11 साल तक फरार रहा कातिल चाचा, अब चढ़ा पुलिस के हत्थे

Update: 2026-07-22 17:01 GMT

उत्तर प्रदेश: बदायूं जिले के बिल्सी थाना क्षेत्र में 11 साल पुराने हत्या के मामले में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। वर्ष 2015 में पालतू कुत्ते को लेकर हुए मामूली विवाद में अपने ही भतीजे की गोली मारकर हत्या करने वाला आरोपी चाचा शाकिर अंसारी आखिरकार पुलिस के हत्थे चढ़ गया। आरोपी पिछले 11 साल से पुलिस को चकमा देकर पंजाब और दिल्ली में छिपकर रह रहा था। पुलिस की लगातार निगरानी और एक बैंक ट्रांजैक्शन ने उसकी तलाश को अंजाम तक पहुंचाया।

मामला बिल्सी थाना क्षेत्र के उलैया गांव का है। वर्ष 2015 में गांव निवासी अली मोहम्मद के बेटे मुश्ताक और उसके चाचा शाकिर अंसारी के बीच पालतू कुत्ते को लेकर विवाद हुआ था। यह विवाद इतना बढ़ गया कि गुस्से में आकर शाकिर ने अपने 20 वर्षीय भतीजे मुश्ताक की तमंचे से गोली मारकर हत्या कर दी थी। घटना के बाद आरोपी मौके से फरार हो गया और तभी से पुलिस उसकी तलाश कर रही थी।

जानकारी के मुताबिक, अली मोहम्मद अपने परिवार के साथ गांव में रहते थे। उनके छोटे भाई शाकिर अंसारी का घर भी पास में ही था। मुश्ताक ने अपने घर में एक पालतू कुत्ता पाल रखा था। बताया गया कि वह कुत्ता अक्सर शाकिर के घर चला जाता था। एक दिन शाकिर ने कुत्ते को डंडे से पीट दिया। कुत्ते की आवाज सुनकर मुश्ताक मौके पर पहुंच गया और उसने इसका विरोध किया। इसी बात को लेकर दोनों के बीच कहासुनी शुरू हो गई।

देखते ही देखते विवाद बढ़ गया और दोनों पक्षों में मारपीट होने लगी। इसी दौरान शाकिर ने तमंचा निकालकर मुश्ताक पर गोली चला दी। गोली लगने से मुश्ताक गंभीर रूप से घायल हो गया। परिजन उसे अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन रास्ते में ही उसकी मौत हो गई।

मुश्ताक की मां नगीना बेगम ने बताया था कि उनका बेटा कुत्ते के साथ खेल रहा था, तभी देवर शाकिर ने विवाद करते हुए उसे गोली मार दी। उन्होंने बताया कि मुश्ताक की शादी घटना से करीब एक साल पहले ही हुई थी और उसकी एक छोटी बेटी भी थी। पति की मौत के बाद उसकी पत्नी बेटी को लेकर मायके चली गई।

हत्या के बाद शाकिर अंसारी ने अपना घर छोड़ दिया और फरार हो गया। पुलिस ने उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज कर तलाश शुरू की, लेकिन वह लगातार अपना ठिकाना बदलता रहा। पुलिस के अनुसार, आरोपी ने अपना घर तक बेच दिया था और गांव से पूरी तरह गायब हो गया था। वह करीब 11 साल तक पंजाब और दिल्ली में छिपकर रह रहा था।

इस दौरान पुलिस ने आरोपी की तलाश के लिए उसके मोबाइल नंबर, बैंक खाते और रिश्तेदारों पर नजर बनाए रखी। इंस्पेक्टर मनोज कुमार सिंह के अनुसार, अचानक आरोपी के बैंक खाते में गतिविधि दिखाई दी। जांच में पता चला कि दिल्ली से उसके खाते से रुपये निकाले गए हैं। इसी बैंक ट्रांजैक्शन के आधार पर पुलिस को आरोपी की लोकेशन का सुराग मिला।

इसके बाद पुलिस ने अपनी जांच तेज की और आरोपी की गतिविधियों पर नजर रखी। मुखबिर से मिली सूचना के आधार पर पुलिस ने शाकिर अंसारी को हैदलपुर गांव के पास से गिरफ्तार कर लिया। आरोपी के खिलाफ पहले से ही न्यायालय से वारंट जारी था। गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने आवश्यक कानूनी कार्रवाई पूरी कर उसे न्यायालय में पेश किया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।

इस घटना ने दोनों परिवारों को पूरी तरह उजाड़ दिया। हत्या के बाद मुश्ताक का परिवार बिखर गया, जबकि आरोपी शाकिर के परिवार को भी गांव छोड़कर जाना पड़ा। डर और सामाजिक दबाव के कारण शाकिर के परिजनों ने भी अपना घर बेच दिया। आज दोनों परिवारों के मकान खाली पड़े हैं।

पुलिस का कहना है कि लंबे समय से फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए तकनीकी निगरानी और बैंकिंग गतिविधियों पर नजर रखना बेहद प्रभावी साबित हो रहा है। इस मामले में भी एक छोटे से बैंक ट्रांजैक्शन ने 11 साल पुराने हत्या के आरोपी को कानून के शिकंजे तक पहुंचा दिया।

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