बाराबंकी। उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले में जहरीले सांप के साथ जोखिम भरा व्यवहार पिता-पुत्र के लिए जानलेवा साबित हुआ। सतरिख थाना क्षेत्र के मुनक्कीपुरवा गांव में सोमवार रात एक काले नाग ने पहले 26 वर्षीय युवक को डस लिया। बेटे को बचाने के प्रयास में उसके 60 वर्षीय पिता भी सांप के डसने का शिकार हो गए। दोनों को उपचार के लिए जिला चिकित्सालय ले जाया गया। युवक की हालत बिगड़ने पर उसे एंटीवेनम की 20 वायल दी गईं, लेकिन उसकी आंखों की रोशनी प्रभावित होने और गले से जुड़ी गंभीर परेशानी सामने आने के बाद लखनऊ के ट्रामा सेंटर रेफर करना पड़ा। उपचार के प्रयासों के बावजूद पिता-पुत्र दोनों की मौत हो गई। मंगलवार को दोनों का अंतिम संस्कार किया गया। इस घटना से गांव में शोक का माहौल है।

सतरिख थाना क्षेत्र के मुनक्कीपुरवा में हादसा

जानकारी के अनुसार, घटना सतरिख थाना क्षेत्र के ग्राम मुनक्कीपुरवा की है।

यहां रहने वाले 60 वर्षीय महेश और उनके 26 वर्षीय पुत्र नौमीलाल को सांप पकड़ने का अनुभव था।

बताया जा रहा है कि दोनों सांप पकड़ लिया करते थे।

सोमवार रात जहरीले काले नाग को पकड़ने के दौरान यह हादसा हुआ।

पहले सांप ने नौमीलाल को डसा और इसके बाद बेटे को बचाने की कोशिश में महेश भी सर्पदंश का शिकार हो गए।

कुछ ही समय में यह घटना परिवार के लिए बड़ी त्रासदी बन गई।

सांप को पकड़ना पड़ा भारी

बताया गया है कि पिता-पुत्र जहरीले सांप को पकड़कर उसका प्रदर्शन कर रहे थे।

इसी दौरान सांप ने नौमीलाल को डस लिया।

बेटे को सांप से बचाने के प्रयास में पिता महेश भी उसके संपर्क में आ गए।

इसके बाद सांप ने उन्हें भी डस लिया।

एक ही घटना में पिता-पुत्र के सर्पदंश का शिकार होने से स्थिति गंभीर हो गई।

हालांकि, सांप को किस स्थान से पकड़ा गया था और घटना के समय वहां कितने लोग मौजूद थे, इसका विस्तृत विवरण उपलब्ध नहीं है।

बेटे को बचाने के प्रयास में पिता भी बने शिकार

घटना का सबसे दुखद पहलू यह रहा कि बेटे को बचाने की कोशिश में पिता भी सर्पदंश का शिकार हो गए।

नौमीलाल को सांप के डसने के बाद महेश ने उसे बचाने का प्रयास किया।

इसी दौरान सांप ने महेश को भी डस लिया।

जहरीले सांप के पास जाना या उसे हाथ से नियंत्रित करने का प्रयास करना अत्यंत खतरनाक हो सकता है।

विशेष रूप से जब सांप पहले ही किसी व्यक्ति को डस चुका हो, तब उसके आसपास अतिरिक्त सावधानी की आवश्यकता होती है।

इस घटना ने ऐसे जोखिमों को गंभीरता से समझने की जरूरत सामने रखी है।

दोनों को जिला चिकित्सालय पहुंचाया गया

सर्पदंश के बाद पिता-पुत्र को उपचार के लिए जिला चिकित्सालय ले जाया गया।

वहां चिकित्सकों ने उनकी स्थिति के अनुसार उपचार शुरू किया।

नौमीलाल की हालत गंभीर होने के कारण उसे एंटीवेनम की 20 वायल दी गईं।

एंटीवेनम जहरीले सांप के काटने के बाद विष के प्रभाव का उपचार करने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली महत्वपूर्ण दवा है।

हालांकि, उपचार की आवश्यकता और दवा की मात्रा मरीज की स्थिति तथा चिकित्सकीय मूल्यांकन पर निर्भर करती है।

20 वायल एंटीवेनम के बाद भी बिगड़ी हालत

जानकारी के अनुसार, नौमीलाल को एंटीवेनम की 20 वायल दिए जाने के बावजूद उसकी हालत में गंभीर समस्याएं सामने आईं।

बताया गया है कि उसकी आंखों की रोशनी प्रभावित होने लगी और गले से संबंधित परेशानी बढ़ गई।

ये लक्षण गंभीर सर्पदंश में तंत्रिका तंत्र पर विष के प्रभाव से जुड़े हो सकते हैं।

कुछ विषैले सांपों का जहर मांसपेशियों और श्वसन क्रिया को प्रभावित कर सकता है।

हालांकि, नौमीलाल में दिखाई दिए लक्षणों के सटीक चिकित्सकीय कारण की पुष्टि उपचार संबंधी रिकॉर्ड से ही हो सकेगी।

गंभीर हालत में लखनऊ रेफर

नौमीलाल की हालत बिगड़ने पर उसे बेहतर उपचार के लिए लखनऊ के ट्रामा सेंटर रेफर किया गया।

सर्पदंश के गंभीर मामलों में मरीज को विशेष निगरानी और श्वसन सहायता की आवश्यकता पड़ सकती है।

ऐसी स्थिति में विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधाओं की उपलब्धता महत्वपूर्ण होती है।

हालांकि, नौमीलाल को लखनऊ पहुंचाने के बाद दिए गए उपचार और वहां की चिकित्सकीय प्रक्रिया का विस्तृत विवरण उपलब्ध नहीं है।

उपचार के प्रयासों के बावजूद उसकी जान नहीं बचाई जा सकी।

पिता-पुत्र दोनों की मौत

इस घटना में महेश और उनके पुत्र नौमीलाल दोनों की मौत हो गई।

एक ही परिवार के दो सदस्यों की मौत से मुनक्कीपुरवा गांव में शोक का माहौल है।

महेश की उम्र 60 वर्ष थी, जबकि नौमीलाल महज 26 वर्ष का था।

एक ही घटना में पिता और बेटे की जान चले जाने से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा।

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, मंगलवार को दोनों के शवों का अंतिम संस्कार किया गया।

मंगलवार को एक साथ हुआ अंतिम संस्कार

सोमवार रात हुए हादसे के बाद मंगलवार को पिता-पुत्र का अंतिम संस्कार किया गया।

एक साथ दो लोगों की मौत की घटना ने गांव के लोगों को स्तब्ध कर दिया।

जहां परिवार में सामान्य दिनचर्या चल रही थी, वहीं अचानक हुई इस दुर्घटना ने सब कुछ बदल दिया।

ग्रामीण क्षेत्रों में सांपों की मौजूदगी कोई असामान्य बात नहीं है, लेकिन उन्हें पकड़ने या छेड़ने का प्रयास गंभीर जोखिम पैदा कर सकता है।

यह घटना उसी खतरे का दुखद उदाहरण बनकर सामने आई है।

सांप पकड़ने का अनुभव भी सुरक्षा की गारंटी नहीं

बताया गया है कि महेश और नौमीलाल दोनों सांप पकड़ लेते थे।

लेकिन किसी व्यक्ति को पहले से सांप पकड़ने का अनुभव होना उसके सुरक्षित रहने की गारंटी नहीं है।

जहरीले सांप को हाथ से पकड़ने के दौरान छोटी सी चूक भी जानलेवा साबित हो सकती है।

सांप अपने बचाव में अचानक हमला कर सकता है।

इसलिए सामान्य लोगों को सांप पकड़ने, उसके साथ करतब दिखाने या उसे छेड़ने का प्रयास नहीं करना चाहिए।

ऐसी स्थिति में प्रशिक्षित वन्यजीव बचाव दल की सहायता लेना सुरक्षित विकल्प है।

सर्पदंश के बाद क्या करना चाहिए?

विशेषज्ञों के अनुसार, सांप के डसने पर पीड़ित व्यक्ति को शांत रखते हुए उसकी अनावश्यक गतिविधियां कम करनी चाहिए।

प्रभावित अंग को यथासंभव स्थिर रखकर तुरंत नजदीकी ऐसे अस्पताल पहुंचाना चाहिए, जहां सर्पदंश के उपचार की सुविधा उपलब्ध हो।

घाव को काटना, जहर चूसने का प्रयास करना या कसकर रस्सी बांधना नुकसानदायक हो सकता है।

इसी प्रकार झाड़-फूंक या घरेलू उपचार के भरोसे अस्पताल पहुंचने में देरी नहीं करनी चाहिए।

सांप को पकड़कर अस्पताल ले जाने की कोशिश भी नहीं करनी चाहिए, क्योंकि इससे दूसरे लोगों के डसने का खतरा बढ़ सकता है।

काले नाग का जहर हो सकता है जानलेवा

कोबरा जैसे विषैले सांपों का जहर शरीर के तंत्रिका तंत्र को प्रभावित कर सकता है।

गंभीर मामलों में पलकें गिरना, देखने में परेशानी, बोलने या निगलने में कठिनाई और सांस लेने की मांसपेशियों में कमजोरी जैसे लक्षण सामने आ सकते हैं।

ऐसे लक्षण दिखाई देने पर तत्काल चिकित्सकीय सहायता अत्यंत आवश्यक होती है।

समय पर एंटीवेनम और आवश्यकता के अनुसार श्वसन सहायता जीवन बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

हालांकि, हर सर्पदंश की गंभीरता अलग होती है और उपचार का निर्णय चिकित्सक ही करते हैं।

गांव में शोक, लोगों के लिए चेतावनी बनी घटना

बाराबंकी के मुनक्कीपुरवा में हुई यह घटना लोगों के लिए गंभीर चेतावनी है।

जहरीले सांप को पकड़कर उसका प्रदर्शन करने का प्रयास जानलेवा साबित हो सकता है।

पिता-पुत्र को सांप पकड़ने का अनुभव होने के बावजूद दोनों उसकी चपेट में आ गए।

इस हादसे ने वन्यजीवों के साथ सुरक्षित दूरी बनाए रखने और सर्पदंश की स्थिति में तत्काल चिकित्सकीय सहायता लेने के महत्व को रेखांकित किया है।

महेश और नौमीलाल की मौत से परिवार और गांव में शोक का माहौल है। सोमवार रात हुए इस दर्दनाक हादसे के बाद मंगलवार को दोनों का अंतिम संस्कार किया गया।

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