अयोध्या : भगवान श्रीराम की नगरी अयोध्या एक बार फिर दीपों की अलौकिक रोशनी से जगमगाने के लिए तैयार हो रही है। दसवें दीपोत्सव को भव्य और ऐतिहासिक बनाने के लिए तैयारियां तेज कर दी गई हैं। इस बार सरयू नदी के किनारे स्थित 56 घाटों पर करीब 30 लाख दीये जलाने का लक्ष्य रखा गया है। इस विशाल आयोजन को सफल बनाने के लिए लगभग 35 हजार स्वयंसेवकों की सेवाएं ली जाएंगी। दीपोत्सव का मुख्य आयोजन 7 नवंबर 2026 को प्रस्तावित है, जबकि सांस्कृतिक कार्यक्रम 6 से 8 नवंबर तक आयोजित किए जाएंगे।
वैदिक मंत्रोच्चार के साथ भूमि पूजन से तैयारियों की शुरुआत
दीपोत्सव की तैयारियों को औपचारिक रूप देने के लिए शुक्रवार, 23 अक्टूबर को सुबह 7:30 बजे घाट नंबर 10 पर भूमि पूजन कार्यक्रम निर्धारित किया गया है। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच होने वाले इस आयोजन में डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय के कुलपति बिजेंद्र सिंह सहित विश्वविद्यालय के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहेंगे। दीपोत्सव की तैयारियों के समन्वय की जिम्मेदारी अवध विश्वविद्यालय संभाल रहा है। विश्वविद्यालय प्रशासन और जिला प्रशासन मिलकर घाटों की साफ-सफाई, दीपों की व्यवस्था, स्वयंसेवकों की तैनाती और सुरक्षा संबंधी तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुटे हैं।
30 लाख दीयों के लिए मंगवाए गए 33 लाख दीप
इस बार अयोध्या दीपोत्सव में करीब 30 लाख दीये जलाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन ने 33 लाख मिट्टी के दीये मंगवाए हैं। अतिरिक्त दीये मंगवाने के पीछे मुख्य उद्देश्य परिवहन, भंडारण और घाटों पर सजावट के दौरान टूटने वाले दीयों की भरपाई करना है। प्रशासन चाहता है कि किसी भी परिस्थिति में दीपोत्सव की भव्यता प्रभावित न हो। राम की पैड़ी से लेकर सरयू नदी के घाटों तक लाखों दीपों की एक साथ जगमगाहट श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए विशेष आकर्षण होगी।
इस बार 55 नहीं, 56 घाटों पर होगा दीपोत्सव
दीपोत्सव के दायरे को इस वर्ष और बढ़ाया गया है। पहले जहां 55 घाटों पर दीपों की सजावट होती थी, वहीं इस बार 56 घाटों को शामिल किया गया है। इनमें विस्तारित राम की पैड़ी, चौधरी चरण सिंह घाट और भजन संध्या स्थल जैसे प्रमुख स्थान शामिल हैं। अधिकारियों के अनुसार, सभी घाटों पर दीयों को व्यवस्थित तरीके से सजाने के लिए ब्लॉक आधारित लेआउट तैयार किया जा रहा है। घाटों की सफाई के बाद मार्किंग शुरू हो चुकी है। अगले तीन से चार दिनों में मार्किंग पूरी करने का लक्ष्य है। इससे यह तय करने में आसानी होगी कि किस घाट के किस हिस्से में कितने दीये रखे जाएंगे।
35 हजार स्वयंसेवक संभालेंगे दीप जलाने की जिम्मेदारी
इतने बड़े आयोजन को सफल बनाने के लिए लगभग 35 हजार स्वयंसेवकों को तैनात करने की योजना तैयार की गई है। इन स्वयंसेवकों का चयन 30 डिग्री कॉलेजों, 40 इंटरमीडिएट कॉलेजों और विश्वविद्यालय परिसर से किया जाएगा। सभी को अलग-अलग घाटों और सेक्टरों में जिम्मेदारियां सौंपी जाएंगी। स्वयंसेवकों को दीप सजाने, निर्धारित स्थानों पर रखने, तेल और बाती की व्यवस्था तथा तय समय पर दीप प्रज्ज्वलन से संबंधित प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
QR कोड वाले पहचान पत्र से होगी निगरानी
इस बार स्वयंसेवकों के प्रबंधन में तकनीक का भी उपयोग किया जाएगा। ऑनलाइन पंजीकरण के आधार पर उनका विवरण तैयार किया जाएगा। स्वयंसेवकों को QR कोड युक्त पहचान पत्र दिए जाएंगे। इनमें फोटो, संपर्क विवरण और तैनाती स्थल की जानकारी दर्ज होगी। इससे प्रशासन को यह पता लगाने में आसानी होगी कि कौन स्वयंसेवक किस घाट पर जिम्मेदारी संभाल रहा है। इसके साथ ही घाटों पर भीड़ प्रबंधन, सुरक्षा और निर्धारित समय पर दीप जलाने के लिए प्रशासनिक समन्वय पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
रामायण की थीम पर सजेगी पूरी अयोध्या
दीपोत्सव के दौरान अयोध्या को रामायण की थीम पर सजाने की भी योजना है। शहर के प्रमुख मार्गों, चौराहों, सरयू तट और राम की पैड़ी पर विशेष सजावट की जाएगी। दीपोत्सव कार्यक्रम में ड्रोन शो सहित विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियों की भी तैयारी है। उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग के अनुसार करीब 2,100 ड्रोन के प्रदर्शन की योजना बनाई गई है।
विश्व रिकॉर्ड की परंपरा को आगे बढ़ाने की तैयारी
अयोध्या दीपोत्सव पिछले कई वर्षों से सामूहिक दीप प्रज्ज्वलन के लिए देश-दुनिया में आकर्षण का केंद्र रहा है। वर्ष 2025 में 26,17,215 दीप जलाए जाने का आंकड़ा दर्ज किया गया था। इस बार करीब 30 लाख दीप प्रज्ज्वलित करने की तैयारी है। हालांकि वास्तविक उपलब्धि आयोजन के बाद होने वाली गणना से ही स्पष्ट होगी। प्रशासन और विश्वविद्यालय की कोशिश है कि इस वर्ष का दीपोत्सव श्रद्धा, संस्कृति, पर्यटन और सामूहिक सहभागिता के लिहाज से यादगार बने। सरयू के 56 घाटों पर लाखों दीपों की रोशनी के साथ पूरी रामनगरी के एक बार फिर उत्सव के रंग में रंगने की तैयारी है।
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