब अतिरिक्त साक्ष्यों और दस्तावेजों के साथ अंतिम चालान पेश किया गया है।रिपोर्टों में नए दाखिल दस्तावेजों और अब तक के कुल पन्नों की संख्या को लेकर अलग-अलग आंकड़े सामने आए हैं। कुछ रिपोर्टों में लगभग 40 हजार पन्नों की पूरक चार्जशीट का उल्लेख है, जबकि अन्य में पहले और नए दस्तावेजों को मिलाकर कुल 53 हजार पन्नों की जानकारी दी गई है।
736 करोड़ रुपये के कथित लेनदेन की जांच
इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण पहलू करोड़ों रुपये के वित्तीय लेनदेन से जुड़ा है। जांच एजेंसी ने आरोप लगाया है कि मजीठिया और उनसे जुड़े व्यक्तियों तथा कंपनियों के खातों में बड़े पैमाने पर संदिग्ध वित्तीय गतिविधियां हुई थीं।शुरुआती जांच में करीब 540 करोड़ रुपये से संबंधित आरोप सामने आए थे। बाद में जांच के दौरान वित्तीय लेनदेन का दायरा बढ़ा।ताजा रिपोर्टों में लगभग 719 करोड़ से 736 करोड़ रुपये तक के लेनदेन की जांच का उल्लेख किया गया है।हालांकि, यह स्पष्ट करना जरूरी है कि इन राशियों का संबंध जांच के दायरे में आए कथित वित्तीय लेनदेन से है। अदालत ने अभी यह तय नहीं किया है कि पूरी राशि अवैध रूप से अर्जित की गई थी।
मजीठिया समेत 13 आरोपी बनाए गए
विजिलेंस ब्यूरो की अंतिम चार्जशीट में बिक्रम सिंह मजीठिया समेत कुल 13 लोगों को आरोपी बनाया गया है। इसके अतिरिक्त कई कंपनियों के वित्तीय लेनदेन को भी जांच में शामिल किया गया है।मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, जांच के दायरे में आए व्यक्तियों में गुरमेहर सिंह, गजपत सिंह ग्रेवाल, हरप्रीत गुलाटी और अमरदीप सिंह जैसे नाम शामिल हैं।जांच एजेंसी ने कथित तौर पर 10 कंपनियों से जुड़े वित्तीय रिकॉर्ड की भी जांच की है।विजिलेंस ब्यूरो का आरोप है कि विभिन्न कंपनियों और संबंधित व्यक्तियों के माध्यम से बड़ी रकम का लेनदेन हुआ। इन आरोपों की वास्तविकता का निर्धारण अदालत में पेश साक्ष्यों के आधार पर होगा।
जून 2025 में हुई थी मजीठिया की गिरफ्तारी
बिक्रम सिंह मजीठिया के खिलाफ 25 जून 2025 को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया था। उसी दिन पंजाब विजिलेंस ब्यूरो ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया था।गिरफ्तारी के बाद उन्हें अदालत में पेश किया गया और बाद में न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।अगस्त 2025 में मोहाली की अदालत ने उनकी नियमित जमानत याचिका खारिज कर दी थी।इसके बाद मजीठिया ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया, लेकिन दिसंबर 2025 में वहां से भी उन्हें राहत नहीं मिली।मामला आखिरकार सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। सर्वोच्च न्यायालय ने 2 फरवरी 2026 को लगभग सात महीने की हिरासत के बाद उन्हें नियमित जमानत दे दी।हालांकि, जमानत मिलने का अर्थ आरोपों से बरी होना नहीं है। उनके खिलाफ आपराधिक मामले की सुनवाई अभी जारी है।
2007 से 2017 के बीच के लेनदेन की जांच
विजिलेंस ब्यूरो की जांच मुख्य रूप से वर्ष 2007 से 2017 के बीच की वित्तीय गतिविधियों पर केंद्रित रही है।इस अवधि में पंजाब में शिरोमणि अकाली दल और भारतीय जनता पार्टी की गठबंधन सरकार थी। मजीठिया उस दौरान राज्य सरकार में महत्वपूर्ण पदों पर रहे थे।जांच एजेंसी यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि संबंधित अवधि में उनकी घोषित आय, संपत्तियों और वित्तीय लेनदेन के बीच कितना अंतर था।इसके लिए बैंक खातों, संपत्ति संबंधी रिकॉर्ड और कंपनियों के दस्तावेजों का परीक्षण किया गया।
नशीले पदार्थों से जुड़े वित्तीय लेनदेन के भी आरोप
इस मामले में कथित नशीले पदार्थों के कारोबार से जुड़े वित्तीय लेनदेन को लेकर भी आरोप सामने आए हैं।जांच एजेंसी के अनुसार, कुछ कंपनियों के बैंक खातों में जमा धन और उसके स्रोतों की जांच की जा रही है।कुछ रिपोर्टों में अंतरराष्ट्रीय नशीले पदार्थों के तस्करों से कथित संबंधों का भी उल्लेख किया गया है।हालांकि, मजीठिया के खिलाफ लगाए गए ये आरोप अभी अदालत में सिद्ध नहीं हुए हैं। जांच एजेंसी के दावों और न्यायालय द्वारा प्रमाणित तथ्यों के बीच अंतर करना आवश्यक है।
मजीठिया ने आरोपों को बताया झूठा
चार्जशीट दाखिल होने के बाद बिक्रम सिंह मजीठिया ने अपने खिलाफ लगाए गए आरोपों को खारिज किया हैमीडिया रिपोर्टों के अनुसार, उन्होंने आरोपों को झूठ का पुलिंदा बताया है।मजीठिया और उनके राजनीतिक सहयोगी पहले भी इस मामले में पंजाब की आम आदमी पार्टी सरकार पर राजनीतिक प्रतिशोध के आरोप लगाते रहे हैं।दूसरी ओर, आम आदमी पार्टी सरकार का कहना है कि भ्रष्टाचार और नशे से जुड़े मामलों में कानून के अनुसार कार्रवाई की जा रही है।दोनों पक्षों के दावों की अंतिम कानूनी स्थिति अदालत की सुनवाई के बाद ही स्पष्ट होगी।
पंजाब की राजनीति में बढ़ी हलचल
मजीठिया के खिलाफ चार्जशीट दाखिल होने के बाद पंजाब की राजनीति में एक बार फिर आरोप-प्रत्यारोप तेज होने की संभावना है।शिरोमणि अकाली दल के लिए यह मामला राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि मजीठिया पार्टी के प्रमुख नेताओं में शामिल हैं।वहीं, सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी भ्रष्टाचार और नशीले पदार्थों के कारोबार के खिलाफ कार्रवाई को अपनी प्रमुख प्राथमिकताओं में गिनाती रही है।इस मामले में विजिलेंस ब्यूरो द्वारा पेश दस्तावेजों का परीक्षण अदालत करेगी।
अब अदालत में होगी आरोपों और सबूतों की जांच
अंतिम चार्जशीट दाखिल होने के बाद मामले की आगे की कार्यवाही न्यायिक प्रक्रिया के अनुसार चलेगी।अदालत दस्तावेजों, गवाहों के बयानों और जांच एजेंसी द्वारा प्रस्तुत अन्य साक्ष्यों की जांच करेगी। बचाव पक्ष को भी आरोपों का जवाब देने और अपना पक्ष रखने का अवसर मिलेगा।अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अदालत किन आरोपों पर आगे सुनवाई करती है और जांच एजेंसी अपने दावों के समर्थन में कौन से साक्ष्य प्रस्तुत करती है।फिलहाल चार्जशीट दाखिल होना मामले में महत्वपूर्ण कानूनी घटनाक्रम है, लेकिन इसे दोष सिद्ध होने के बराबर नहीं माना जा सकता।