कांवड़ मार्ग की छपकौली नहर में दिखा मगरमच्छ, ग्रामीणों और शिवभक्तों में मचा हड़कंप
छपकौली। कांवड़ यात्रा के बीच शनिवार दोपहर छपकौली नहर में मगरमच्छ दिखाई देने से इलाके में हड़कंप मच गया। नहर के किनारे से गुजर रहे ग्रामीणों और कांवड़ियों की नजर जैसे ही पानी में मौजूद मगरमच्छ पर पड़ी, मौके पर लोगों की भीड़ जमा हो गई। कांवड़ मार्ग पर मगरमच्छ देखे जाने की सूचना तेजी से आसपास के इलाकों में फैल गई, जिससे हरिद्वार से गंगाजल लेकर लौट रहे शिवभक्तों में भी दहशत का माहौल बन गया।
स्थानीय लोगों ने घटना की सूचना वन विभाग को दी। इसके बाद वन विभाग की टीम के मौके पर पहुंचकर मगरमच्छ की निगरानी और उसे सुरक्षित तरीके से हटाने की कोशिश किए जाने की उम्मीद है। फिलहाल नहर के आसपास लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है।
कांवड़ मार्ग से गुजरती है छपकौली नहर
छपकौली नहर के आसपास से कांवड़ यात्रा का मार्ग गुजरता है। सावन के महीने में इस रास्ते से बड़ी संख्या में कांवड़िये हरिद्वार से गंगाजल लेकर अपने-अपने गंतव्य की ओर लौटते हैं। कांवड़ यात्रा के दौरान मार्ग पर श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ जाने के कारण नहर में मगरमच्छ की मौजूदगी ने सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
शनिवार दोपहर कुछ ग्रामीण और शिवभक्त नहर के किनारे से गुजर रहे थे। इसी दौरान लोगों ने पानी में एक मगरमच्छ को देखा। पहले कुछ लोगों ने इसे सामान्य घटना समझा, लेकिन जब मगरमच्छ स्पष्ट रूप से नजर आया तो आसपास मौजूद लोग सतर्क हो गए।
देखते ही देखते मौके पर लोगों की भीड़ जुटने लगी। कई लोगों ने दूर से मगरमच्छ को देखने की कोशिश की। लोगों ने नहर के किनारे जाने से भी परहेज करना शुरू कर दिया।
सूचना फैलते ही कांवड़ियों में दहशत
कांवड़ यात्रा के दौरान मार्ग पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की आवाजाही होती है। ऐसे में नहर में मगरमच्छ दिखाई देने की खबर फैलने के बाद कांवड़ियों में भी चिंता बढ़ गई।
कांवड़िये कई बार यात्रा के दौरान रास्ते में कुछ देर आराम करने के लिए नहर और जलस्रोतों के आसपास रुकते हैं। गर्मी और थकान के कारण पानी के आसपास बैठना या हाथ-मुंह धोना भी आम बात है। ऐसे में मगरमच्छ की मौजूदगी श्रद्धालुओं के लिए जोखिम पैदा कर सकती है।
स्थानीय लोगों ने बताया कि नहर के आसपास ग्रामीणों की भी आवाजाही रहती है। यदि मगरमच्छ पानी से निकलकर नहर के किनारे आ गया तो स्थिति गंभीर हो सकती है।
वन विभाग को दी गई सूचना
मगरमच्छ दिखाई देने के बाद ग्रामीणों ने तत्काल वन विभाग को इसकी सूचना दी। लोगों का कहना है कि वन विभाग को जल्द से जल्द मौके पर पहुंचकर मगरमच्छ को सुरक्षित स्थान पर ले जाने की व्यवस्था करनी चाहिए।
मगरमच्छ को पकड़ने के लिए प्रशिक्षित टीम की जरूरत होती है। ऐसे में स्थानीय लोगों से भी अपील की जा रही है कि वे खुद मगरमच्छ को पकड़ने या उसके करीब जाने की कोशिश न करें। भीड़ के कारण मगरमच्छ घबराकर हमला भी कर सकता है।
वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, मगरमच्छ को देखकर उसके आसपास भीड़ जमा करना भी खतरनाक हो सकता है। ऐसे में लोगों को सुरक्षित दूरी बनाए रखना चाहिए और संबंधित विभाग को सूचना देकर कार्रवाई का इंतजार करना चाहिए।
पहले भी जलस्रोतों में दिख चुके हैं मगरमच्छ
नहर, नदी और तालाब जैसे जलस्रोतों में मगरमच्छों का दिखाई देना कई इलाकों में सामने आता रहा है। बारिश और जलस्तर में बदलाव के दौरान इनके अपने प्राकृतिक क्षेत्र से बाहर आने की संभावना भी बढ़ जाती है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि छपकौली नहर में मगरमच्छ की मौजूदगी की पुष्टि होती है तो वन विभाग को नहर के आसपास निगरानी बढ़ानी चाहिए। खासतौर पर कांवड़ यात्रा के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को लेकर अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत है।
कांवड़ यात्रा के मद्देनजर बढ़ी चिंता
सावन में हरिद्वार से गंगाजल लेकर लौटने वाले कांवड़ियों की संख्या काफी बढ़ जाती है। कई कांवड़िये पैदल लंबी दूरी तय करते हैं। इस दौरान वे रास्ते में अलग-अलग स्थानों पर रुकते हैं।
कांवड़ मार्ग के पास नहर में मगरमच्छ दिखाई देने से प्रशासन के सामने श्रद्धालुओं की सुरक्षा का सवाल खड़ा हो गया है। स्थानीय लोगों ने मांग की है कि कांवड़ मार्ग के आसपास नहर की नियमित निगरानी कराई जाए और जहां जरूरत हो, वहां लोगों को चेतावनी देने के लिए सूचना बोर्ड लगाए जाएं।
लोगों से सतर्क रहने की अपील
स्थानीय स्तर पर लोगों से नहर के किनारे जाने से बचने और पानी में उतरने से परहेज करने की अपील की जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि जब तक वन विभाग की ओर से मगरमच्छ को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं की जाती, तब तक नहर के आसपास विशेष सावधानी बरती जानी चाहिए।
कांवड़ियों को भी सलाह दी जा सकती है कि वे निर्धारित मार्ग पर ही चलें और नहर या किसी अन्य जलस्रोत के किनारे अनावश्यक रूप से न रुकें।
फिलहाल छपकौली नहर में मगरमच्छ दिखाई देने की घटना से ग्रामीणों और शिवभक्तों में चिंता बनी हुई है। वन विभाग की कार्रवाई के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि मगरमच्छ को सुरक्षित तरीके से वहां से हटाया गया है या नहीं। कांवड़ यात्रा के बीच इस घटना ने एक बार फिर श्रद्धालुओं और ग्रामीणों की सुरक्षा के लिए जलस्रोतों के आसपास सतर्कता बढ़ाने की जरूरत को सामने ला दिया है।