लखनऊ: समाजवादी पार्टी (सपा) प्रमुख अखिलेश यादव ने शुक्रवार को चुनाव आयोग के 'स्पेशल समरी रिवीजन' (SSR) अभियान पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि इस अभियान ने 'स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन' (SIR) को पूरी तरह से बेकार (शून्य) कर दिया है।
यहाँ एक सभा को संबोधित करते हुए अखिलेश यादव ने आरोप लगाया, "SSR के आने से SIR (मतदाता सूची संशोधन अभियान) का कोई मतलब नहीं रह गया है। क्या यह सच नहीं है? अगर SSR की प्रक्रिया चल रही है, तो SIR अब शून्य हो गया है।"
चुनाव आयोग ने गुरुवार को SSR प्रक्रिया शुरू की। एक अधिसूचना में, आयोग ने 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मतदाता सूचियों के विशेष संशोधन का निर्देश दिया। साथ ही, पहली बार यह अनिवार्य किया गया कि मतदाता सूचियों के 'मशीन-रीडेबल' (कंप्यूटर द्वारा पढ़े जा सकने वाले) संस्करण राजनीतिक दलों को उपलब्ध कराए जाएं।
SSR प्रक्रिया पर तंज कसते हुए, सपा प्रमुख ने एक ऐसे युवा मतदाता का उदाहरण दिया, जिसका नाम अलग-अलग जिलों में कई बार दर्ज था। उन्होंने इस अभियान की कार्यक्षमता पर सवाल उठाए।
अखिलेश यादव ने कहा, "इस युवक को यह भी नहीं पता था कि उसके नाम से कितनी बार मतदाता पंजीकरण हो चुके हैं। उसने तो केवल एक बार आवेदन किया था। देखिए, चुनाव आयोग के साथ मिलकर भाजपा ने उसे कैसा 'तोहफा' दिया है।"
गौरतलब है कि मतदाता सूचियों की 'मशीन-रीडेबल' (PDF) प्रतियां उपलब्ध कराने की मांग राजनीतिक दल लंबे समय से कर रहे थे। नए निर्देशों के तहत, अब चुनाव आयोग के अधिकारी राजनीतिक दलों को मतदाता सूचियों (ड्राफ्ट और अंतिम सूची) की प्रतियां इमेज फॉर्मेट में नहीं, बल्कि 'मशीन-रीडेबल' PDF फॉर्मेट में देंगे।
चुनाव आयोग की इस नई संशोधन प्रक्रिया से असंतुष्ट सपा प्रमुख ने आयोग की कड़ी आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि आयोग सत्ताधारी भाजपा के साथ मिलकर 'वोट चोरी' कराने की साजिश रच रहा है।
उन्होंने कहा कि जब SIR के तहत चुनाव वाले राज्यों में मतदाता सूची संशोधन के दौरान चुनाव आयोग की गड़बड़ियां पकड़ी गईं, तो उन्होंने इसे 'छोटी-मोटी गलती' बता दिया। लेकिन, अखिलेश यादव के अनुसार, "यह कोई गलती नहीं, बल्कि जनता के जनादेश को लूटने की एक सोची-समझी साजिश है।" अखिलेश यादव ने पूछा, "यह विरोध इसलिए हो रहा है क्योंकि उनकी (EC और BJP) चोरी सामने आ रही है और उनके कारनामे उजागर हो रहे हैं। वे वोट चुराने की कोशिश क्यों कर रहे हैं? वे SIR या SSR के जरिए चोरी, साजिश और हेरफेर क्यों कर रहे हैं?"
गौरतलब है कि SSR अभियान 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में चलाया जाएगा, जहां मतदान प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। चुनाव आयोग (EC) के अधिकारियों के अनुसार, इन राज्यों में चुनाव अगले साल होने हैं।
SSR एक वार्षिक प्रक्रिया है, जिसका उद्देश्य नए पात्र मतदाताओं को पंजीकृत करना और मतदाता सूची को अपडेट करना है। इसके तहत, आवेदकों को अपनी नागरिकता साबित करने के लिए कोई दस्तावेज जमा करने या पिछली मतदाता सूचियों के आधार पर सत्यापन कराने की आवश्यकता नहीं होती है।