Deoria के दीपक ने नीट में चमकाया जिले का नाम

Update: 2026-07-18 16:11 GMT

Deoria देवरिया :  उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के भलुअनी विकासखंड के छोटे से गांव पिपरादौला कदम निवासी किसान परिवार के बेटे दीपक मद्धेशिया ने अपनी मेहनत और दृढ़ संकल्प के दम पर बड़ी उपलब्धि हासिल की है। राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET-UG) 2026 में शानदार प्रदर्शन करते हुए दीपक ने परिवार ही नहीं बल्कि पूरे जिले का नाम रोशन किया है। सीमित संसाधनों और आर्थिक चुनौतियों के बीच उन्होंने बिना किसी बड़े कोचिंग संस्थान का सहारा लिए घर पर स्वाध्याय के बल पर यह सफलता हासिल की है।

दीपक मद्धेशिया के पिता दयाशंकर मद्धेशिया पेशे से किसान हैं। खेती-किसानी से परिवार का पालन-पोषण करने वाले दयाशंकर के लिए बेटे की पढ़ाई का खर्च उठाना आसान नहीं था, लेकिन उन्होंने कभी भी आर्थिक परिस्थितियों को दीपक की पढ़ाई के रास्ते में बाधा नहीं बनने दिया। पिता के प्रोत्साहन और परिवार के सहयोग से दीपक ने अपनी पढ़ाई को पूरी लगन के साथ जारी रखा।

दीपक ने बताया कि उन्होंने नीट की तैयारी के लिए नियमित अध्ययन, अनुशासन और आत्मविश्वास को अपना आधार बनाया। उन्होंने घर पर रहकर पढ़ाई की और ऑनलाइन माध्यमों, किताबों तथा अध्ययन सामग्री की मदद से परीक्षा की तैयारी पूरी की। उन्होंने कहा कि सफलता के लिए जरूरी है कि छात्र अपने लक्ष्य को लेकर पूरी तरह समर्पित रहें और लगातार मेहनत करते रहें।

NEET-UG 2026 के परिणाम में दीपक ने 98.87 ओवरऑल परसेंटाइल हासिल किया है। उन्होंने ऑल इंडिया रैंक (AIR) 22,388 प्राप्त कर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। वहीं अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC-NCL) श्रेणी में उनकी रैंक 10,694 रही। यह उपलब्धि उनके परिवार और गांव के लिए गर्व का विषय बन गई है।

दीपक की सफलता की जानकारी मिलते ही गांव में खुशी का माहौल हो गया। ग्रामीणों ने उनके घर पहुंचकर परिवार को बधाई दी और दीपक के उज्ज्वल भविष्य की कामना की। लोगों ने कहा कि दीपक ने यह साबित कर दिया है कि सफलता हासिल करने के लिए केवल महंगे संसाधनों की जरूरत नहीं होती, बल्कि मजबूत इच्छाशक्ति, मेहनत और सही दिशा में प्रयास जरूरी होता है।

दीपक की इस उपलब्धि से उनके पिता दयाशंकर मद्धेशिया बेहद खुश हैं। उन्होंने कहा कि बेटे ने अपनी मेहनत से परिवार का सपना पूरा किया है। किसान परिवार से आने के बावजूद दीपक ने कभी परिस्थितियों को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया। पिता ने बताया कि उन्हें हमेशा विश्वास था कि उनका बेटा मेहनत के दम पर जरूर आगे बढ़ेगा।

दीपक की सफलता उन छात्रों के लिए भी प्रेरणा है, जो आर्थिक परेशानियों या सीमित संसाधनों के कारण अपने सपनों को अधूरा मान लेते हैं। उन्होंने दिखाया है कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत लगातार जारी रहे तो किसी भी परिस्थिति में सफलता हासिल की जा सकती है।

अब दीपक का लक्ष्य चिकित्सा क्षेत्र में आगे बढ़कर एक सफल डॉक्टर बनना है। वह अपनी पढ़ाई को आगे बढ़ाते हुए समाज की सेवा करना चाहते हैं। उनकी इस सफलता ने देवरिया जिले के युवाओं में भी नई उम्मीद और उत्साह पैदा किया है। किसान परिवार से निकलकर नीट जैसी कठिन परीक्षा में सफलता हासिल करना निश्चित रूप से दीपक की मेहनत, परिवार के त्याग और आत्मविश्वास की बड़ी मिसाल है।

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