अमरावती: राज्य सरकार ने चक्रवात 'अरनाब' से निपटने के लिए लगभग 6,000 अनुभवी कर्मियों को तैनात किया है और आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणालियों को मजबूत किया है। ऊर्जा मंत्री गोट्टीपति रवि कुमार ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे लोगों की सुरक्षा को प्राथमिकता दें और प्रभावित क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति को जल्द से जल्द बहाल करें।

मंगलवार को अमरावती स्थित अपने कैंप कार्यालय से वरिष्ठ अधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए तैयारियों की समीक्षा करते हुए, मंत्री ने चौबीसों घंटे सतर्क रहने, आपसी समन्वय के साथ काम करने और एहतियाती उपायों को तुरंत लागू करने पर जोर दिया।

उन्होंने कहा, "हर जीवन कीमती है।" उन्होंने अधिकारियों को संभावित खतरों का पहले से अनुमान लगाने, बिजली से जुड़ी दुर्घटनाओं को रोकने और चक्रवात के कारण आई बाधाओं पर तुरंत कार्रवाई करने का निर्देश दिया।

मंत्री ने बताया कि इस टीम में ऐसे अधिकारी और फील्ड कर्मचारी शामिल हैं, जिन्हें चक्रवात के बाद बहाली कार्यों का अनुभव है। चक्रवात के सीधे प्रभाव से बाहर वाले क्षेत्रों में छुट्टियों की व्यवस्था में बदलाव किया गया है, ताकि पर्याप्त संख्या में कर्मचारी उपलब्ध रहें। बिजली वितरण कंपनियों के अध्यक्षों और प्रबंध निदेशकों को निर्देश दिया गया है कि वे खुद फील्ड में जाकर स्थिति पर कड़ी नजर रखें।

निदेशक विशाखापत्तनम, अनाकापल्ली, काकीनाडा और कोनासीमा जिलों में चल रहे कार्यों की निगरानी कर रहे हैं। फील्ड टीमें बिजली की टूटी लाइनों, गिरे हुए खंभों, क्षतिग्रस्त तारों और 132-kV सबस्टेशनों में आने वाली खराबी को ठीक करने के लिए तैयार हैं। बिजली आपूर्ति को तुरंत बहाल करने के लिए मंडल कार्यालयों और मंडल मुख्यालयों में मरम्मत का जरूरी सामान पहले से ही जमा कर लिया गया है।

ऊर्जा विभाग ने अपने 1912 कॉल सेंटर को और मजबूत किया है, ताकि एक साथ 30,000 कॉल संभाले जा सकें। उपभोक्ता इस हेल्पलाइन के जरिए बिजली कटने, खंभे गिरने, तार टूटने या बिजली से जुड़ी अन्य आपातकालीन स्थितियों की सूचना दे सकते हैं।

इसके अलावा, जिला कलेक्टरों, राजस्व विभाग के अधिकारियों, और ग्राम व वार्ड सचिवालय के कर्मचारियों के साथ समन्वय के लिए एक विशेष संचार समूह भी बनाया गया है। रवि कुमार ने बताया कि ये सभी कदम मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू के निर्देशों के अनुसार उठाए जा रहे हैं, जिसमें लोगों की जान बचाने और जरूरी सेवाओं को बनाए रखने पर विशेष जोर दिया गया है।

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