मंदिर उत्सवों में हाथियों के इस्तेमाल पर गाइडलाइंस बनाने की मांग

Update: 2026-08-02 03:54 GMT

चेन्नई। तमिलनाडु में मंदिरों के धार्मिक उत्सवों के दौरान हाथियों के इस्तेमाल को लेकर दायर एक महत्वपूर्ण जनहित याचिका पर मद्रास हाई कोर्ट ने राज्य सरकार से जवाब तलब किया है। अदालत ने तमिलनाडु सरकार को निर्देश दिया है कि वह इस याचिका पर अपना पक्ष स्पष्ट करे, जिसमें मंदिर उत्सवों, ब्रह्मोत्सव और अन्य धार्मिक आयोजनों में हाथियों के उपयोग के लिए स्पष्ट और एक समान दिशा-निर्देश (गाइडलाइंस) तैयार करने की मांग की गई है। याचिका में हाथियों के कल्याण, उनकी सुरक्षा और आम लोगों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कई महत्वपूर्ण सुझाव भी दिए गए हैं।

यह याचिका चेन्नई स्थित सेवा ट्रस्ट की ओर से मद्रास हाई कोर्ट में दायर की गई है। याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया कि तमिलनाडु के अनेक मंदिरों में धार्मिक परंपराओं के तहत उत्सवों और विशेष अवसरों पर हाथियों का उपयोग किया जाता है। विशेष रूप से ब्रह्मोत्सव, रथ यात्रा, जुलूस और अन्य बड़े धार्मिक आयोजनों में मंदिर के हाथी श्रद्धालुओं के आकर्षण का प्रमुख केंद्र होते हैं। हालांकि, इन आयोजनों में हाथियों को शामिल करने की अनुमति प्राप्त करने की प्रक्रिया कई बार लंबी और जटिल हो जाती है, जिससे मंदिर प्रशासन और आयोजन समितियों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।

याचिका में कहा गया है कि यदि राज्य सरकार इस संबंध में स्पष्ट और स्थायी गाइडलाइंस तैयार कर दे तो अनुमति प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, सरल और समयबद्ध हो सकती है। इससे मंदिर प्रशासन को हर बार अलग-अलग स्तर पर मंजूरी लेने की जटिल प्रक्रिया से राहत मिलेगी और सभी संबंधित विभागों के लिए भी एक समान नियम लागू किए जा सकेंगे।

याचिकाकर्ता ने अदालत के समक्ष यह भी तर्क रखा कि धार्मिक आयोजनों के दौरान हाथियों के साथ किसी प्रकार का दुर्व्यवहार न हो और उनकी शारीरिक एवं मानसिक स्थिति सुरक्षित बनी रहे, इसके लिए विशेष प्रावधान किए जाने चाहिए। याचिका में सुझाव दिया गया है कि प्रत्येक जिले में जिला-स्तरीय निगरानी समितियों का गठन किया जाए। इन समितियों में वन विभाग, पशुपालन विभाग, जिला प्रशासन और अन्य संबंधित विभागों के अधिकारियों को शामिल किया जा सकता है। यह समितियां हाथियों के उपयोग, उनकी देखभाल और सुरक्षा संबंधी नियमों की निगरानी करें तथा आवश्यकता पड़ने पर अनुमति भी प्रदान करें।

याचिका में हाथियों के स्वास्थ्य को सर्वोच्च प्राथमिकता देने पर भी जोर दिया गया है। इसमें कहा गया है कि किसी भी धार्मिक समारोह में हाथी को शामिल करने से पहले उसकी स्वास्थ्य जांच कराई जानी चाहिए। अधिकृत पशु चिकित्सक द्वारा यह प्रमाणित किया जाए कि संबंधित हाथी पूरी तरह स्वस्थ है और लंबे समय तक भीड़, शोर और यात्रा जैसी परिस्थितियों का सामना करने की स्थिति में है। यदि किसी हाथी की स्वास्थ्य स्थिति उपयुक्त न हो तो उसे समारोह में शामिल करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।

याचिकाकर्ता ने अदालत से यह भी आग्रह किया है कि सरकार ऐसे नियम बनाए, जिनके तहत धार्मिक आयोजनों में शामिल होने वाले हाथियों को पर्याप्त आराम मिल सके। सुझाव दिया गया है कि हाथियों को प्रतिदिन कम से कम आठ घंटे का अनिवार्य विश्राम दिया जाए। इसके अलावा उनके भोजन, पानी, छाया, चिकित्सकीय देखभाल और आराम की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए भी स्पष्ट दिशा-निर्देश तैयार किए जाएं।

याचिका में यह भी कहा गया कि बड़े धार्मिक आयोजनों के दौरान हजारों श्रद्धालु एकत्र होते हैं। ऐसे में हाथियों के व्यवहार और सुरक्षा को लेकर विशेष सावधानी बरतना आवश्यक है। यदि हाथियों की उचित निगरानी और देखभाल नहीं की जाती तो दुर्घटनाओं की आशंका बढ़ सकती है। इसलिए ऐसे नियम बनाए जाने चाहिए जो हाथियों के साथ-साथ आम लोगों की सुरक्षा भी सुनिश्चित करें।

मद्रास हाई कोर्ट ने याचिका पर प्रारंभिक सुनवाई के बाद तमिलनाडु सरकार को नोटिस जारी करते हुए इस मामले में जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। अदालत ने सरकार से पूछा है कि क्या मंदिर उत्सवों में हाथियों के उपयोग के लिए कोई निर्धारित नीति या दिशा-निर्देश पहले से मौजूद हैं और यदि नहीं हैं तो इस संबंध में सरकार का क्या रुख है।

यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब देशभर में धार्मिक आयोजनों में जानवरों के उपयोग, उनके संरक्षण और पशु कल्याण से जुड़े मुद्दों पर लगातार चर्चा हो रही है। पशु अधिकार संगठनों की ओर से समय-समय पर यह मांग उठाई जाती रही है कि धार्मिक परंपराओं और पशु कल्याण के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए स्पष्ट नियम बनाए जाएं। वहीं मंदिर प्रशासन का कहना है कि हाथी कई पारंपरिक धार्मिक अनुष्ठानों का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं और उनकी भागीदारी श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ी हुई है।

अब सभी की नजर मद्रास हाई कोर्ट में इस मामले की अगली सुनवाई और तमिलनाडु सरकार के जवाब पर टिकी हुई है। यदि अदालत याचिकाकर्ता के सुझावों को उचित मानते हुए सरकार को विस्तृत गाइडलाइंस बनाने का निर्देश देती है, तो भविष्य में राज्य के सभी मंदिरों में हाथियों के उपयोग के लिए एक समान नियम लागू किए जा सकते हैं। इससे अनुमति प्रक्रिया सरल होने के साथ-साथ हाथियों के स्वास्थ्य, कल्याण और श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम उठाया जा सकेगा।

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