लखनऊ: उत्तर प्रदेश में ब्लड सेंटरों की जांच के दौरान गंभीर अनियमितताएं मिलने पर खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन यानी एफएसडीए ने सात और केंद्रों की रक्त संबंधी गतिविधियों पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। इसके साथ ही प्रदेश में कार्रवाई के दायरे में आए केंद्रों की संख्या 14 हो गई है। विभाग के विशेष अभियान में अब तक 31 जिलों के 81 ब्लड सेंटरों का औचक निरीक्षण किया गया है। यह कार्रवाई प्रदेश के अलग-अलग जिलों में हुई है; प्रतिबंधित सभी 14 केंद्र अकेले लखनऊ में नहीं हैं। 
जांच में रक्त की स्क्रीनिंग, सुरक्षित भंडारण और आवश्यक कर्मचारियों की उपलब्धता से जुड़ी कमियां सामने आईं। रिपोर्टों के मुताबिक, कुछ केंद्रों पर निर्धारित एलिसा जांच के स्थान पर रैपिड किट का इस्तेमाल हो रहा था। कहीं खराब डीप फ्रीजर में रक्त घटक रखे मिले, तो कहीं चिकित्सक और प्रशिक्षित तकनीकी कर्मचारी अनुपस्थित थे। इसके बावजूद रक्त संग्रह, प्रसंस्करण और वितरण की गतिविधियां जारी रहने की जानकारी सामने आई है। इन्हीं कमियों के आधार पर विभाग ने संचालन रोकने का निर्णय लिया। 
विशेष अभियान चैरिटेबल ट्रस्ट और सोसाइटी की ओर से संचालित ब्लड सेंटरों की कार्यप्रणाली की जांच के लिए चलाया जा रहा है। औषधि निरीक्षकों की अंतरजनपदीय टीमें रक्त की गुणवत्ता, संक्रमण संबंधी जांच, तापमान नियंत्रण और स्टॉक प्रबंधन की पड़ताल कर रही हैं। निरीक्षण में लाइसेंस की वैधता, निर्धारित शुल्क तथा आवश्यक चिकित्सा और तकनीकी स्टाफ की मौजूदगी भी देखी जा रही है। विभाग का उद्देश्य रक्त संग्रह से लेकर मरीज को उपलब्ध कराने तक की प्रक्रिया में निर्धारित मानकों का पालन सुनिश्चित करना है। 
अभियान के पहले चरण में 10 जिलों के 40 केंद्रों की जांच हुई थी। उस समय सात केंद्रों की रक्त और रक्त घटक संबंधी गतिविधियां रोकी गई थीं। इनमें लखनऊ के तीन तथा आगरा, अलीगढ़, गोरखपुर और लखीमपुर खीरी के एक-एक केंद्र शामिल थे। बाद में जांच का दायरा बढ़ने और सात अतिरिक्त केंद्रों पर कार्रवाई होने से कुल संख्या 14 पहुंच गई। दोनों चरणों के आंकड़ों को अलग-अलग समझना जरूरी है। लखनऊ में पहले चरण की कार्रवाई के अंतर्गत लिटल स्टार, रामा चैरिटेबल और केएचएस चैरिटेबल ब्लड सेंटर का संचालन रोका गया था। प्रकाशित निरीक्षण संबंधी जानकारी के अनुसार, लिटल स्टार केंद्र में एलिसा मशीन खराब होने के बावजूद जांच के बिना रक्त और रक्त घटक जारी करने का मामला सामने आया। वहां प्रभारी चिकित्सा अधिकारी तथा तकनीकी कर्मचारियों की अनुपस्थिति भी दर्ज की गई। ये निरीक्षण में बताई गई अनियमितताएं हैं, जिनके आधार पर प्रशासनिक कार्रवाई हुई। 
रामा चैरिटेबल ब्लड सेंटर में अनिवार्य जांच पूरी किए बिना रक्त जारी करने और फ्रेश फ्रोजन प्लाज्मा को निर्धारित प्रक्रिया के विपरीत रखने की बात सामने आई। तय दर से अधिक शुल्क लेने की अनियमितता का भी उल्लेख किया गया। केएचएस चैरिटेबल ब्लड सेंटर में चिकित्सा अधिकारी और तकनीकी कर्मचारी अनुपस्थित मिले। इन मामलों ने यह सवाल उठाया है कि आवश्यक निगरानी और स्टाफ के बिना संवेदनशील चिकित्सा गतिविधियां कैसे चल रही थीं। 
दूसरे जिलों में भी उपकरणों और रिकॉर्ड के रखरखाव में कमियां मिलीं। आगरा के जय हिंद चैरिटेबल ब्लड सेंटर में रेफ्रिजरेटर और फ्रीजर के तापमान की लगातार रिकॉर्डिंग के लिए थर्मोग्राफ उपलब्ध नहीं होने की जानकारी दी गई। मुरादाबाद के पाकवारा चैरिटेबल ब्लड सेंटर में निरीक्षण के समय मेडिकल ऑफिसर और काउंसलर अनुपस्थित मिले। वहां इमरजेंसी ट्रे में एक्सपायर्ड इंजेक्शन मिलने तथा कुछ आवश्यक परीक्षण नहीं होने की बात भी रिपोर्ट में दर्ज है। 
पहले चरण की जांच में रक्त प्राप्त करने वाले व्यक्तियों का पूरा विवरण दर्ज नहीं करने की समस्या भी सामने आई थी। कुछ केंद्रों पर नाम, हस्ताक्षर और मोबाइल नंबर जैसे रिकॉर्ड अधूरे मिले। तापमान रजिस्टर और स्टॉक रजिस्टर के रखरखाव में भी लापरवाही बताई गई। ऐसे रिकॉर्ड संबंधित गतिविधियों की निगरानी और बाद में जांच के लिए महत्वपूर्ण होते हैं। विभाग ने केवल उपकरणों की उपलब्धता के बजाय पूरी प्रक्रिया और दस्तावेजों की पड़ताल पर जोर दिया है। 
एफएसडीए आयुक्त डॉ. रोशन जैकब के निर्देश पर चल रहे अभियान में अन्य निरीक्षित केंद्रों की कमियों पर भी कार्रवाई की जा रही है। जिन संस्थानों में खामियां मिली हैं, उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किए जा रहे हैं। नोटिस के माध्यम से संबंधित प्रबंधन से जवाब मांगा जाएगा। फिलहाल सभी निरीक्षित केंद्रों को बंद नहीं किया गया है और संचालन पर रोक वाले केंद्रों की कार्रवाई को स्थायी लाइसेंस निरस्तीकरण के रूप में भी नहीं बताया गया है। 
जिन केंद्रों की गतिविधियां रोकी गई हैं, वहां उपलब्ध रक्त और रक्त घटकों के निर्धारित मानकों के अनुसार सुरक्षित निस्तारण के निर्देश दिए गए हैं। विभाग ने विशेष निरीक्षण अभियान आगे भी जारी रखने की बात कही है। मरीजों को गुणवत्तापूर्ण रक्त उचित मूल्य पर उपलब्ध कराना इसकी प्रमुख प्राथमिकता बताई गई है। आगे संबंधित केंद्रों के जवाब, कमियों के मूल्यांकन और नियमानुसार निर्णय से उनकी स्थिति स्पष्ट होगी। फिलहाल 14 केंद्रों पर रोक और अन्य केंद्रों को नोटिस इस अभियान की प्रमुख कार्रवाई है।
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