बीजेपी नेता रवनीत सिंह बिट्टू ने विधानसभा के बाहर शराब की बोतल दिखाकर मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान पर निशाना साधा। बिट्टू ने फ्रांस से लौटने के दौरान मान पर लगे आरोपों को लेकर उन पर तंज कसा। खबरों के अनुसार, दिल्ली के IGI एयरपोर्ट पर कस्टम विभाग ने मान पर 50,000 रुपये का जुर्माना लगाया था। मान ने इस विवाद को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के परिवार से जोड़ते हुए कहा कि ज्ञानेश के भाई, मनीष कुमार, दिल्ली कस्टम ज़ोन के प्रमुख हैं।

चंडीगढ़: पंजाब की राजनीति में मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेता रवनीत सिंह बिट्टू के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। मंगलवार, 27 अक्टूबर 2026 को रवनीत सिंह बिट्टू पंजाब विधानसभा परिसर में शराब की एक महंगी विदेशी बोतल लेकर पहुंचे और मुख्यमंत्री भगवंत मान पर निशाना साधा। उन्होंने शराब की बोतल को प्रतीकात्मक तरीके से इस्तेमाल करते हुए राज्य सरकार के कामकाज, पंजाब की स्थिति और मुख्यमंत्री से जुड़े हालिया एयरपोर्ट विवाद पर सवाल उठाए। इस घटनाक्रम ने पंजाब में सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी (AAP) और भाजपा के बीच राजनीतिक टकराव को फिर चर्चा में ला दिया है। स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

विधानसभा परिसर में बोतल लेकर पहुंचे बिट्टू

भाजपा नेता रवनीत सिंह बिट्टू ने पत्रकारों से बातचीत के दौरान दावा किया कि जिस तरह की शराब की बोतल वह लेकर आए हैं, वैसी ही बोतल मुख्यमंत्री भगवंत मान के पास दिल्ली एयरपोर्ट पर मिली थी। उन्होंने बोतल की कीमत करीब 70 हजार रुपये बताते हुए मुख्यमंत्री पर कटाक्ष किया और आरोप लगाया कि पंजाब की समस्याओं के समाधान के बजाय सरकार का ध्यान दूसरे मुद्दों पर है।

बिट्टू ने अपने प्रदर्शन के जरिए राज्य में नशे की समस्या, कानून-व्यवस्था और शासन व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि पंजाब में पिछले पांच वर्षों के दौरान अपेक्षित काम नहीं हुआ है। हालांकि, उनके इन राजनीतिक आरोपों को स्वतंत्र रूप से प्रमाणित तथ्यों के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। ये मुख्यमंत्री और उनकी सरकार के खिलाफ भाजपा नेता द्वारा लगाए गए आरोप हैं। स्रोत: इंडिया टुडे

'टल्ली' शब्द के जरिए साधा निशाना

रवनीत सिंह बिट्टू ने अपने बयान में पंजाबी शब्द 'टल्ली' का इस्तेमाल करते हुए मुख्यमंत्री पर व्यंग्य किया। इस शब्द का इस्तेमाल आम बोलचाल में नशे में होने वाले व्यक्ति के लिए किया जाता है। वहीं, शराब की बोतल के ढक्कन का आकार घंटी जैसा होने के कारण बिट्टू ने इसे भी अपने राजनीतिक कटाक्ष का हिस्सा बनाया।

उन्होंने इस प्रतीक के जरिए मुख्यमंत्री के कामकाज पर सवाल उठाए और आरोप लगाया कि राज्य सरकार जनता के मुद्दों पर पर्याप्त ध्यान नहीं दे रही है। बिट्टू ने अधिकारियों और राजनीतिक विरोधियों के खिलाफ कथित कार्रवाई को लेकर भी आरोप लगाए। इन दावों पर किसी स्वतंत्र पुष्टि के बिना निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।

क्या है दिल्ली एयरपोर्ट से जुड़ा विवाद?

यह राजनीतिक विवाद उस घटनाक्रम के बाद सामने आया, जिसमें मुख्यमंत्री भगवंत मान की फ्रांस यात्रा से वापसी के दौरान दिल्ली एयरपोर्ट पर कस्टम अधिकारियों द्वारा जांच किए जाने और जुर्माना लगाए जाने की बात सामने आई थी।

रिपोर्टों के मुताबिक, मान फ्रांस के पेरिस में आयोजित SIAL 2026 खाद्य व्यापार मेले में शामिल होने गए थे। मुख्यमंत्री ने लौटने के बाद दावा किया कि दिल्ली एयरपोर्ट पर उन्हें लगभग दो घंटे तक इंतजार कराया गया और उन पर 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया। उन्होंने इस घटनाक्रम को राजनीतिक दबाव से जोड़ते हुए सवाल उठाए थे।

मुख्यमंत्री ने कस्टम विभाग के वरिष्ठ अधिकारी के संबंधों का उल्लेख करते हुए भी आरोप लगाए। दूसरी ओर, आम आदमी पार्टी ने इस मामले को केंद्र सरकार और पंजाब सरकार के बीच राजनीतिक टकराव से जोड़कर देखा। इन दावों और आरोपों की पूरी तस्वीर समझने के लिए संबंधित अधिकारियों के आधिकारिक पक्ष और उपलब्ध दस्तावेजों को देखना जरूरी है। स्रोत: मनीकंट्रोल

पंजाब की राजनीति में बढ़ी बयानबाजी

रवनीत सिंह बिट्टू की इस कार्रवाई को भाजपा की ओर से मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी सरकार के खिलाफ किए गए राजनीतिक प्रदर्शन के रूप में देखा जा रहा है। उन्होंने शराब की बोतल को मुद्दा बनाकर न केवल मुख्यमंत्री पर व्यक्तिगत कटाक्ष किया, बल्कि राज्य में नशे की समस्या और शासन व्यवस्था पर भी सवाल खड़े किए।

पंजाब में नशा लंबे समय से एक महत्वपूर्ण सामाजिक और राजनीतिक मुद्दा रहा है। विभिन्न राजनीतिक दल इस विषय पर एक-दूसरे की नीतियों और कार्यशैली की आलोचना करते रहे हैं। ऐसे में शराब की बोतल लेकर विधानसभा परिसर पहुंचने की बिट्टू की कार्रवाई ने राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है।

हालांकि, किसी व्यक्ति के शराब सेवन से संबंधित आरोपों और राज्य में नशे की व्यापक समस्या के बीच अंतर करना आवश्यक है। किसी नेता के खिलाफ लगाए गए व्यक्तिगत आरोप अपने आप में प्रमाण नहीं होते। इसी तरह, सरकार के कामकाज पर राजनीतिक आलोचना का मूल्यांकन ठोस तथ्यों, सरकारी आंकड़ों और संबंधित पक्षों के जवाब के आधार पर किया जाना चाहिए।

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