चेंगलपट्टू : चेंगलपट्टू ज़िले में पोटाश (एमओपी) खाद की गंभीर कमी को लेकर किसानों में भारी नाराज़गी देखी जा रही है। किसानों का कहना है कि मौजूदा 'सोरनावरी' सीज़न के दौरान समय पर पोटाश खाद उपलब्ध नहीं होने से खेती प्रभावित हो रही है। इसके साथ ही बाज़ार में खाद की कमी के कारण इसकी कीमतों में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी हो गई है, जिससे किसानों की आर्थिक परेशानियाँ और बढ़ गई हैं।
जानकारी के अनुसार, इस सीज़न में चेंगलपट्टू ज़िले में 20,000 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में धान के अलावा मूंगफली, सब्ज़ियाँ, दलहन और अन्य फसलों की खेती की गई है। इन फसलों के बेहतर विकास और अधिक उत्पादन के लिए पोटाश खाद की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। लेकिन वर्तमान समय में खाद की आपूर्ति मांग के अनुरूप नहीं हो पा रही है, जिसके कारण किसान समय पर खेतों में आवश्यक मात्रा में उर्वरक नहीं डाल पा रहे हैं।
किसानों का कहना है कि पोटाश खाद की उपलब्धता सीमित होने से निजी दुकानों में इसकी कीमतें लगातार बढ़ रही हैं। कई स्थानों पर खाद निर्धारित मूल्य से अधिक दर पर बेची जा रही है। किसानों का आरोप है कि कुछ व्यापारी खाद की कमी का फायदा उठाकर मनमाने दाम वसूल रहे हैं, जिससे छोटे और सीमांत किसानों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है।
स्थानीय किसानों ने बताया कि धान की फसल में रोपाई के बाद निश्चित समय पर पोटाश का उपयोग करना आवश्यक होता है। यदि निर्धारित समय पर खाद नहीं मिलती है तो पौधों की वृद्धि प्रभावित होती है, जिससे उत्पादन में गिरावट आने की आशंका रहती है। यही स्थिति अन्य फसलों में भी देखने को मिल सकती है। किसानों का कहना है कि पहले ही बीज, डीज़ल, बिजली और श्रम लागत में लगातार वृद्धि हो चुकी है। अब खाद की बढ़ती कीमतों ने खेती की कुल लागत को और अधिक बढ़ा दिया है।
कई किसान सहकारी समितियों और सरकारी उर्वरक बिक्री केंद्रों के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन वहां भी पर्याप्त मात्रा में पोटाश उपलब्ध नहीं है। किसानों का कहना है कि उन्हें कई दिनों तक इंतज़ार करना पड़ रहा है या फिर बिना खाद के वापस लौटना पड़ रहा है। मजबूरी में कुछ किसान निजी दुकानों से अधिक कीमत पर खाद खरीदने के लिए विवश हैं।
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि पोटाश पौधों की जड़ों को मजबूत बनाने, रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने तथा बेहतर दाना भराव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। धान सहित अधिकांश फसलों में इसकी संतुलित मात्रा आवश्यक होती है। यदि समय पर पोटाश का प्रयोग नहीं किया गया तो फसल की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों प्रभावित हो सकते हैं। इससे किसानों की आय पर भी प्रतिकूल असर पड़ने की संभावना है।
किसानों ने राज्य सरकार और कृषि विभाग से मांग की है कि पोटाश खाद की पर्याप्त आपूर्ति तत्काल सुनिश्चित की जाए। उनका कहना है कि सहकारी समितियों और सरकारी बिक्री केंद्रों पर पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध कराई जाए ताकि किसानों को निर्धारित मूल्य पर उर्वरक मिल सके। साथ ही निजी दुकानों में हो रही कालाबाज़ारी और अधिक कीमत वसूले जाने की शिकायतों की जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।
किसानों का यह भी कहना है कि सरकार को खाद वितरण व्यवस्था की नियमित निगरानी करनी चाहिए ताकि भविष्य में इस प्रकार की स्थिति उत्पन्न न हो। उनका सुझाव है कि खेती के प्रत्येक सीज़न से पहले उर्वरकों की मांग का सही आकलन कर पर्याप्त भंडारण किया जाए, जिससे किसानों को किसी प्रकार की कमी का सामना न करना पड़े।
कृषि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि पोटाश खाद की आपूर्ति बढ़ाने के लिए संबंधित एजेंसियों से लगातार संपर्क किया जा रहा है। विभाग का प्रयास है कि जल्द से जल्द अतिरिक्त स्टॉक उपलब्ध कराया जाए ताकि किसानों की जरूरतें पूरी हो सकें। अधिकारियों ने किसानों से धैर्य बनाए रखने की अपील करते हुए भरोसा दिलाया कि आपूर्ति सामान्य करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि कृषि क्षेत्र देश की खाद्य सुरक्षा का आधार है और समय पर उर्वरकों की उपलब्धता किसानों के लिए अत्यंत आवश्यक है। यदि आवश्यक उर्वरक समय पर नहीं मिलते हैं तो इसका सीधा असर उत्पादन और किसानों की आय पर पड़ता है। इसलिए सरकार, उर्वरक कंपनियों और वितरण एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना जरूरी है।
फिलहाल चेंगलपट्टू ज़िले के किसान पोटाश खाद की उपलब्धता सामान्य होने का इंतज़ार कर रहे हैं। उनका कहना है कि यदि जल्द ही पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध नहीं कराई गई तो इस सीज़न की फसल प्रभावित हो सकती है, जिससे उत्पादन में कमी आने के साथ-साथ किसानों को आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ सकता है। किसानों ने सरकार से तत्काल हस्तक्षेप कर समस्या का स्थायी समाधान निकालने की मांग की है, ताकि खेती सुचारु रूप से जारी रह सके और किसानों को किसी प्रकार की कठिनाई का सामना न करना पड़े।