हैदराबाद: दानम नागेंद्र ने गुरुवार को कहा कि वह सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश का स्वागत करते हैं जिसमें उनकी याचिका खारिज कर दी गई थी। उन्होंने यह याचिका तेलंगाना हाई कोर्ट के उस आदेश को चुनौती देते हुए दायर की थी, जिसमें उन्हें दलबदल विरोधी कानून के तहत विधानसभा सदस्य के तौर पर अयोग्य घोषित कर दिया गया था। उन्होंने भरोसा जताया कि वह उपचुनाव जीतेंगे।
उन्होंने मीडिया से कहा कि उन्हें इसका अंदाज़ा था, जब वह 2024 के चुनावों में सिकंदराबाद लोकसभा क्षेत्र से कांग्रेस उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ रहे थे।
नागेंद्र, जो 2023 में हैदराबाद के खैरताबाद निर्वाचन क्षेत्र से BRS के टिकट पर विधानसभा के लिए चुने गए थे लेकिन बाद में सत्ताधारी कांग्रेस पार्टी में शामिल हो गए थे, ने कहा कि कानूनी लड़ाई लड़ने में कुछ भी गलत नहीं है।
पूर्व विधायक ने कहा कि उन्हें 10वीं अनुसूची के तहत राहत की उम्मीद थी। उन्होंने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया है कि वह दोबारा चुनाव लड़ सकते हैं।
यह दावा करते हुए कि उन्हें लोगों का समर्थन हासिल है और खैरताबाद उनका गढ़ है, नागेंद्र ने भरोसा जताया कि वह उपचुनाव जीतेंगे।
पूर्व मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी उपचुनाव में उन्हें मैदान में उतारने पर फैसला लेंगे।
उन्होंने कहा, "मैं तीन बार खैरताबाद से विधायक चुना गया हूं। मैं एक उपचुनाव सिर्फ़ 1,600 वोटों से हारा था।"
नागेंद्र ने हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में एक स्पेशल लीव पिटिशन (SLP) दायर की थी। हाई कोर्ट ने विधानसभा अध्यक्ष गड्डम प्रसाद कुमार के उस आदेश को रद्द कर दिया था जिसमें उन्हें अयोग्य ठहराने की याचिकाओं को खारिज कर दिया गया था, और उन्हें 23 अप्रैल, 2024 से विधायक के तौर पर अयोग्य घोषित कर दिया था।
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट को हाई कोर्ट के आदेश में दखल देने का कोई आधार नहीं मिला।
18 सितंबर को सुनाए गए फैसले में, चीफ जस्टिस अपारेश कुमार सिंह और जस्टिस जी.एम. मोहिउद्दीन की डिवीजन बेंच ने माना कि नागेंद्र संविधान के अनुच्छेद 191(2) के साथ पढ़ी जाने वाली दसवीं अनुसूची के पैराग्राफ 2(1)(a) के तहत अयोग्य हो गए थे। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि BRS विधायक चुने जाने के बावजूद उन्होंने सिकंदराबाद निर्वाचन क्षेत्र से कांग्रेस उम्मीदवार के तौर पर 2024 का लोकसभा चुनाव लड़ा था। हाई कोर्ट ने खैरताबाद विधानसभा सीट को भी खाली घोषित कर दिया और आदेश दिया कि इसकी एक कॉपी तेलंगाना विधानसभा के सचिव और भारत के चुनाव आयोग को भेजी जाए।
यह फ़ैसला बीजेपी विधायक दल के नेता अलेत्ती महेश्वर रेड्डी और बीआरएस विधायक पाडी कौशिक रेड्डी की याचिकाओं पर आया। इन याचिकाओं में स्पीकर के 11 मार्च, 2026 के उस फ़ैसले को चुनौती दी गई थी, जिसमें अयोग्यता की याचिकाओं को खारिज कर दिया गया था।
हाई कोर्ट के फ़ैसले में कहा गया कि नागेंद्र दिसंबर 2023 में खैरताबाद से बीआरएस विधायक चुने गए थे और बाद में 23 अप्रैल, 2024 को सिकंदराबाद लोकसभा क्षेत्र से कांग्रेस उम्मीदवार के तौर पर अपना नामांकन दाखिल किया, जहाँ उन्होंने बीआरएस उम्मीदवार के ख़िलाफ़ प्रचार किया।
नागेंद्र उन 10 बीआरएस विधायकों में से एक थे जिन्होंने 2024 में सत्ताधारी कांग्रेस पार्टी का दामन थाम लिया था।
हालाँकि, स्पीकर ने सभी 10 विधायकों की अयोग्यता के लिए बीआरएस की याचिकाओं को खारिज कर दिया था। बीआरएस विधायकों ने अलग-अलग याचिकाएँ दायर करके 10 में से नौ विधायकों के मामले में स्पीकर के फ़ैसले को चुनौती दी है।